पटना

पटना गर्ल्स हॉस्टल केस: पहले मेनिन्जाइटिस का इलाज, फिर सुसाइड थ्योरी कहां से आई? पिता ने DGP को सौंपी मांगों की लिस्ट

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल मामले में इंसाफ की लड़ाई अब DGP तक पहुंच गई है। NEET छात्रा के पिता ने DGP विनय कुमार को 8 मांगों की लिस्ट सौंपी है, जिसमें पुलिस और हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन के बीच मिलीभगत के आरोपों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
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Jan 26, 2026
पटना शंभू गर्ल्स हॉस्टल कांड | patna hostel case | Patna NEET Student Death Case
शंभू गर्ल्स हॉस्टल

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET परीक्षा की तैयारी कर रही जहानाबाद की एक छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है। मृत छात्रा के पिता ने सीधे बिहार के DGP विनय कुमार से मुलाकात की और पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आठ मांगों की एक लिखित लिस्ट सौंपी, जिसमें पूछा गया है कि जब अस्पताल ने शुरू में उसका इलाज वायरल मेनिनजाइटिस और ब्रेन क्लॉट के लिए किया था, तो बाद में अचानक आत्महत्या और नींद की गोलियों की थ्योरी कहाँ से आई?

DGP के साथ आधे घंटे की मीटिंग, लिखित आवेदन सौंपा

DGP विनय कुमार से लगभग आधे घंटे की मुलाकात के दौरान, छात्रा के पिता ने एक लिखित आवेदन सौंपा, जिसमें जांच में कथित लापरवाही और विरोधाभासों का विस्तार से जिक्र किया गया था। आवेदन पढ़ने के बाद, DGP ने तुरंत पटना के IG से बात की और फिर SSP पटना और SIT प्रमुख, SDPO सचिवालय वन को लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली एक रिव्यू मीटिंग के लिए बुलाया।

आठ बिंदुओं पर जांच की मांग

मृत छात्रा के पिता ने डीजीपी से जिन आठ अहम बिंदुओं पर जांच की मांग की है, उनमें सबसे पहला सवाल CCTV फुटेज से संबंधित है। उन्होंने मांग की कि 5 जनवरी शाम 5 बजे से 6 जनवरी तक के सभी CCTV फुटेज का FSL (फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) विश्लेषण किया जाए। उन्होंने हॉस्टल रजिस्टर और मेस रजिस्टर के आधार पर हॉस्टल में मौजूद सभी छात्राओं की गहन जांच की भी मांग की, जिसमें उनके बयान और मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) शामिल हैं। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि इन दस्तावेजों की सर्टिफाइड कॉपी परिवार को दी जाए।

हॉस्टल मालिक और मैनेजर के मोबाइल फोन पर सवाल

हॉस्टल बिल्डिंग के मालिक मनीष रंजन, उनके बेटे, और हॉस्टल मैनेजर नीलम अग्रवाल, उनके पति श्रवण अग्रवाल, और उनके बेटे आशु अग्रवाल के मोबाइल CDR की जांच की भी मांग की गई है। इसमें हॉस्टल के पिछले दरवाजे, आसपास की गलियों और सड़क के CCTV फुटेज के FSL विश्लेषण की भी मांग की गई है।

डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भूमिका संदिग्ध?

छात्र के पिता ने प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल और दूसरे अस्पतालों से जुड़े डॉक्टरों के मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच की मांग की है। जिनमें डॉ. सहजानंद प्रसाद सिंह, डॉ. सतीश कुमार, डॉ. अभिषेक (30 सर्क घनश्याम), और जया नाम की एक महिला डॉक्टर का नाम शामिल है। DGP को सौंपे गए लेटर में एक नर्सिंग स्टाफ मेंबर का जिक्र है जिसने 7 जनवरी की रात को छात्र की मां से कहा था कि "लड़की के साथ कुछ बहुत गलत हुआ है।" पिता का कहना है कि यह बयान बहुत गंभीर है और उन्होंने मांग की है कि नर्स की पहचान की जाए और CCTV फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर और दूसरे रिकॉर्ड के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाए।

पुलिस की भूमिका पर सवाल

परिजनों ने चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रोशनी कुमारी की भूमिका को शुरू से संदिग्ध बताते हुए उनकी कार्यशैली की जांच की मांग की है। गौरतलब है कि डीजीपी के निर्देश के बाद ही रोशनी कुमारी और कदमकुआं के अपर थानाध्यक्ष हिमांशु झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

इलाज और आत्महत्या की थ्योरी में विरोधाभास

DGP को सौंपे गए लेटर के आखिर में, पिता ने सवाल उठाया है कि 8 जनवरी तक सभी टेस्ट रिपोर्ट उपलब्ध होने के बावजूद बच्ची का ड्रग ओवरडोज का इलाज नहीं किया गया। इसके बाद 9 जनवरी को ICU में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने वायरल मेनिनजाइटिस और सिर में खून के थक्के का जिक्र किया, तो फिर बिना किसी ठोस मेडिकल सबूत के नींद की गोलियों से मौत का दावा कैसे किया गया?

पुलिस POCSO एक्ट की धाराएं जोड़ेगी

केस में POCSO एक्ट की धाराएं भी जोड़ी जाएंगी और पुलिस ने इसके लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। SIT ने छात्र की उम्र वेरिफाई करने के लिए परिवार से उम्र से जुड़े सर्टिफिकेट मांगे थे। परिवार ने पुलिस को छात्र का आधार कार्ड और मैट्रिक का सर्टिफिकेट दिया है। इन सर्टिफिकेट के आधार पर, पुलिस, छात्र को नाबालिग मानते हुए, अब POCSO एक्ट की धाराएं जोड़ने के लिए कोर्ट में याचिका दायर करेगी। संबंधित केस को स्पेशल POCSO कोर्ट में भी ट्रांसफर किया जाएगा।

SIT और पुलिस जांच पर बढ़ता अविश्वास

परिवार का आरोप है कि शुरू से ही पुलिस ने स्टेशन हाउस ऑफिसर और हॉस्पिटल की रिपोर्ट पर आंख मूंदकर भरोसा किया, जिससे जांच प्रभावित हुई है। परिवार ने 10 जनवरी को पीड़ित के अंडरगारमेंट्स भी पुलिस को सौंप दिए थे, लेकिन इसके बावजूद जांच की दिशा पर सवाल बने हुए हैं।

Updated on:
26 Jan 2026 09:01 am
Published on:
26 Jan 2026 09:01 am
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