पटना

नीट पेपर लीक से बिहार में सियासी तूफान, बांकीपुर उपचुनाव में किसे मिलेगा छात्रों के गुस्से का फायदा?

NEET पेपर लीक के विरोध में पटना में छात्रों के उग्र प्रदर्शन ने बिहार की राजनीति गरमा दी है। अब चर्चा इस बात की है कि 30 जुलाई को होने वाले बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव पर इस आंदोलन का कितना असर पड़ेगा। बीजेपी और जनसुराज इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं।
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Jul 23, 2026
प्रशांत किशोर -नीरज सिन्हा
प्रशांत किशोर -नीरज सिन्हा

नीट पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बुधवार को पटना की सड़कों पर छात्रों का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा। इस प्रदर्शन ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 30 जुलाई को होने वाले बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले हुए इस छात्र आंदोलन का असर बीजेपी के गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर में भी दिखाई दे सकता है। पहले से कड़े मुकाबले का सामना कर रही बीजेपी के लिए यह एक नई चुनौती बन सकता है।

हालांकि, बीजेपी नेता इस आकलन से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि बांकीपुर का उपचुनाव पूरी तरह स्थानीय मुद्दों पर लड़ा जा रहा है, जबकि छात्रों का विरोध प्रदर्शन एक राष्ट्रीय मुद्दे से जुड़ा है। इसलिए इसका चुनावी परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। बीजेपी नेताओं का दावा है कि बांकीपुर पार्टी का मजबूत गढ़ है और वहां उनकी जीत तय है।

किसे मिलेगा छात्रों के गुस्से का फायदा?

इधर, जनसुराज के प्रत्याशी प्रशांत किशोर इस मुद्दे को चुनावी बहस के केंद्र में लाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों का यह आंदोलन अभी और बड़ा रूप लेगा, क्योंकि नौकरियां बेची जा रही हैं और इसी वजह से युवाओं में भारी आक्रोश है। उनके मुताबिक, बिहार के युवा पिछले कई वर्षों से हर दो-चार महीने पर किसी न किसी परीक्षा के पेपर लीक होने की घटनाएं देख रहे हैं, लेकिन इसमें शामिल लोगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। यही कारण है कि छात्रों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई दे रहा है।

प्रशांत किशोर ने कहा, "बुधवार को प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि वे कड़ी मेहनत करके परीक्षा देते हैं, लेकिन नौकरियां पैसे लेकर बेच दी जाती हैं। परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक कर दिए जाते हैं। ऐसे में छात्रों का गुस्सा फूटना स्वाभाविक था। अब यह आंदोलन किस रूप में आगे बढ़ता है, यह आने वाला समय बताएगा।" जब उनसे पूछा गया कि क्या इस आंदोलन का असर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव पर पड़ेगा, तो उन्होंने कहा, "बांकीपुर की जनता पढ़ी-लिखी और जागरूक है। वह सब कुछ देख और समझ रही है। 30 जुलाई को जनता अपना फैसला सुना देगी।"

बांकीपुर बीजेपी का गढ़ है

वहीं, बीजेपी नेता और बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष रणवीर नंदन ने इस दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा कि पटना में छात्रों के आंदोलन का बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनके अनुसार, यह चुनाव स्थानीय विकास के मुद्दों पर लड़ा जा रहा है और बीजेपी जीत की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा, "बांकीपुर की जनता अपने क्षेत्र में हुए विकास कार्यों के आधार पर मतदान करेगी। पूर्व विधायक नितिन नवीन ने यहां विकास की मजबूत नींव रखी है और जनता उसी पर भरोसा जताएगी।" उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर विधानसभा से चुनाव जीत रहे हैं।

सरकार से हुई राजनीतिक चूक

इस पूरे घटनाक्रम पर वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी का कहना है कि पेपर लीक के लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, लेकिन अब तक कोई ऐसी व्यवस्था नहीं बन सकी, जिससे इन घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश उन्हें पद से हटाना संभव नहीं था, तो कम से कम मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान उनका विभाग बदला जा सकता था। उनके मुताबिक, इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राजनीतिक स्तर पर चूक हुई है, जिससे केंद्र सरकार दबाव में दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि बुधवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके चेहरे के भाव भी सरकार की असहजता को दर्शा रहे थे।

हालांकि, चुनावी असर को लेकर प्रवीण बागी का मानना है कि इसका वास्तविक प्रभाव मतदान के दिन ही स्पष्ट होगा। यदि छात्र और युवा मतदाता इस मुद्दे को चुनाव में प्रमुखता से उठाते हैं, तो इसका असर बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम पर भी देखने को मिल सकता है। वहीं, यदि स्थानीय मुद्दे हावी रहे, तो इसका प्रभाव सीमित रह सकता है।

Updated on:
23 Jul 2026 12:05 pm
Published on:
23 Jul 2026 11:48 am