6 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

icon

प्रोफाइल

दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग गोपालगंज में क्यों अटका? DM-SP ने बुलाई इंजीनियरों की टीम

Worlds Largest Shivling: दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग फिलहाल गोपालगंज में फंसा हुआ है। प्रशासन इस बात को लेकर दुविधा में है कि इसे जर्जर डुमरियाघाट पुल से होते हुए गंडक नदी के पार कैसे ले जाया जाए। डीएम-एसपी ने इसके लिए इंजीनियरों की एक टीम को बुलाया है और उनकी टेक्निकल रिपोर्ट मिलने के बाद ही आखिरी फैसला लिया जाएगा।

2 min read
Google source verification
worlds largest Shivling

विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग (फोटो- X@Golukeshri)

Worlds Largest Shivling: तमिलनाडु के महाबलीपुरम में तराशा गया दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग अब बिहार के गोपालगंज पहुंच गया है। 210 मीट्रिक टन वजन वाला यह विशाल शिवलिंग पूर्वी चंपारण के कैथवलिया में बन रहे विराट रामायण मंदिर की शोभा बढ़ाएगा। हालांकि, इसे गंडक नदी के पार ले जाना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती बन गया है।

क्या है चुनौती?

तमिलनाडु के महाबलीपुरम में 10 साल की मेहनत से बनाया गया यह 33 फुट ऊंचा शिवलिंग 96 पहियों वाले एक बड़े हाइड्रोलिक ट्रेलर पर ले जाया जा रहा है। फिलहाल, यह गोपालगंज के बलथरी चेकपोस्ट पर खड़ा है। पूर्वी चंपारण पहुंचने के लिए इसे गंडक नदी पर बने डुमरियाघाट पुल को पार करना होगा। पुल की खराब हालत को देखते हुए, विशेषज्ञों को चिंता है कि क्या यह 210 टन का अतिरिक्त वजन झेल पाएगा। इस पुल से शिवलिंग को ले जाना सुरक्षित होगा या नहीं, इस सवाल ने पूरे प्रशासन को हाई अलर्ट पर डाल दिया है।

DM और SP ने साइट का निरीक्षण किया

रविवार शाम को गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा और पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित ने साइट का दौरा किया और शिवलिंग का निरीक्षण किया। मरियाघाट पुल की तकनीकी स्थिति का आकलन करने के लिए ब्रिज कॉर्पोरेशन की एक टीम और विशेषज्ञ इंजीनियरों को बुलाया गया है।

फैसला इंजीनियरों की रिपोर्ट पर निर्भर

DM पवन कुमार सिन्हा ने साफ कहा कि इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ लगातार बातचीत चल रही है। पुल की भार वहन क्षमता, सुरक्षा मानकों और वैकल्पिक रास्तों सहित सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि पूरी तकनीकी मंजूरी के बिना शिवलिंग को नारायणी नदी पार करने की इजाजत नहीं दी जाएगी, सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

सुरक्षा और ट्रैफिक मैनेजमेंट की तैयारियां भी जारी

SP अवधेश दीक्षित के अनुसार, शिवलिंग को देखने के लिए लाखों लोगों की भीड़ जुटने की उम्मीद है। इसे देखते हुए, पूरे नेशनल हाईवे पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है, और ट्रैफिक डायवर्जन प्लान तैयार किया जा रहा है। बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी सहित कई दिग्गज नेता इसके स्वागत में जुटे हैं।

तमिलनाडु से गोपालगंज तक का लंबा सफर

तमिलनाडु के महाबलीपुरम में बना यह विशाल शिवलिंग लगभग 33 फीट ऊंचा और 33 फीट लंबा है। शिवलिंग 30 दिनों में 2,178 किलोमीटर का सफर तय करके गोपालगंज पहुंचा है। शिवलिंग को पूर्वी चंपारण के कैथवलिया में स्थापित किया जाएगा। मंदिर का दावा है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर परिसर है, जिसका मुख्य शिखर 270 फीट ऊंचा है। शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा समारोह 17 जनवरी, 2026 को होना तय है। फिलहाल, शिवलिंग गोपालगंज के बलथरी चेकपोस्ट के पास है। इंजीनियरों की फाइनल रिपोर्ट के बाद ही यह तय होगा कि शिवलिंग को डुमरियाघाट पुल से ले जाया जाएगा या कोई और व्यवस्था की जाएगी।