पटना में, CISF के एक जवान को अचानक सांस लेने में दिक्कत होने लगी और वह ज़मीन पर गिरकर बेहोश हो गया। पास में ही तैनात एक ट्रैफिक कांस्टेबल ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया। कांस्टेबल ने तुरंत जवान को CPR दिया, जिससे उसकी जान बच गई।
बिहार की राजधानी पटना में मीठापुर बाईपास पर आज इंसानियत और सूझबूझ की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने खाकी का मान और बढ़ा दिया। ड्यूटी पर तैनात एक ट्रैफिक कांस्टेबल ने अपनी फुर्तीली कार्रवाई से मौत के मुंह में जा रहे एक CISF जवान को नई जिंदगी दे दी। जब कांस्टेबल ने देखा कि जवान अचानक सड़क पर गिर गया और बेहोश हो गया, तो उसने बिना एक पल भी गंवाए तुरंत CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) देना शुरू कर दिया, जिसके नतीजे में सिर्फ 30 सेकंड के अंदर ही जवान की सांसें वापस आ गईं।
नवादा जिले के रहने वाले कुंदन, जो CISF में कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं, आज अपने परिवार के साथ मीठापुर बाईपास से गुजर रहे थे। बताया जा रहा है कि वे कुछ समय से अस्वस्थ महसूस कर रहे थे और इलाज के लिए अस्पताल जा रहे थे। इसी दौरान, जब वे मिठापुर चेक पोस्ट के पास पहुंचे, तो वे अचानक लड़खड़ाए और सड़क पर गिरकर बेहोश हो गए।
मीठापुर ट्रैफिक पोस्ट पर तैनात कांस्टेबल अंजनी कुमार गौरव ने जैसे ही जवान को गिरते देखा, वे तुरंत उनकी ओर दौड़ पड़े। अंजनी ने बताया कि जवान के शरीर से भारी पसीना निकल रहा था और उनके हाथ-पैर अकड़ रहे थे। मुझे तुरंत हार्ट अटैक की आशंका हुई। मैंने बिना एक सेकंड गंवाए उन्हें जमीन पर लिटाया और सीने को पंप (CPR) करना शुरू कर दिया। इसका वीडियो पटना ट्रैफिक पुलिस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट किया है।
अंजनी कुमार गौरव ने बताया कि उन्होंने पुलिस ट्रेनिंग के दौरान CPR देना सीखा था, लेकिन असल जिंदगी में पहली बार इसका प्रयोग कर रहे थे। उन्होंने पूरी हिम्मत जुटाई और जवान की छाती पर दबाव बनाना शुरू किया। करीब 30 सेकंड की मशक्कत के बाद कुंदन की आंखों में हलचल हुई और उनकी सांसें सामान्य होने लगीं। कुछ ही मिनटों में वे पूरी तरह होश में आ गए। पूरी तरह से स्वस्थ महसूस करने के बाद, वे अपने परिजनों के साथ सुरक्षित चले गए। मौके पर मौजूद राहगीरों ने भी ट्रैफिक पुलिस के इस जांबाज सिपाही की जमकर सराहना की।
फिलहाल जवान कुंदन की स्थिति सामान्य है और वे अपने परिवार के साथ घर लौट गए हैं। कांस्टेबल अंजनी ने विनम्रता से कहा कि उन्होंने बस अपना कर्तव्य निभाया। समय रहते मिली इस प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही जवान को खतरे से बाहर निकाल लिया।