पटना

उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का मंत्री पद खतरे में, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार और चुनाव आयोग को भेजा नोटिस

Supreme Court Notice on Deepak Prakash Appointment: बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के पद पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। बिना MLA या MLC बने दोबारा मंत्री बनाए जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। 

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Jun 15, 2026
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पिता उपेंद्र कुशवाहा के साथ मंत्री दीपक प्रकाश (फोटो- फेसबुक)

Bihar Minister Deepak Prakash: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की दोबारा नियुक्ति से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की। मामले को गंभीरता से लेते हुए चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने बिहार सरकार, मंत्री दीपक प्रकाश और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को नोटिस जारी किए।

क्या दीपक प्रकाश अभी भी मंत्री हैं? -CJI

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जैसे ही याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह के वकीलों ने अपनी दलीलें पेश करना शुरू किया, कोर्ट ने सबसे पहले असल स्थिति जानने की कोशिश की। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत ने पूछा, "क्या दीपक प्रकाश अभी भी मंत्री पद पर हैं? अभी क्या स्थिति है?"

जिस पर याचिकाकर्ता के वकील सुदीप चंद्रा ने जवाब देते हुए बताया कि दीपक प्रकाश अभी भी मंत्री पद पर बने हुए हैं। हाल ही में बिहार विधान परिषद (MLC) की 10 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हुई, फिर भी उन्हें किसी भी सीट के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया गया। इसके बावजूद वह गैर-कानूनी तरीके से अपने पद पर बने हुए हैं।

20 नवंबर 2025 को पहली बार बनें मंत्री

याचिकाकर्ता के वकील सुदीप चंद्रा ने बिहार सरकार के उस कदम का ज़िक्र किया जिसके खिलाफ उन्होंने 'को वारंटो' की रिट दायर की है। उन्होंने बताया कि बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे 14 नवंबर 2025 को घोषित हुए और नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनी। उस कैबिनेट में दीपक प्रकाश को 20 नवंबर 2025 को पंचायती राज मंत्री नियुक्त किया गया, जबकि वे न तो MLA थे और न ही MLC। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत, उनके लिए छह महीने के भीतर यानी 19 या 20 मई 2026 तक किसी भी सदन का सदस्य बनना अनिवार्य था।

7 मई 2026 को दुबारा बेन मंत्री

वकील ने आगे कहा कि इस बीच बिहार में सरकार बदल गई और सम्राट चौधरी नए मुख्यमंत्री बने। नई सरकार बनने की प्रक्रिया के दौरान दीपक प्रकाश 15 अप्रैल से 6 मई तक लगभग 22 दिनों के लिए मंत्री नहीं रहे। हालांकि, जब 7 मई 2026 को सम्राट चौधरी कैबिनेट का विस्तार हुआ, तो दीपक प्रकाश ने फिर से पंचायती राज मंत्री के तौर पर शपथ ली। यह संविधान की भावना का खुला उल्लंघन है।

बार-बार नहीं मिल सकती 5 महीने वाली छूट

वकील ने आगे तर्क दिया कि इस तरह तो कोई भी व्यक्ति MLA या MLC बने बिना मंत्री बना रह सकता है। कोई व्यक्ति 5 महीने और 28 दिनों तक मंत्री पद पर रहेगा, इस्तीफ़ा देगा और फिर से 5 महीने और 28 दिनों के लिए मंत्री बन सकता है। अनुच्छेद 164(4) के तहत दी गई छूट का लाभ जीवन में केवल एक बार ही उठाया जा सकता है। इसे बार-बार किश्तों में या बनावटी अंतराल बनाकर रीसेट नहीं किया जा सकता है।

सैलरी-भत्ता रोकने की मांग

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में न सिर्फ़ मंत्री पद पर हुई नियुक्ति को चुनौती दी गई है, बल्कि कई अन्य मांगें भी रखी गई हैं। जैसे कि इसमें मांग की गई है कि 7 मई को पद संभालने के बाद से पंचायती राज विभाग के तहत दीपक प्रकाश द्वारा जारी सभी प्रस्तावों, आदेशों या योजनाओं को तुरंत रद्द किया जाए। इसके अलावा, इसमें मांग की गई है कि इस गैर-कानूनी नियुक्ति के कारण उन्हें मिले वेतन, भत्ते और सरकारी सुविधाओं को तुरंत बंद किया जाए और इन लाभों की वसूली भी की जाए।

Updated on:
15 Jun 2026 04:23 pm
Published on:
15 Jun 2026 04:18 pm