बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बिजली की दरों की घोषणा कर दी है। आयोग ने यह निर्णय लिया कि बिजली की दरों में कोई वृद्धि नहीं की जाएगी। इसके विपरीत, स्लैब प्रणाली को सरल बनाकर शहरी घरेलू उपभोक्ताओं को काफी राहत प्रदान की गई है।
Bihar Electricity: नीतीश कुमार की सरकार ने बिहार के शहरी बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत का बड़ा पिटारा खोल दिया है। राज्य के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई दरें घोषित की गई हैं। बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) के इस फैसले से शहरों में रहने वाले लाखों परिवारों की मासिक बचत में काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव शहरी क्षेत्रों के स्लैब सिस्टम में किया गया है, जिसे अब ग्रामीण क्षेत्रों की तर्ज पर सरल और सस्ता बना दिया गया है।
बुधवार को, BERC के अध्यक्ष आमिर सुबहानी ने सदस्यों अरुण कुमार सिन्हा और परशुराम सिंह यादव के साथ मिलकर बिजली की दरों के संबंध में अपने ऐतिहासिक फैसले की घोषणा की। आयोग ने बिजली कंपनियों द्वारा प्रति यूनिट 35 पैसे की दर बढ़ाने की मांग वाली याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया। आयोग ने पाया कि बिजली कंपनियां वर्तमान में मुनाफे में चल रही हैं, इसलिए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालना उचित नहीं होगा। इसके बजाय, आयोग ने शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए दूसरे टैरिफ स्लैब को पूरी तरह से खत्म करने का क्रांतिकारी फैसला लिया।
अब तक, बिहार के शहरी क्षेत्रों में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली का बिल 'दो-स्लैब' प्रणाली पर आधारित था। इस प्रणाली के तहत, 1 से 100 यूनिट तक की खपत पर 4.12 रुपए प्रति यूनिट की रियायती दर से शुल्क लिया जाता था। हालांकि, जैसे ही खपत 100 यूनिट से अधिक हो जाती थी, दर बढ़कर 5.52 रुपये प्रति यूनिट हो जाती थी।
आयोग ने अब इस दूसरे (अधिक महंगे) स्लैब को पूरी तरह से हटा दिया है। इसका मतलब है कि शहरी क्षेत्रों में भी अब ग्रामीण क्षेत्रों की तरह बिजली एक समान दर पर मिलेगी। इस बदलाव से शहरी उपभोक्ताओं को 100 यूनिट से अधिक की किसी भी खपत पर प्रति यूनिट 1.53 रुपए का सीधा लाभ मिलेगा। यह नई प्रणाली 1 अप्रैल, 2026 से पूरे राज्य में लागू हो जाएगी।
जुलाई 2025 से, बिहार सरकार सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मुफ्त बिजली दे रही है। शहरी इलाकों में, परिवारों की औसत मासिक खपत आमतौर पर 200 से 300 यूनिट के बीच होती है। इस संदर्भ को देखते हुए, इस मुफ्त सीमा से ज्यादा खपत पर दी जाने वाली राहत किसी जैकपॉट से कम नहीं है। 1 अप्रैल से इसके ऊपर की खपत पर आपकी बचत कुछ इस तरह होगी।
उदाहरण 1 (225 यूनिट खपत): मान लीजिए पटना शहर में रहने वाला कोई परिवार एक महीने में 225 यूनिट बिजली की खपत करता है। सरार की योजना के तहत पहली 125 यूनिट पूरी तरह मुफ्त होंगी। वहीं, बाकी की 100 यूनिट के लिए उपभोक्ताओं को पहले ज्यादा कीमत वाले स्लैब के हिसाब से भुगतान करना पड़ता था, लेकिन अब वे प्रति यूनिट 1.53 रुपए कम भुगतान करेंगे। इसका मतलब है सीधे 153 रुपए की बचत।
उदाहरण 2 (300 यूनिट खपत): अगर किसी उपभोक्ता के घर में 300 यूनिट बिजली की खपत होती है, तो उन्हें शुरुआती 125 मुफ्त यूनिट के बाद बाकी 175 यूनिट पर भारी छूट मिलेगी। ऐसे परिवार हर महीने 1.53 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से 267.75 रुपये बचाएंगे।
आयोग का फैसला केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक ही सीमित नहीं है। राज्य की आर्थिक गति को तेज करने के लिए, व्यावसायिक बिजली दरों में भी कमी की गई है। शहरी इलाकों में व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए, बिजली की दरों में प्रति यूनिट 1.20 रुपए की कमी की गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों के व्यावसायिक उपभोक्ताओं को 42 पैसे प्रति यूनिट सस्ती बिजली मिलेगी। इस फैसले से प्रदेश भर के करीब 27 लाख छोटे-बड़े व्यापारियों को सीधा लाभ पहुंचेगा, जिससे उनके संचालन खर्च में कमी आएगी।
आमतौर पर, हर साल बिजली कंपनियां वित्तीय नुकसान का हवाला देते हुए दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव देती हैं। इस बार भी, कंपनियों ने प्रति यूनिट 35 पैसे की बढ़ोतरी का अनुरोध किया था। हालांकि, पूर्व मुख्य सचिव और आयोग के अध्यक्ष आमिर सुबहानी ने स्पष्ट किया कि पूरी पारदर्शिता के साथ किए गए एक ऑडिट से पता चला है कि बिजली कंपनियां असल में मुनाफे की स्थिति में हैं। सरकार की मंशा बिजली पर अधिकार के साथ किफायती बिजली देने की भी है, इसलिए दरें बढ़ाने के बजाय स्लैब घटाकर जनता को सीधे लाभ पहुंचाने का निर्णय लिया गया।