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लैपटॉप से लेकर नौकरी तक… यादव-कुशवाहा-कुर्मी आज भी कितने गरीब? RJD ने आंकड़ों से दिखाया OBC का हाल

Bihar News: RJD प्रवक्ता प्रियंका भारती ने जातीय गणना के डेटा शेयर कर बताया कि यादव, कुशवाहा और कुर्मी समुदायों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी गरीबी में, छप्पर के नीचे और मजदूरी करके जी रहा है। 

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पटना

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Anand Shekhar

Feb 23, 2026

bihar news,

यादव-कुशवाहा-कुर्मी जाति कितनी अमीर- कितनी गरीब (फाइल फोटो)

Bihar News: बिहार में जातिगत गणना के डेटा ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस को गरमा दिया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जाति जनगणना से डिटेल्ड आर्थिक और सामाजिक डेटा शेयर करते हुए दावा किया कि OBC समुदाय के अंदर कई जातियों के खिलाफ झूठ और नफरत फैलाई गई है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है।

प्रियंका भारती ने इनकम, घर, सरकारी नौकरी, लैपटॉप और गाड़ी के मालिकाना हक से जुड़ा डेटा पेश करके दिखाया कि यादव, कुशवाहा और कुर्मी समुदायों की आर्थिक हालत अभी भी कमजोर है। उन्होंने इसे जातिवादी सोच के खिलाफ आंकड़ों की लड़ाई बताया।

कितने परिवार 6000 रुपये से कम कमाते हैं?

राजद प्रवक्ता द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, ₹6,000 या उससे कम मासिक आय वाले परिवारों की संख्या पिछड़ी जातियों में डराने वाली है।

  • यादव: करीब 38.6 लाख परिवारों में से 14 लाख परिवार गरीबी की मार झेल रहे हैं।
  • कुशवाहा: 12 लाख परिवारों में से 4 लाख गरीब हैं।
  • कुर्मी: 8 लाख परिवारों में से 2.5 लाख परिवार बेहद कम आय में गुजर-बसर कर रहे हैं।
  • ब्राह्मण: तुलनात्मक रूप से 10 लाख परिवारों में से 2.72 लाख गरीब हैं।

कैसे घर में रहते हैं कितने लोग

रहने की स्थिति को देखें तो पिछड़ी जातियों का एक बड़ा हिस्सा आज भी पक्के मकानों से दूर है। यादव जाति के 26% परिवार (10 लाख) खपरैल मकानों में रहते हैं, जबकि 4.2 लाख झोपड़ियों में गुजारा करते हैं। 4030 यादव परिवार पूरी तरह आवासहीन हैं।

वहीं अगर कुशवाहा जाति के लोगों की बात करें तो 22% यानि 2.7 लाख परिवार खपरैल मकान में रहते हैं। 86 हजार झोपड़ियों में रहते हैं और 1253 परिवार बिना छत के रहते हैं। इसी तरह कुर्मी जाति के 19% यानि 1.5 लाख परिवार खपरैल में रहते हैं। वहीं, 74 हजार परिवार झोपड़ियों में रहते हैं और 1760 परिवार के पास आवास नहीं है। ब्राह्मण समाज के 17% परिवार खपरैल और 51 हजार झोपड़ियों में रहते हैं।

सरकारी नौकरियों में किसकी कितनी हिस्सेदारी?

सरकारी नौकरियों को लेकर सबसे चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जिससे आरक्षण पाने वालों और असल हिस्सेदारी के बीच का अंतर पता चलता है। यादव जाति की 1.86 करोड़ की बड़ी आबादी में से सिर्फ़ 1.5% (2.90 लाख) के पास सरकारी नौकरी है, जबकि 24 लाख लोग मजदूरी करके अपना गुज़ारा करते हैं।

कुशवाहा जाति की 55 लाख आबादी में से सिर्फ़ 2% (1.12 लाख) के पास सरकारी नौकरी है और 7 लाख मजदूर हैं। इसी तरह, 37.6 लाख कुर्मी जातियों में से 3% (1.17 लाख) के पास सरकारी पद हैं और 5 लाख मज़दूर हैं। ब्राह्मणों की 47.8 लाख की आबादी में से 4% (1.72 लाख) सरकारी नौकरियों में हैं।

यादवों से ज्यादा लैपटॉप ब्राह्मणों के पास

डिजिटल इंडिया के दौर में पिछड़ी जातियों की पहुंच अभी भी बहुत सीमित है। प्रियंका भारती के अनुसार, 1.8 करोड़ यादवों के पास जितने लैपटॉप (1.70 लाख) हैं, उससे कहीं अधिक लैपटॉप 47 लाख ब्राह्मणों (1.97 लाख) के पास हैं। वहीं 55 लाख कुशवाहा में 86163 के पास लैपटॉप और 38 लाख कुर्मी में 98912 लोगों के पास लैपटॉप है।

किसके पास कितनी गाड़ियां हैं?

जब गाड़ियों की बात आती है, तो ब्राह्मण (1.38%) चार पहियों वाली गाड़ियों के मामले में यादवों (0.36%), कुशवाहा (0.48%), और कुर्मी (0.8%) से बहुत आगे हैं। 6.73% ब्राह्मणों के पास दो पहियों वाली गाड़ियां हैं। 5% कुर्मियों और कुशवाहा के पास दो पहियों वाली गाड़ियां हैं। 4% यादवों के पास दो पहियों वाली गाड़ियां हैं।

ट्रैक्टर पिछड़ी जातियों में ज़्यादा हैं, जिसे प्रियंका भारती ने क्वालिटी के बजाय किसान होने का सबूत बताया है। सिर्फ 0.28% यादव, 0.23% कुशवाहा, 0.19% कुर्मी और 0.15% ब्राह्मणों के पास ट्रैक्टर हैं।

प्राइवेट सेक्टर में तेज होगी आरक्षण की मांग

RJD प्रवक्ता ने आखिर में कहा, "डेटा अब साफ़ दिखाता है कि किनकी हालत अभी भी खराब है। शिक्षा के मुद्दे पर एक अलग आर्टिकल लिखा जाएगा, क्योंकि वहां हालात और भी गंभीर हैं।" उन्होंने साफ किया कि जाति जनगणना का मकसद किसी के खिलाफ नफरत फैलाना नहीं है, बल्कि उस "फेक प्रोपेगैंडा" का मुकाबला करना है जिसमें दावा किया जाता है कि कुछ जातियां रिजर्वेशन का फ़ायदा उठाकर बहुत अमीर बन गई हैं। उन्होंने जोर दिया कि ये आंकड़े सामाजिक न्याय की लड़ाई को धार देंगे और निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग को तेज करने में मदद करेंगे।