पटना

Rajya Sabha Election: इन 7 विधायकों पर टिका है बिहार की 5वीं सीट का पूरा गणित, किसे देंगे समर्थन?

बिहार के राजनीतिक गलियारों में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज है। 16 मार्च 2026 को होने वाले चुनाव में पांच सीटों के लिए मंच पहले ही तैयार हो चुका है। 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद बदले समीकरणों ने इस बार पांचवीं राज्यसभा सीट को "हॉट सीट" बना दिया है। यह सीट सात MLA के रुख पर टिकी है।

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Feb 28, 2026
7 विधायकों का रुख तय करेगा बिहार की पांचवीं सीट

Rajya Sabha Election: बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें 9 अप्रैल, 2026 को खाली हो जाएंगी। चुनाव आयोग ने वोटिंग की तारीख 16 मार्च तय की है। RJD के प्रेम चंद गुप्ता, जेडीयू के हरिवंश और रामनाथ ठाकुर जैसे पुराने नेताओं का टर्म खत्म हो रहा है। पांच सीटों के लिए मंच तैयार है। जहां NDA चार सीटें साफ तौर पर जीतती हुई दिख रही है, वहीं पांचवीं सीट के लिए मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। इस सीट की किस्मत इन सात MLA के हाथ में है।

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वोट का गणित: 41 का मैजिक नंबर

बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों के आधार पर, एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 फर्स्ट-प्रेफरेंस वोटों की ज़रूरत होती है। NDA के पास अभी 202 MLA हैं और चार सीटें जीतने के लिए उसे 164 वोटों की ज़रूरत है। इससे उनके पास 38 एक्स्ट्रा वोट बचेंगे। इसका मतलब है कि पांचवीं सीट पर कब्ज़ा करने के लिए उन्हें सिर्फ़ तीन और MLAs के सपोर्ट की जरूरत है।

महागठबंधन की बात करें तो, RJD के पास 25 MLA हैं, कांग्रेस के पास छह, CPI (ML) के पास दो, और CPI (M) के पास एक, कुल 34 MLA हैं। इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता उर्फ IP गुप्ता को जोड़ लें तो महागठबंधन के पास 35 विधायकों का सपोर्ट है। इसका मतलब है कि उन्हें 41 तक पहुंचने के लिए छह और विधायकों के सपोर्ट की जरूरत है।

इन विधायकों का फैसला तय करेगा नतीजा

पांचवीं सीट की चाबी सात MLAs के पास है। इनके सपोर्ट के बिना न तो NDA पांचवीं सीट जीत सकता है और न ही महागठबंधन अपनी लाज बचा सकता है। इनमें AIMIM के 5 विधायक अख्तरुल ईमान (अमौर), मोहम्मद मुर्शिद आलम (जोकीहाट), मोहम्मद तौसीफ आलम (बहादुरगंज), मोहम्मद सरवर आलम (कोचाधामन) और गुलाम सरवर (बैसी) शामिल हैं। इसके अलावा BSP के सतीश कुमार सिंह यादव रामगढ़ सीट से और सहरसा विधायक इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता उर्फ आईपी गुप्ता का नाम शामिल है। हालांकि, आईपी गुप्ता का समर्थन महागठबंधन को प्राप्त है।

अब जानिए इन विधायकों के बारे में

अख्तरुल ईमान (AIMIM, अमौर): बिहार में ओवैसी की पार्टी के सबसे कद्दावर नेता और प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान इस पूरे राजनीतिक अखाड़े के केंद्र में हैं। वे चौथी बार MLA चुने गए हैं और RJD और जेडीयू जैसी पार्टियों में काम कर चुके हैं, इसलिए सदन के अंदर-बाहर की हर चाल समझते हैं। सीमांचल में मुस्लिम राजनीति के एक बड़े चेहरे के तौर पर, राज्यसभा चुनाव में उनके पांच MLA किस दिशा में जाएंगे, यह पूरी तरह से ईमान की लीडरशिप और उनकी पार्टी की रणनीति पर निर्भर करता है।

मोहम्मद मुर्शिद आलम (AIMIM, जोकीहाट): जोकीहाट से MLA मुर्शिद आलम का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। वे पहले जेडीयू से जुड़े रहे हैं और ऐसी अफवाहें हैं कि अपने पिछले रिश्तों के कारण वे नीतीश कुमार के साथ जा सकते हैं। हालांकि, पार्टी अनुशासन के कारण, वे फिलहाल ओवैसी के साथ खड़े दिख रहे हैं।

