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वैशाली अस्पताल में बवाल: मरीज की मौत पर परिजनों का डॉक्टरों पर हमला, टॉयलेट में छिपकर बचाई जान

वैशाली के महनार स्वास्थ्य केंद्र में नवविवाहिता की मौत के बाद उग्र भीड़ ने अस्पताल में हंगामा किया। जान बचाने के लिए दो महिला डॉक्टरों को टॉयलेट में छिपना पड़ा। बाद में बीडीओ ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला, घटना के बाद डॉक्टरों में दहशत है।

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सांकेतिक तस्वीर। फोटो -(AI Generated)

बिहार में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आक्रोशित भीड़ के डर से दो महिला डॉक्टरों को करीब तीन घंटे तक अस्पताल के टॉयलेट में छिपकर रहना पड़ा। अपनी सुरक्षा के लिए वे लगातार पुलिस को फोन करती रहीं, लेकिन किसी भी पुलिस पदाधिकारी ने कॉल नहीं उठाया। आखिरकार प्रखंड विकास पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और किसी तरह दोनों डॉक्टरों को सुरक्षित बाहर निकाला।

वैशाली में नवविवाहिता की मौत पर बवाल

यह मामला बिहार के वैशाली जिले के महनार स्वास्थ्य केंद्र का है। सड़क हादसे में घायल एक नवविवाहिता की मौत के बाद आक्रोशित भीड़ ने अस्पताल पर हमला कर दिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, देसरी थाना क्षेत्र के बिलट चौक के पास दो बाइकों की टक्कर में शिल्पी कुमारी और उनके पति गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दोनों को इलाज के लिए महनार स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां डॉक्टर पूनम सिन्हा और डॉक्टर अंजलि कुमारी ड्यूटी पर थीं। डॉक्टर पूनम सिन्हा ने जैसे ही शिल्पी कुमारी को मृत घोषित किया, परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।

'परिजनों ने फोन करके और लोगों को बुला लिया'

भीड़ इतनी उग्र हो गई कि वह डॉक्टरों को नाम लेकर खोजने लगी और उनके खिलाफ अपशब्द कहने लगी। हालात बिगड़ते देख डॉक्टर पूनम सिन्हा और डॉक्टर अंजलि कुमारी ने खुद को अस्पताल के एक टॉयलेट में बंद कर लिया।

डॉ. पूनम सिन्हा के अनुसार, “मरीज पहले से ही मृत अवस्था में थी, फिर भी हमने उसे बचाने की पूरी कोशिश की। लेकिन भीड़ ने फोन कर और लोगों को बुला लिया और हमें मारने के इरादे से तलाशने लगी।”

उग्र भीड़ से बचने को डॉक्टर टॉयलेट में छिपीं

डॉक्टर अंजलि कुमारी ने कहा, 'हम केवल दो ही लोग थे और बाहर पूरी भीड़ गेट पीट रही थी, हम बहुत डर गए थे।' उग्र भीड़ से बचने के लिए हम लोग टॉयलेट के अंदर कैद कर लिया। टॉयलेट से ही कई बार महनार थाना पुलिस को फोन किया, लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला। आखिरकार, देर शाम जब महनार बीडीओ मुकेश कुमार दो थानों की पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे, तब जाकर स्थिति को नियंत्रित किया गया और शौचालय का दरवाजा खोलकर दोनों महिला डॉक्टरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

सुरक्षा पर सवाल, डॉक्टरों में दहशत

इस घटना के बाद दोनों महिला चिकित्सकों ने अपनी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि यदि अस्पताल में ही डॉक्टर सुरक्षित नहीं हैं, तो वे काम कैसे कर पाएंगे।

फिलहाल सड़क हादसे में मृत महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। बीडीओ ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है, लेकिन इस घटना के बाद डॉक्टरों में दहशत का माहौल है।