पटना

रिपोर्ट में रेप की पुष्टि… पर बलात्कारी कौन? NEET छात्रा केस में 62 दिन बाद भी एजेंसियों के पास जवाब नहीं

पटना के NEET छात्रा केस का खुलासा 62 दिन बाद भी नहीं हो पाया है। 1,200 पन्नों की केस डायरी होने और छात्रा के कपड़ों पर वीर्य के अंश मिलने की पुष्टि होने के बावजूद, न तो SIT और न ही CBI अब तक अपराधी की पहचान कर पाई है।
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Mar 15, 2026
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नीट छात्रा गैंगरेप मामला (X)

NEET छात्रा केस: NEET परीक्षा की तैयारी कर रही एक छात्रा पटना के मुन्ना चक स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में अपने कमरे में 6 जनवरी को बेहोश पाई गई, 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की है कि छात्रा के साथ बलात्कार हुआ था। उसके कपड़ों पर पाए गए स्पर्म इस तथ्य का वैज्ञानिक प्रमाण हैं। हालांकि, 62 दिन बीत जाने के बाद भी, जांच एजेंसियां इस मामले को सुलझाने में विफल रही हैं। पुलिस और SIT के व्यापक प्रयासों और CBI द्वारा की गई लंबी जांच के बावजूद, व्यवस्था अभी भी अपराधी की पहचान करने में असमर्थ है।

छात्रा के कपड़ों पर मिला स्पर्म किसका?

जब SIT और CBI ने अपनी रिपोर्टें POCSO अदालत में जमा कीं, तो कई सवाल उठे। अदालत में जमा की गई 1,200 से अधिक पृष्ठों की केस डायरी में कई विरोधाभास सामने आए। सबसे अहम सवाल अभी भी बना हुआ है कि यदि छात्रा के साथ वास्तव में बलात्कार हुआ था और उसके कपड़ों से शुक्राणु बरामद हुए थे, तो वे शुक्राणु किसके हैं? आज तक, किसी भी आरोपी व्यक्ति की स्पष्ट रूप से पहचान नहीं हो पाई है।

हॉस्टल मालिक से पूछताछ में क्या सामने आया?

जांच ​​के दौरान, SIT ने शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष कुमार रंजन से 25 सवाल पूछे। मनीष ने बताया कि वह हॉस्टल की पांचवीं मंजिल पर रहता था और घटना वाले दिन वह परिसर में ही मौजूद था। उसने दावा किया कि उसे घटना के बारे में 7 जनवरी को हॉस्टल की वार्डन, नीलम देवी के माध्यम से पता चला। मनीष के अनुसार, उसे बताया गया था कि एक लड़की ने दवा खा ली थी और बीमार पड़ गई थी। हालांकि, जांच के दौरान उसके बयान कई बार बदलते हुए प्रतीत हुए, जिससे उसके प्रति संदेह और गहरा गया।

सेक्स रैकेट का आरोप

पीड़ित परिवार के वकील, एसके पांडे द्वारा अदालत में किए गए दावे वास्तव में रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि मनीष रंजन, जो कुछ ही साल पहले एक पूर्व सांसद के ड्राइवर के रूप में काम करता था अब करोड़ों रुपये की संपत्ति का मालिक है और एक मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल चलाता है। वकील ने सीधा आरोप लगाया है कि मनीष एक हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट चलाता है, जिसमें वह युवतियों को मजबूर करता है और उन्हें अवैध गतिविधियों में धकेलता है।

मेडिकल रिपोर्ट: ड्रग ओवरडोज या साजिश?

प्रभात मेमोरियल अस्पताल के डॉ. सतीश के बयान के अनुसार, जब छात्रा को अस्पताल लाया गया, तो वह ओपिओइड पॉइजनिंग (ड्रग ओवरडोज) से पीड़ित थी। उसके यूरिन टॉक्सिकोलॉजी टेस्ट में सेडेटिव (बेंज़ोडायज़ेपाइन) और नारकोटिक पेनकिलर (ओपिओइड) पाए गए। डॉक्टर ने आगे बताया कि छात्रा को गंभीर इंट्राक्रेनियल प्रेशर (दिमाग के अंदर दबाव) की समस्या थी और उसे ब्रेन हेमरेज हुआ था। क्या छात्रा को जबरदस्ती नशीले पदार्थ खिलाने के बाद बेरहमी से पीटा गया था?

तीन एजेंसियां, फिर भी कोई जवाब नहीं

  • 9 जनवरी: चित्रगुप्त नगर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई।
  • 18 जनवरी - 13 फरवरी: SIT ने जांच की।
  • 14 फरवरी से अब तक: केस CBI को सौंप दिया गया।

जांच में सामने आईं बड़ी कमियां

इस पूरे मामले में शामिल जांच एजेंसियों के काम करने के तरीके और कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बिहार पुलिस ने हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया, लेकिन SIT या CBI, किसी ने भी अब तक उसे पूछताछ के लिए हिरासत में नहीं लिया है।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच, दोनों से यह पुष्टि हुई है कि छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न हुआ था। छात्रा के कपड़ों से स्पर्म के सैंपल मिले थे। हालांकि, सैंपल देने वाले की पहचान अब तक नहीं हो पाई है। फोरेंसिक जांच के लिए कई लोगों के सैंपल लिए गए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।

छात्रा के कमरे से मिली दवाओं को लेकर भी जांच एजेंसियों के बयानों में विरोधाभास है। पुलिस के अनुसार, वहां सिर्फ एक खाली रैपर मिला था। वार्डन के बयान में पांच रैपर मिलने की बात कही गई थी, जबकि CBI ने कोर्ट को बताया कि छह खाली रैपर बरामद हुए थे। इन विसंगतियों को देखते हुए, कोर्ट ने खुद जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।

Updated on:
15 Mar 2026 05:50 pm
Published on:
15 Mar 2026 05:50 pm
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