मोहम्मद तौसीफ आलम (AIMIM, बहादुरगंज) और मोहम्मद सरवर आलम (AIMIM, कोचाधामन): किशनगंज जिले की दो अहम सीटों को रिप्रेजेंट करने वाले ये दोनों MLA ओवैसी की पार्टी की आइडियोलॉजी के प्रति बहुत वफादार माने जाते हैं। तौसीफ आलम जहां युवाओं में पॉपुलर हैं, वहीं सरवर आलम ने कोचाधामन में RJD और जेडीयू के मजबूत गढ़ों को ध्वस्त करके अपनी जगह बनाई है।

गुलाम सरवर (AIMIM, बैसी): पूर्णिया जिले की बैसी सीट से MLA गुलाम सरवर सीमांचल में जमीनी मुद्दों पर एक्टिव रहते हैं। राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में, वे उस दल का हिस्सा हैं जो तेजस्वी यादव के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

सतीश कुमार सिंह यादव (BSP, रामगढ़): बहुजन समाज पार्टी (BSP) के सतीश कुमार सिंह यादव कैमूर जिले की रामगढ़ सीट से सिर्फ 30 वोटों के अंतर से जीतकर सदन पहुंचे। RJD ने उन्हें अपना साथी घोषित करना शुरू कर दिया है, लेकिन सतीश यादव का झुकाव अभी भी एक रहस्य है। वह मायावती की पार्टी के सिपाही हैं, इसलिए उनका वोट हाईकमान की तरफ जाएगा।

इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता उर्फ IP गुप्ता (IIP, सहरसा): इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के अकेले MLA IP गुप्ता को इस समय तेजस्वी यादव के लिए संकटमोचक के तौर पर देखा जा रहा है। पेशे से इंजीनियर गुप्ता पान और तांती समुदाय में एक प्रमुख व्यक्ति हैं। हाल ही में हैदराबाद का उनका दौरा और ओवैसी के साथ मंच साझा करना उन्हें सुर्खियों में ले आया है। वह खुले तौर पर कह रहे हैं कि उनका मकसद ओवैसी और RJD के बीच की खाई को पाटना और राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन को फायदा पहुंचाना है।

ओवैसी फैक्टर

भले ही AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी सरकार बनाने में निर्णायक न रही हो, लेकिन इस चुनाव में इसकी भूमिका अहम है। AIMIM के विधायकों की हालिया राजनीतिक गतिविधियां खबरों में रही हैं। कुछ बैठकों से संकेत मिले हैं कि वे सभी विकल्प खुले रखे हुए हैं। हालांकि, पार्टी के अपने उम्मीदवार उतारने की भी जोरदार चर्चा है। प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने बार-बार कहा है कि महागठबंधन को AIMIM उम्मीदवारों का समर्थन करना चाहिए, हमारी पार्टी का कोई नेता राज्यसभा में नहीं है।

ओवैसी को मनाने की कोशिशें

यह चुनाव तेजस्वी यादव के लिए किसी लिटमस टेस्ट से कम नहीं है। विधानसभा चुनाव हारने के बाद, राज्यसभा सीट जीतना उनकी सियासी साख के लिए बहुत जरूरी है। इसी सिलसिले में, महागठबंधन के साथी आईपी गुप्ता ने हाल ही में हैदराबाद का दौरा किया और असदुद्दीन ओवैसी के साथ स्टेज शेयर किया। गुप्ता ने कहा, "मैं AIMIM को महागठबंधन के करीब लाना चाहता हूं ताकि राज्यसभा चुनाव में इसका फायदा मिल सके।" हालांकि, ओवैसी को साथ लाना इतना आसान नहीं है। तेजस्वी ने चुनाव के दौरान AIMIM की की कोशिशों के बाद भी ओवैसी के साथ गठबंधन नहीं किया था।

नीतीश कुमार का मूव?

NDA को जीतने के लिए सिर्फ तीन वोट चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि AIMIM के कई MLA पहले जेडीयू के साथ रह चुके हैं और हाल ही में उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात भी की थी। वहीं, जेडीयू नेता अशोक चौधरी ने सभी पांच सीटों पर जीत का दावा किया है, जिससे पता चलता है कि एनडीए के पास 'प्लान B' तैयार है।

बीएसपी MLA पर आरजेडी का दांव

सदन के अंदर, आरजेडी ने बीएसपी MLA सतीश सिंह यादव को अपना बताना शुरू कर दिया है। जब सतीश यादव ने कट मोशन पेश किया, तो RJD नेता कुमार सर्वजीत ने उन्हें अपने गठबंधन का हिस्सा बताया। हालांकि, BSP सुप्रीमो मायावती का रुख अभी साफ नहीं है। सतीश सिंह यादव कह चुके हैं कि जो भी पार्टी आलाकमान का फैसला होगा वो उसका पालन करेंगे।

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Updated on:
28 Feb 2026 08:49 am
Published on:
28 Feb 2026 08:48 am
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