
मनोज रजक के ठिकाने पर जांच करती EOU
Bihar News:बिहार में भ्रष्टाचार अधिकारियों के किस्से नए नहीं हैं, लेकिन इन दिनों बिजली विभाग के एक कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) मनोज कुमार रजक की कहानी चर्चा का केंद्र बनी हुई है, जिसने भ्रष्टाचार के पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जिस युवक के पास कभी अपना एजुकेशन लोन चुकाने के लिए पैसे नहीं थे, सरकारी नौकरी मिलने के बाद उसने अपने 17 साल के करियर में इतनी दौलत जमा कर ली कि आज जांच एजेंसियां भी हैरान रह गई हैं।
2009 से पहले, मनोज कुमार रजक एक आम छात्र थे। एक मध्यम-वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले मनोज ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए एक बैंक से 85,000 का एजुकेशन लोन लिया था। उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि नौकरी के शुरुआती महीनों में उन्हें इस कर्ज की किस्तें चुकाने में भी काफी मुश्किल होती थी। जब 2009 में उन्होंने बिहार ऊर्जा विभाग में असिस्टेंट इंजीनियर के तौर पर नौकरी शुरू की, तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि कर्ज में डूबा यह युवक 17 साल की नौकरी में धनकुबेर बन जाएगा।
मनोज रजक की 17 साल की नौकरी का अधिकांश समय सीमांचल के जिलों अररिया, कटिहार, पूर्णिया और फिर दरभंगा-मधुबनी में बीता। जांच के मुताबिक, इन सीमावर्ती जिलों में अपनी पोस्टिंग के दौरान, उन्होंने ठेकेदारों और टेंडरों के जरिए 'कमीशन' इकट्ठा करने का एक बहुत ही सुनियोजित नेटवर्क तैयार कर लिया था, एक ऐसा सिस्टम जिसमें हर फाइल के आगे बढ़ने के साथ-साथ पैसों के बंडल भी हाथ बदलते थे।
मनोज रजक ने अररिया में नेशनल हाईवे (NH) के किनारे कीमती जमीने खरीदीं। दरभंगा के भेलूचक इलाके में, उन्होंने एक आलीशान दो-मंजिला बंगला बनवाया, जिसका गृह-प्रवेश समारोह कुछ ही महीने पहले बड़े ही धूमधाम और शान-शौकत के किया गया था। इसके अलावा, सुपौल में अपने पैतृक गांव में, उन्होंने अपनी पत्नी के नाम पर HP गैस की डीलरशिप ली और उस जगह पर एक विशाल गोदाम और दफ्तर बनवाया।
आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब इंजीनियर का नेपाल कनेक्शन सामने आया। मनोज रजक सिर्फ बिहार के भीतर ही संपत्ति जमा करके नहीं रुके। उन्होंने सीमा पार नेपाल में भी भारी निवेश किया। सूत्रों के अनुसार, मनोज रजक ने नेपाल में अपनी गर्लफ्रेंड के लिए एक आलीशान बंगला (विला) खरीदा। इसके अलावा, उन्होंने नेपाल में एक पेट्रोल पंप की डीलरशिप भी हासिल की, जो इसी महिला सहयोगी के नाम पर रजिस्टर्ड थी।
एक सरकारी कर्मचारी होने के नाते, विदेश यात्रा के लिए सरकार से आधिकारिक अनुमति लेना अनिवार्य है। हालांकि, मनोज रजक ने बिना किसी आधिकारिक सूचना के बार-बार नेपाल की यात्रा की और वहां बेनामी निवेश किए।
EOU ने इस मामले के विदेशी फंडिंग पहलू की जांच शुरू कर दी है, साथ ही उन अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से संवेदनशील माना गया है। एक सरकारी इंजीनियर का किसी पड़ोसी देश में इतनी बड़ी संपत्ति जमा करना और वहां के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में निवेश करना न केवल भ्रष्टाचार का कृत्य हो सकता है, बल्कि संभावित रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला भी हो सकता है। EOU अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या नेपाल में उसकी संपत्तियों का इस्तेमाल किसी अन्य अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
शुरुआती एफआईआर में मनोज रजक के पास आय से अधिक केवल 1.20 करोड़ रुपये की संपत्ति होने का दावा किया गया था। लेकिन छापेमारी के दौरान मिले 17 बेनामी संपत्तियों के दस्तावेजों, बैंक खातों, गहनों और रियल एस्टेट निवेश की वर्तमान बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है।
आर्थिक अपराध इकाई ने इस मामले को गंभीर मानते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है। हाल के फैसलों और प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की जा रही है। सार्वजनिक राजस्व को हुए नुकसान की जांच होगी। नेपाल में निवेश को लेकर अलग से जांच संभव। बेनामी संपत्तियों की पहचान और जब्ती की प्रक्रिया शुरू। EOU का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा।
Updated on:
19 Mar 2026 01:46 pm
Published on:
19 Mar 2026 01:45 pm
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