पटना

जब विरोधी होकर भी नीतीश कुमार का साथ देते थे विजय चौधरी, पूर्व सीएम ने सदन में खुद सुनाया था किस्सा

Nitish Kumar: 2015 में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद जब विजय कुमार चौधरी को सर्वसम्मति से स्पीकर चुना गया तो नीतीश कुमार भावुक हो गए थे। उन्होंने उस वक्त सदन में साल 1985 का वह अनसुना किस्सा सुनाया, जब वे लोकदल में थे और विजय चौधरी कांग्रेस में। 

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May 19, 2026
नीतीश कुमार और विजय कुमार चौधरी

Nitish Kumar: बिहार की राजनीति का इतिहास ऐसे कई दिलचस्प किस्सों से भरा पड़ा है, जिनमें एक-दूसरे से बिल्कुल अलग विचारधारा वाले नेता अक्सर सदन में एक साथ खड़े देखे गए। 2 दिसंबर 2015 को उस समय के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी विधानसभा में एक ऐसा ही किस्सा शेयर किया था, जब महागठबंधन सरकार के दौरान बिहार के वर्तमान डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी को उस वक्त विधानसभा का अध्यक्ष चुना गया था। नीतीश ने 1985 के उस दौर को याद किया था जब विजय चौधरी कांग्रेस में थे और नीतीश लोकदल में, लेकिन इसके बावजूद दोनों के बीच गजब का तालमेल था।

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नीतीश लोकदल में और विजय चौधरी कांग्रेस में थे

विजय कुमार चौधरी के सर्वसम्मति से स्पीकर चुने जाने पर बधाई देते हुए नीतीश कुमार ने उनके लंबे राजनीतिक अनुभव का जिक्र किया था। नीतीश कुमार ने बताया कि विजय चौधरी का संसदीय जीवन बेहद समृद्ध रहा है और वे 1980 के दशक से ही विधानसभा के सदस्य चुने जाते रहे हैं। अपनी यादों को साझा करते हुए नीतीश कुमार ने कहा था, '1985 से 1990 के बीच में, मैं भी पहली बार इस विधानसभा का सदस्य निर्वाचित हुआ था और उस समय आप (विजय चौधरी) भी इस सदन के सदस्य थे। हम लोग सदन में बिल्कुल आमने-सामने बैठते थे। मैं लोकदल का सदस्य था और आप कांग्रेस पार्टी के सदस्य थे।'

विरोधी दल के होने के बाद मिलता था विजय चौधरी का साथ

उस स्पीच में नीतीश कुमार ने खास तौर पर इस बात का जिक्र किया था कि वैचारिक रूप से विरोधी खेमे में होने के बाद भी विजय चौधरी का रुख हमेशा सकारात्मक रहता था। उन्होंने पुरानी संसदीय परंपराओं की दुहाई देते हुए कहा था, 'उन दिनों जब हम विपक्ष में रहते हुए जनहित के मुद्दों को सदन में उठाने की कोशिश करते थे, तो वैसे मुद्दों पर आपका (विजय चौधरी) और उस समय के कुछ अन्य सदस्यों का भरपूर सहयोग प्राप्त होता था। हम जनहित के मुद्दों पर पक्ष और विपक्ष के लोग उस जमाने में भी, जहां जरूरी समझते थे, वहां एक-दूसरे की बातों का खुलकर समर्थन करते थे।'

सर्वसम्मति से चुने जाने पर जताई थी खुशी

भाषण के दौरान नीतीश कुमार ने इस बात पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की थी कि विजय कुमार चौधरी को किसी एक दल ने नहीं, बल्कि पूरे सदन ने सर्वसम्मति से अपना अध्यक्ष चुना था। उन्होंने कहा था कि बिहार विधानसभा की यह बेहद गौरवशाली परंपरा रही है कि हम भले ही राजनीतिक मुद्दों पर अलग-अलग विचार रखते हों, विभिन्न विषयों पर हमारी राय अलग हो सकती है, लेकिन सदन की गरिमा बनाए रखने के मकसद से आपसी बातचीत से सर्वसम्मति को बढ़ावा देते हैं और यही लोकतंत्र की जीत है। नीतीश कुमार ने कहा था कि जैसे ही विजय चौधरी के नाम की चर्चा शुरू हुई थी, सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सभी दलों में उनके प्रति एक समान आदर और सम्मान का भाव देखा गया।

विजय चौधरी की तारीफ

मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने विजय चौधरी को सत्ता पक्ष और अपनी तरफ से सदन के सुचारू संचालन में भरपूर सहयोग देने का भरोसा दिया था। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि विजय चौधरी अपने कार्यकाल के दौरान कुछ नए अध्याय जोड़ने में कामयाब होंगे। विजय चौधरी के व्यवहार की तारीफ करते हुए नीतीश कुमार ने कहा था, 'आप एक सदस्य के रूप में भी लंबे समय तक काम कर चुके हैं और मंत्री के रूप में भी आपने बेहतरीन भूमिका निभाई है, इसलिए आप संसदीय लोकतंत्र के हर पहलू से वाकिफ हैं। अब अध्यक्ष के रूप में काम करने का यह नया अनुभव आपके पहले से ही विकसित व्यक्तित्व को और बहुआयामी बनाएगा और आपके राजनीतिक सफर में चार चांद लगाएगा।'

अब नीतीश के खास हैं विजय

वर्तमान समय में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी का राजनीतिक व व्यक्तिगत रिश्ता बेहद अटूट, भरोसेमंद और गहरा बना हुआ है। विजय कुमार चौधरी को नीतीश कुमार के सबसे खास, संकटमोचक और 'कोर कमिटी' के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिना जाता है। चाहे पार्टी के भीतर रणनीति बनानी हो या कोई बड़ा फैसला लेना हो, नीतीश कुमार हमेशा विजय चौधरी की प्रशासनिक सूझबूझ और शांत स्वभाव पर भरोसा करते हैं।

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