नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित पावर सब स्टेशन के लिए चयनित जमीन से अतिक्रमण हटाने को लेकर बवाल के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं।
Bihar News बिहार के सहरसा में गुरुवार को पावर सब स्टेशन की जमीन से अतिक्रमण हटाने गई पुलिस पर स्थानीय लोगों ने हमला कर दिया है। बवाल और हंगामा बढ़ने पर पुलिस को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। इसके साथ ही ग्रामीणों की बढ़ती भीड़ और उग्रता को देखते हुए प्रशासन ने जेसीबी से की जा रही कार्रवाई तत्काल रोक दी है। यह घटना सहरसा के बसनहीं थाना क्षेत्र के मंगवार पंचायत की है।
नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित पावर सब स्टेशन के लिए चयनित जमीन से अतिक्रमण हटाने को लेकर बवाल के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। अंचल प्रशासन, पुलिस बल और अन्य विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में जैसे ही जेसीबी से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई स्थानीय लोग उग्र हो गए। वे प्रशासन की टीम से भिड़ गए। पुलिस पहले इनको समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब वे नहीं माने तो पुलिस ने बल प्रयोग करने का जैसे ही प्रयास किया स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए।
इसके बाद आक्रोशित भीड़ ने सोनवर्षा के बीडीओ, सीओ और बसनहीं थाना से जुड़े दो सरकारी वाहनों सहित एक निजी वाहन तथा फायर ब्रिगेड के शीशे तोड़कर उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया। स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर पुलिस के अधिकारी को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अफरातफरी में कुछ अधिकारी के जख्मी होने की सूचना है। हालांकि स्थानीय प्रशासन ने आधिकारिक रूप से किसी भी अधिकारी के घायल होने की पुष्टि से इनकार किया है। ग्रामीणों की बढ़ती भीड़ और उग्रता को देखते हुए प्रशासन को जेसीबी से की जा रही कार्रवाई तत्काल रोकनी पड़ी।
दरअसल, सहरसा में पावर सब स्टेशन निर्माण के लिए मंगवार पंचायत के डीहटोला विषहरा मंदिर के समीप स्थित बिहार सरकार की लगभग 52 डिसमिल भूमि को चिह्नित किया गया है। इस जमीन पर लंबे समय से स्थानीय ग्रामीणों ने अपना अतिक्रमण कर रखा है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी इसी अतिक्रमण को हटाने के लिए गुरुवार को गए थे। पुलिस के साथ सोनवर्षा के बीडीओ अमित आनंद, सीओ आशीष कुमार, आरओ सैयद बादशाह, विद्युत विभाग के एसडीओ एवं जेई जेसीबी और फायर ब्रिगेड वाहन लेकर
मौके पर पहुंचे थे।
कार्रवाई शुरू होते ही ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन पर लाठी-डंडे और ईंट-पत्थर से हमला कर दिया, जिससे कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। इससे पहले भी अतिक्रमण हटाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन उस समय भी ग्रामीणों और प्रशासन के बीच झड़प हुई थी। ग्रामीणों के विरोध की वजह से पुलिस को पीछे हटना पड़ा था।