
PMCH Principal removal: बिहार के सबसे बड़े हॉस्पिटल पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) के प्रभारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को पद से हटाए जाने का प्रशासनिक मामला अब एक नया मोड़ ले चुका है। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के बाद हुई इस कार्रवाई के खिलाफ राज्य सरकार के आधिकारिक 'सहयोग पोर्टल' (RTMS) पर शिकायत दर्ज कराई गई है।
पटना के बुद्ध कॉलोनी निवासी जाने-माने विधिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रभाष चंद्र शर्मा ने 25 जून 2026 को इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC), प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अध्यक्ष को एक आधिकारिक शिकायत भेजी है। शिकायतकर्ता ने स्वास्थ्य मंत्री के इस एक्शन को पूरी तरह तानाशाही बताते हुए डॉक्टर के लिए 100 करोड़ रुपये के मुआवजे की भी मांग की है।
सहयोग पोर्टल और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को भेजी गई इस शिकायत में प्रभाष चंद्र शर्मा ने कई आरोप लगाए हैं। शिकायत पत्र के अनुसार, डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने जनवरी 2026 में पीएमसीएच के प्रिंसिपल का पदभार संभालने के बाद अस्पताल की सुपर-स्पेशियलिटी बिल्डिंग में 'प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना' के तहत आए करोड़ों रुपये के महंगे चिकित्सा उपकरणों की अवैध जमाखोरी और हेराफेरी का भंडाफोड़ किया था। वे भ्रष्टाचार के इस बड़े सिंडिकेट को पूरी तरह बेनकाब करने वाले थे, इसी वजह से ये कार्रवाई की गई है।
प्रभाष चंद्र शर्मा का आरोप है कि इसी बड़े घोटाले को दबाने और भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने के उद्देश्य से स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने जानबूझकर पीएमसीएच का दौरा किया। बिना किसी पूर्व कारण बताओ नोटिस या उचित विभागीय जांच के, फिल्म 'नायक' के अनिल कपूर की तरह 24 घंटे के भीतर डॉ. सिंह को हटाने का तानाशाही आदेश जारी कर दिया गया। पत्र में यह भी कहा गया है कि अपनी ईमानदारी और सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण डॉ. सिंह पिछले एक दशक से विभागीय प्रताड़ना का शिकार रहे हैं और इसी कारण उन्हें लंबे समय तक इस पद से वंचित रखा गया था।
सामाजिक कार्यकर्ता प्रभाष चंद्र शर्मा ने मांग की है कि सरकार डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह के पद को 24 घंटे के भीतर ससम्मान बहाल करे, स्वास्थ्य मंत्री इस तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और पीड़ित डॉक्टर की बेदाग छवि को धूमिल करने के एवज में उन्हें 100 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
दरअसल, 23 जून 2026 को स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पीएमसीएच के रेडियोलॉजी विभाग में नई सुविधाओं का उद्घाटन करने पहुंचे थे। निशांत कुमार ने इस दौरान अस्पताल का निरीक्षण भी किया। लेकिन, इस दौरान तत्कालीन प्रभारी प्रिंसिपल डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित पाए गए। निशांत कुमार ने प्राचार्य को फोन भी किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। निरीक्षण के बाद नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था, "प्राचार्य अपनी कुर्सी पर मौजूद नहीं थे और उनकी जगह कोई अन्य जिम्मेदार अधिकारी भी उपलब्ध नहीं था। फोन करने के बावजूद संपर्क नहीं हो सका।"
स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई त्वरित जांच में यह दावा किया गया कि डॉ. सिंह ने न तो अवकाश का कोई आवेदन दिया था और न ही किसी अन्य अधिकारी को प्रभार सौंपा था। विभागीय जांच में यह बात सामने आई कि ड्यूटी अवधि के दौरान वे अस्पताल के बजाय अपने निजी क्लिनिक पर प्रैक्टिस कर रहे थे। विभाग ने इसे प्रशासनिक लापरवाही, कर्तव्यहीनता, सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग और अनधिकृत अनुपस्थिति का मामला मानते हुए, डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को उनके पद से हटा दिया। उनकी जगह डॉ. गीता सिन्हा को पीएमसीएच का नया प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया गया है।
विभागीय कार्रवाई से आहत और आक्रोशित डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से गुहार लगाई। उन्होंने कहा, "बिहार सरकार भले ही राज्य में अपराध पर कड़ा नियंत्रण कर रही है और कानून का राज स्थापित कर रही है, जो कि सराहनीय है। लेकिन इसके साथ ही सरकार की यह भी जिम्मेदारी बनती है कि वह समाज के हमारे जैसे विद्वान, ईमानदार और समझदार लोगों के हितों की भी रक्षा करे। हमें इस तरह प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए।" डॉ सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी गुज़ारिश की कि वे सुशासन के इस दौर में उनके साथ हुए बर्ताव पर विचार करें।
डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने अस्पताल में अनुपस्थित होने की वजह बताते हुए कहा कि वो एक दुर्घटना में जल गए थे, इसी वजह से वो नहीं आए थे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिस उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान मुझे अनुपस्थित बताया गया, उस कार्यक्रम के बारे में स्वास्थ्य विभाग ने प्रिंसिपल (प्राचार्य) कार्यालय को कोई लिखित या आधिकारिक पूर्व सूचना ही नहीं दी थी।