नीतीश कुमार के राज्य सभा के लिए नामांकन करने के बाद बीजेपी के पांच नेता जनक राम, दिलीप जायसवाल, डॉ. संजय जायसवाल, नित्यानंद राय और सम्राट चौधरी—मुख्यमंत्री पद की दौड़ में बताए जा रहे हैं।
Bihar Politics जदयू प्रमुख और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को राज्य सभा के लिए अपना नॉमिनेशन पेपर फाइल किया। इसके साथ ही बिहार में बीजेपी के लिए अपना मुख्यमंत्री तय करने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। चूंकि बीजेपी ने दिल्ली, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री चुनने के दौरान कई बार चौंकाने वाले फैसले किए हैं, इसलिए राजनीतिक गलियारों में नीतीश कुमार के बाद बिहार के संभावित मुख्यमंत्री को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सीएम पद के संभावित चेहरों के तौर पर पांच बड़े नाम सामने आ रहे हैं। इनमें सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय, दिलीप जायसवाल, संजय जायसवाल और जनक राम का नाम शामिल है।
सम्राट चौधरी वर्तमान में वे बिहार के डिप्टी सीएम और गृह मंत्री हैं। उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद सरकार का दूसरा सबसे पावरफुल मिनिस्टर माना जाता है। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे सम्राट चौधरी कोइरी समुदाय से आते हैं और जातीय समीकरण के लिहाज से वे नीतीश कुमार की ‘लव-कुश’ केमिस्ट्री में फिट बैठते हैं, क्योंकि नीतीश कुमार कुर्मी जाति से हैं। बिहार की आबादी में कोइरी समुदाय की हिस्सेदारी करीब 4.21 प्रतिशत मानी जाती है। हालांकि, उनका पहले आरजेडी और जेडीयू से जुड़ा राजनीतिक बैकग्राउंड मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उनके खिलाफ भी जा सकता है।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भरोसेमंद माना जाता है। वे यादव समुदाय से आते हैं और इस वजह से आरजेडी के पारंपरिक यादव वोट बैंक में सेंध लगाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। एबीवीपी पृष्ठभूमि से राजनीति में आए नित्यानंद राय बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनकी पदोन्नति यादव समुदाय के बीच एक मजबूत राजनीतिक संदेश दे सकती है। हालांकि, बीजेपी के भीतर कुछ नेताओं का मानना है कि अगर उन्हें बिहार की शीर्ष जिम्मेदारी दी जाती है, तो इससे अन्य ओबीसी और ईबीसी समुदायों में असंतोष भी पैदा हो सकता है।
डॉ. संजय जायसवाल वर्ष 2009 से पश्चिम चंपारण से लोकसभा सांसद हैं। डॉ. संजय जायसवाल बीजेपी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्हें विपक्ष का सामना करने के मामले में शांत लेकिन सख्त नेता माना जाता है। करीब 60 वर्षीय डॉ. संजय जायसवाल स्वर्गीय मदन प्रसाद जायसवाल के बेटे हैं, जो बेतिया से तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके थे। वैश्य समुदाय से आने के कारण उन्हें बीजेपी नेतृत्व के करीब माना जाता है और वे पार्टी के जातीय समीकरण में भी फिट बैठते हैं।
नीतीश कैबिनेट में मंत्री दिलीप जायसवाल के नाम की भी चर्चा हो रही है। दिलीप जायसवाल बिहार में नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव के समय बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष थे। इनके ही कार्यकाल में NDA को 202 सीटें मिली। जायसवाल वैश्य (कलवार) समुदाय से भी हैं और उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी माना जाता है। वे एक नरमपंथी और संगठनात्मक भरोसेमंद नेता हैं, वे सीमांचल के किशनगंज से हैं। अमित शाह हाल ही में अपने 3 दिन के सीमांचल दौरे के दौरान किशनगंज में उनके घर पर रुके थे।
जनक राम को बिहार में बीजेपी का एक प्रमुख दलित चेहरा माना जाता है। वे बिहार सरकार में खनन तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री रह चुके हैं। गोपालगंज से पूर्व लोकसभा सांसद रहे जनक राम वर्तमान में विधान परिषद (MLC) के सदस्य हैं और उन्हें संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाला नेता माना जाता है। मास्टर और एलएलबी की डिग्री रखने वाले जनक राम रविदास समुदाय से आते हैं और आम तौर पर लो-प्रोफाइल राजनीति के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपना राजनीतिक करियर बीजेपी में जमीनी स्तर से शुरू किया था।