
झारखंड में राज्य सभा चुनाव को लेकर बुधवार को राजनीतिक घमासान के बीच निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी का नामांकन स्वीकार कर लिया गया है। इसके बाद झारखंड का सियासी तापमान और बढ़ गया है। दरअसल, यह विवाद परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को लेकर शुरू हुआ था। इस मामले में कांग्रेस का पक्ष रखने के लिए दिल्ली से रांची पहुंचे वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद को रिटर्निंग ऑफिसर ने सुनवाई में शामिल होने की अनुमति नहीं दी, जिससे विवाद और गहरा गया।
इसके बाद विधानसभा परिसर के भीतर और बाहर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के नेता अपने-अपने पक्ष के समर्थन में नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। राज्यसभा चुनाव में परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर शुरू हुआ यह मामला अब बड़े राजनीतिक टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
दरअसल, कांग्रेस ने परिमल नाथवानी के एफिडेविट पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उनका नाम “नाथवानी परिमल” नहीं, बल्कि “परिमल नाथवानी” है। साथ ही आरोप लगाया गया कि नाथवानी ने अपनी संपत्ति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई हैं। इस मुद्दे के सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया।
इस मामले पर परिमल नाथवानी की ओर से अधिवक्ताओं ने सुबह करीब 11 बजे से अपना पक्ष रखना शुरू किया। वहीं, कांग्रेस विधायक प्रणव झा की ओर से आपत्ति और तर्क प्रस्तुत करने के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद को सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने की अनुमति नहीं दी गई। रिटर्निंग ऑफिसर के इस फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं और मंत्रियों में नाराजगी फैल गई और वे आक्रोशित हो उठे। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद विशेष रूप से दिल्ली से रांची पार्टी का पक्ष रखने पहुंचे थे। सूत्रों के अनुसार नामांकन स्वीकार कर लिया गया है।
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