अरेराज महात्म्य और गरुड़ पुराण में इसकी चर्चा है कि श्रीराम जनकपुर में शादी के बाद इसी रास्ते अयोध्या गए थे। अरेराज सोमेश्वर नाथ मंदिर में माता सीता के साथ श्रीराम ने यहां पर भगवान शिव की पूजा अर्चना की थी।
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के चकिया-केसरिया रोड़ स्थित कैथवलिया गांव में विराट रामायण मंदिर में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग को स्थापित किया जा रहा है। इसको लेकर वाराणसी और अयोध्या से पंडित को बुलाया गया है। वे ही मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर शिवलिंग को स्थापित करने का काम कर रहे हैं। गंगा समेत 8 पवित्र नदियों के जल से शिवलिंग का अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद सहस्त्रालिंगम शिवलिंग की स्थापना की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
शिवलिंग को स्थापित करने के लिए आयोजित पूजा पाठ को लेकर पूरे क्षेत्र में मेले जैसा माहौल है, इस पल को अपने कैमरा में कैद करने और इसका साक्षी बनने के लिए दूर-दूर से हजारों की संख्या में भक्त पहुंचे हुए हैं। फूल-पूजा के सामान की छोटी-बड़ी दुकानें सज गई हैं। इस कार्यक्रम में CM नीतीश कुमार को भी शामिल होना है। इसको लेकर कड़ी सुरक्षा की व्यवस्था की गई है।
शिवलिंग को स्थापित करने को लेकर सुबह 8 बजे से हुई पूजा पाठ चल रहा है। यहां पर पूजा के लिए पटना महावीर मंदिर से सात पंडित पहुंचे हुए हैं। इसके साथ ही अयोध्या राम मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, गुजरात, हरिद्वार, महाराष्ट्र से भी पंडित पहुंचे हैं। शिवलिंग को स्थापित करने के दौरान वाले भव्य यज्ञ में चारों वेदों के विद्वानों को आमंत्रित किया गया है। 4 LED स्क्रीन लगाए गए हैं, ताकि लोग स्थापना का लाइव देख सके।
शिवलिंग की स्थापना के लिए कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, यमुनोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज, गंगा सागर, सोनपुर, रामेश्वरम के साथ साथ से सिंधु, नर्मदा, नारायणी, कावेरी, गंडक नदी का जल मंगवाया गया है। इन सभी नदियों के जल से भी अभिषेक होगा। 17 जनवरी (शनिवार) माघ कृष्ण चतुर्दशी की तिथि है। कहा जाता है कि इसी दिन शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी और भगवान शिव की लिंग के रूप में पूजा हुई थी। इसकी वजह से ही आज शिवलिंग स्थापित कराया जा रहा है।
शिवलिंग की स्थापना पूजा के लिए कंबोडिया और कोलकाता से फूल मंगवाए गए हैं। मंदिर परिसर में एक ट्रक फूल सुबह-सुबह ही पहुंच गए हैं। इसमें गुलाब, गेंदा, गुलदाउदी आदि फूल शामिल है। शिवलिंग पर माला चढ़ाने के लिए खास तरह का माला बनाया गया है। जो कि 18 फीट का है, जिसको फूल के साथ साथ भांग, धतूरा, बेलपत्र मिलाकर बनाया गया है। वहीं, शिवलिंग को इंस्टॉल करने के लिए राजस्थान और भोपाल से दो क्रेन मंगाए गए हैं।
अरेराज महात्म्य और गरुड़ पुराण में इसकी चर्चा है कि श्रीराम जनकपुर में शादी के बाद इसी रास्ते अयोध्या गए थे। अरेराज सोमेश्वर नाथ मंदिर में माता सीता के साथ श्रीराम ने यहां पर भगवान शिव की पूजा अर्चना की थी। इसको लेकर यहां पर ही महादेव की शिवलिंग स्थापित किया जा रहा है।