सोशल मीडिया पर एक वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो पटना का बताया जा रहा है। यूजर्स इसपर बिहार पुलिस और CM पेमा खांडू से इस पर तुरंत कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।
अरुणाचल प्रदेश से एक डांस टीम पटना में परफॉर्मेंस देने आई थी। लेकिन उन्हें एक वॉशरूम इस्तेमाल करने के लिए यह साबित करना पड़ा कि वे भी भारतीय हैं। उनके साथ हुए इस दुर्व्यवहार का एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो 2 अप्रैल का बताया जा रहा है। जिसमें पटना के एक अस्पताल में, बेज रंग की यूनिफॉर्म पहने एक अटेंडेंट ने इस ग्रुप को पब्लिक वॉशरूम इस्तेमाल करने से रोक दिया और उनसे ID दिखाने की मांग की। जब उसने इसका विरोध किया, तो उस महिला ने उसे "मोमो," "चिंकी," और "चीनी" कहकर बुलाया। यह सब कहकर वो महिला वायरल वीडियो में हंसते हुए दिख रही है। ग्रुप की एक महिला ने इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया। उसकी आवाज़ में थकावट और हिम्मत, दोनों ही साफ झलक रहे थे: "हम लोग अपने नॉर्थ-ईस्ट से घूमने के लिए आते हैं, लेकिन ऐसी 1-2 घटनाओं की वजह से हम डरते हैं।"
वीडियो के वायरल होने के बाद नागालैंड तथा अरुणाचल प्रदेश की पुलिस का बिहार पुलिस के फोन आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और बिहार पुलिस के सीनियर अधिकारियों से इस मामले में कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। और न ही कोई FIR दर्ज की गई है।
कुछ लोगों ने ऑनलाइन यह तर्क देने की कोशिश की कि अटेंडेंट का यह बर्ताव शायद अस्पताल की ID वेरिफिकेशन से जुड़ी किसी पॉलिसी का हिस्सा हो सकता है। लेकिन इस बचाव को ज़्यादा लोगों ने स्वीकार नहीं किया। इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। और न ही कोई FIR दर्ज की गई है।
वीडियो के वायरल होने पर सोशल साइट X (ट्विटर) पर लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगी है। एक यूजर ने लिखा, "पटना का निवासी होने के नाते, मैं इस तरह के बर्ताव के लिए बेहद शर्मिंदा और दुखी हूं।" एक अन्य यूज़र, ने लिखा: "मैं सेंट्रल नॉर्थ (मध्य-उत्तरी) भारत की तरफ से आप लोगों से माफी मांगती हूं... आप लोग भी तो भारतीय ही हैं।"
कुछ लोगों की प्रतिक्रियाएं इतनी नरम नहीं थीं। ""पटना में लोग कई बार बेहद असंवेदनशील और बदतमीज़ हो सकते हैं।" एक यूज़र्स ने सीधे " और ज़िलाधिकारी के हैंडल को टैग करते हुए, इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। लेकिन एक ने लिखा जिसने सबसे ज़्यादा चोट पहुँचाई: “पूर्वोत्तर के लोग वे लोग हैं जो भारतीय सेना में बहुत बड़ी संख्या में सेवा करते हैं, विश्व-स्तरीय एथलीट, संगीतकार और कलाकार पैदा करते हैं, अपना टैक्स चुकाते हैं, और बिना बसें जलाए या हाईवे जाम किए चुपचाप अपनी ज़िंदगी जीते हैं। और फिर भी उनके अपने ही देश में उनके साथ विदेशियों जैसा बर्ताव किया जाता है।”
एक ऐसा ज़ख्म जो बार-बार हरा हो जाता है। और यह और भी बदतर होता जा रहा है
यह घटना कोई अपवाद नहीं है। मुख्य शहरों में रहने वाले या यात्रा करने वाले पूर्वोत्तर भारतीयों ने सालों से अपमानजनक टिप्पणियों, घर मिलने में भेदभाव, काम की जगह पर पक्षपात और आम तौर पर उन्हें 'पराया' समझने की घटनाओं का सामना किया है। इन सबके पीछे एक ही खतरनाक सोच काम करती है: कि अगर आप किसी खास तरह के दिखते हैं, तो आपको अपनी पहचान साबित करनी पड़ेगी।