पटना

बिहार में एक और पुल पर मंडराया खतरा; खुश्कीबाग-गुलाबबाग ओवरब्रिज में आईं दरारें, भारी वाहनों की एंट्री पर बैन

Purnia railway overbridge crack: पूर्णिया के खुश्कीबाग-गुलाबबाग रेलवे ओवरब्रिज ने लोगों की जान आफत में डाल दी है। साल 2008 में बने इस पुल में दरारें आने के बाद प्रशासन ने इसे डैमेज घोषित कर दिया है। पुल पर ट्रक, बस और ट्रैक्टरों की एंट्री बैन कर दी गई है। 

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May 27, 2026
Purnia railway overbridge crack
पूर्णिया रेलवे स्टेशन के बना पुल

Purnia railway overbridge crack: बिहार में पुलों की सुरक्षा और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। हाल ही में भागलपुर में विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा ढह जाने के बाद भारी हंगामा मच गया था। इसी बीच, अब एक और पुल में दरारें दिखाई देने लगी हैं। पूर्णिया जंक्शन के पास बना यह पुल खुश्कीबाग और गुलाबबाग को आपस में जोड़ता है। वर्ष 2008 में 27 करोड़ रुपये की लागत से बना यह रेलवे ओवरब्रिज (ROB) पिछले कई महीनों से जर्जर और बेहद खतरनाक स्थिति में है।

पुल के खंभों और स्लैब पर कई जगहों पर चौड़ी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं। भागलपुर की घटना से सबक लेते हुए जिला प्रशासन ने इस पुल को डैमेज घोषित कर दिया है और किसी बड़ी दुर्घटना को टालने के लिए इस पर भारी वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

24 घंटे पुलिस का पहरा, बड़े वाहन डाइवर्ट

पुल की खतरनाक स्थिति को देखते हुए, पूर्णिया ट्रैफिक पुलिस ने कड़े कदम उठाए हैं। पुल के दोनों सिरों पर बड़े चेतावनी बोर्ड और मजबूत लोहे के बैरिकेड लगाए गए हैं। पूर्णिया के ट्रैफिक DSP रंजन कुमार सिंह ने बताया कि इस रेलवे ओवरब्रिज को आधिकारिक तौर पर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त घोषित कर दिया गया है। पुल की नाजुक हालत को देखते हुए, ट्रक, बस और ट्रैक्टर जैसे भारी वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

पुल पर चौबीसों घंटे पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है, ताकि कोई भी भारी वाहन जबरदस्ती पुल पार करने की कोशिश न करे। वहीं, कार, ऑटो-रिक्शा और मोटरसाइकिल जैसे छोटे वाहनों को फिलहाल पुल पार करने की अनुमति दी गई है। जबकि सभी भारी वाहनों का रास्ता बदलकर उन्हें बेलौरी बाईपास मार्ग से भेजा जा रहा है।

2008 में हुआ था उद्घाटन

करोड़ों रुपये की लागत से बना यह ओवरब्रिज तकनीकी रूप से बहुत ज्यादा पुराना नहीं है। इस रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण करीब 27 करोड़ रुपये की लागत से हुआ था। इसका उद्घाटन साल 2008 में बिहार के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी और तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने किया था। पुल बनने के महज 4 साल बाद, यानी साल 2012 में ही इसमें पहली बार एयर क्रैक (दरारें) देखी गई थीं। इसके बाद कई बार कागजी मरम्मत की गई, लेकिन उनका नतीजा पूरी तरह से बेकार ही रहा।

पहले चालकों ने तोड़ दी थी बैरिकेडिंग

स्थानीय लोगों के अनुसार, साल 2025 में भी इस पुल को क्षतिग्रस्त घोषित कर जिला प्रशासन ने बोर्ड लगाया था और बैरिकेडिंग की थी। लेकिन उस दौरान नियमों की अनदेखी करते हुए भारी वाहन चालकों ने बैरिकेडिंग को तोड़ दिया और जर्जर पुल से ट्रकों की आवाजाही जारी रही। अब जब पिछले दिनों भागलपुर में गंगा नदी पर बना विक्रमशिला पुल का एक हिस्सा ढह गया और पूरे देश में बिहार के पुलों की थू-थू होने लगी, तब जाकर पूर्णिया जिला प्रशासन की नींद खुली है। आनन-फानन में दोबारा इस ओवरब्रिज को डैमेज कैटेगरी में डालकर पुलिस का कड़ा पहरा बैठाया गया है।

Updated on:
27 May 2026 05:10 pm
Published on:
27 May 2026 05:09 pm