Bihar News: बिहार पुलिस ने राज्य में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। हेडक्वार्टर और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने मिलकर मगध से कोसी तक के कुख्यात अपराधियों की एक हिट लिस्ट तैयार की है।
Bihar News: नए साल की शुरुआत के साथ ही बिहार में अपराधियों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। बिहार पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और संगठित अपराध पर लगाम लगाने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी कोशिश के तहत बिहार के टॉप क्रिमिनल्स की एक हिट लिस्ट तैयार की गई है। इस लिस्ट में पटना के भोला सिंह से लेकर बक्सर के रिंकू यादव तक, राज्य स्तर के टॉप अपराधियों के नाम शामिल हैं। हर जिले के टॉप 10 सबसे कुख्यात अपराधियों की लिस्ट भी तैयार की गई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि अब यह लिस्ट सीधी कार्रवाई का आधार बनेगी।
पुलिस का मकसद साफ है या तो कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार किया जाए या उन्हें कानून के सामने सरेंडर करने पर मजबूर किया जाए। हत्या, लूट, डकैती, रंगदारी, गैंगवार और संगठित अपराध में शामिल अपराधियों को प्राथमिकता दी गई है। लिस्ट में शामिल कई नामों पर इनाम घोषित है और वे लंबे समय से फरार हैं।
राजधानी पटना शहर में सक्रिय अपराधियों की भी एक लिस्ट तैयार की गई है। पटना जिले के टॉप कुख्यात अपराधियों में भोला सिंह, मनोज सिंह, सुजीत मंडल, राजीव महतो और एमपी यादव शामिल हैं। बताया जाता है कि उनके खिलाफ हत्या, रंगदारी और संगठित अपराध से जुड़े कई मामले दर्ज हैं।
मगध क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों की लिस्ट में धर्मवीर महतो, आलोक सिंह, पलटन सिंह, दीपक रवानी, संतोष गोस्वामी और अमित तिवारी जैसे नाम शामिल हैं। मगध क्षेत्र में गया, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद और अरवल जिले आते हैं, जहां इन कुख्यात अपराधियों पर लाखों रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
कोसी क्षेत्र में पुलिस ने जनेश्वर यादव, गणेश ऋषि, देवलालित कुमार मेहता और वीरेंद्र राय को टॉप अपराधियों की कैटेगरी में शामिल किया है। शाहाबाद क्षेत्र की हिट लिस्ट में दिलीप कुमार, रिंकू यादव, विजय पांडे, शहनाज अंसारी, पप्पू कुमार, संजय तिवारी और डिंपल सिंह के नाम शामिल हैं।
गृह विभाग का कार्यभार संभालने के बाद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह साफ कर दिया है कि अपराध-मुक्त बिहार अब सिर्फ एक नारा नहीं रहेगा। पुलिस को टेक्निकल सर्विलांस और इंटेलिजेंस नेटवर्क के जरिए अपराधियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने और जरूरत पड़ने पर एनकाउंटर करने में संकोच न करने की पूरी छूट दी गई है। पिछले सात महीनों के आंकड़े इस बात के गवाह हैं कि बिहार पुलिस अब रिएक्टिव नहीं, बल्कि प्रोएक्टिव हो गई है। इस दौरान 15 एनकाउंटर हुए हैं, जिनमें एक माओवादी और एक अपराधी मारा गया, जबकि 14 अपराधियों को 'लंगड़ा' कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।