
जदयू नेता धीरज सीएम सम्राट चौधरी के साथ। फोटो- फेसबुक Dhiraj Singh Kushwaha
Bihar Politics उपेंद्र कुशवाहा अब केवल गठबंधन में ही नहीं, बल्कि अपने समाज में भी अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। यह बात जदयू नेता और अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष धीरज सिंह कुशवाहा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा पर निशाना साधते हुए कही। राजस्थान पत्रिका से बातचीत में धीरज सिंह कुशवाहा ने कहा कि जब तक उपेंद्र कुशवाहा समाज के हितों की बात करते थे, तब तक उन्हें समाज का नेता माना जाता था। लेकिन अब वे समाज की बजाय अपने परिवार के हितों की बात कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें समाज का नेता कैसे कहा जा सकता है? उन्होंने दावा किया कि कुशवाहा समाज को अब नया नेतृत्व मिल चुका है। उनके अनुसार, समाज की आवाज उठाने वाले नेता बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं, जो समाज के मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार विधान परिषद चुनाव में एनडीए ने उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को उम्मीदवार नहीं बनाया। राजनीतिक गलियारों में इसे बीजेपी और उपेंद्र कुशवाहा के रिश्तों में आई दूरी से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, धीरज सिंह कुशवाहा ने उपेंद्र पर परिवारवाद और दोहरे राजनीतिक रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि कुशवाहा समाज का बड़ा वर्ग अब सम्राट चौधरी के साथ खड़ा है।
दरअसल, बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव में एनडीए ने उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को अपना उम्मीदवार नहीं बनाया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि सम्राट चौधरी के रूप में मजबूत नेतृत्व उभरने के बाद बीजेपी धीरे-धीरे उपेंद्र कुशवाहा को किनारे कर रही है।
वरीय पत्रकार लव कुमार का कहना है कि सम्राट चौधरी के बीजेपी में प्रभाव बढ़ने के बाद पार्टी को कोइरी (कुशवाहा) वोट बैंक के लिए उपेंद्र कुशवाहा पर पहले जैसी निर्भरता नहीं रही। उनका मानना है कि यही एक बड़ा कारण है कि बीजेपी ने दीपक प्रकाश को विधान परिषद (एमएलसी) भेजने का फैसला नहीं किया। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इसके पीछे अन्य संगठनात्मक और राजनीतिक कारण भी हो सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने बीजेपी नेतृत्व को भरोसा दिलाया था कि चुनाव के बाद वे अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर देंगे। हालांकि, यह प्रक्रिया लगातार टलती रही। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इसी वजह से बीजेपी ने इस बार उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाने के मुद्दे पर आगे बढ़ने से परहेज किया, जिससे उनकी दावेदारी संकट में पड़ गई।
सूत्रों के मुताबिक, उपेंद्र कुशवाहा भी फिलहाल खुलकर कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं। माना जा रहा है कि उनकी पार्टी के चार में से तीन विधायक असंतुष्ट हैं और बीजेपी के संपर्क में बताए जाते हैं। ऐसे में किसी भी आक्रामक बयान या कदम से पार्टी में टूट की आशंका बढ़ सकती है। यही कारण है कि उपेंद्र कुशवाहा फिलहाल सार्वजनिक रूप से संयमित रुख अपनाए हुए हैं।
इधर, धीरज सिंह कुशवाहा ने उपेंद्र कुशवाहा पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि अब उनकी राजनीति समाज और संगठन से अधिक परिवार केंद्रित हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उपेंद्र कुशवाहा अपनी पत्नी, पुत्र, पुत्री, बहू और अन्य पारिवारिक रिश्तों को प्राथमिकता दे रहे हैं, इसलिए वे अब कुशवाहा समाज के नेता नहीं रह गए हैं।
धीरज सिंह कुशवाहा ने आगे कहा कि उपेंद्र कुशवाहा बीजेपी के समर्थन से राज्यसभा सांसद बन सकते हैं, लेकिन पार्टी की विचारधारा को स्वीकार नहीं करते। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यह दोहरा रवैया कैसे स्वीकार किया जा सकता है। उनका आरोप है कि उपेंद्र कुशवाहा अब अपने बेटे के नाम पर समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसमें उन्हें सफलता नहीं मिलेगी। उन्होंने दावा किया कि कुशवाहा समाज का बड़ा वर्ग अब बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व के साथ खड़ा है और उन्हें अपना नेता मान रहा है।
Updated on:
10 Jun 2026 06:07 pm
Published on:
10 Jun 2026 06:07 pm
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