
सांकेतिक तस्वीर
बिहार के औरंगाबाद जिले की रहने वाली एक युवती ने परिवार और समाज से लड़कर आखिरकार अपने प्यार को हासिल कर लिया। यह उसकी संघर्ष, इंतजार और एक मां के अटूट हौसले की कहानी है। मासूम बेटी को गोद में लिए, आंखों में उम्मीद संजोए वह पिछले 8 माह से अपने प्यार के लिए लड़ रही थी। अंततः उसकी मोहब्बत को मंजिल मिल ही गई।
दरअसल, यह मामला एक साल पुराना है। औरंगाबाद की रहने वाली एक युवती को पास के ही गांव के एक युवक से प्रेम हो गया। दोनों एक-दूसरे से नजर बचाकर चोरी-छिपे मिलते थे और फोन पर बातचीत किया करते थे। जब उनके परिवार वालों को इस रिश्ते की जानकारी मिली, तो दोनों पक्षों ने इसका विरोध किया। परिवार के विरोध से नाराज होकर दोनों घर छोड़कर दिल्ली भाग गए। उस समय दोनों नाबालिग थे। लड़की के परिजनों ने युवक के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज करा दिया।
लड़की के परिजनों द्वारा युवक के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 8 दिनों के भीतर दोनों को दिल्ली से बरामद कर लिया। इसके बाद पुलिस ने लड़की को उसके परिजनों के हवाले कर दिया, जबकि युवक को जेल भेज दिया गया। घर लौटने के कुछ समय बाद युवती को पता चला कि वह गर्भवती है। इसके बावजूद उसने समाज के तानों की परवाह किए बिना गर्भ में पल रहे बच्चे को जन्म देने का फैसला किया और अपने निर्णय पर कायम रही। इसके बाद उसने अपने प्यार को पाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने युवती की अर्जी पर सुनवाई के दौरान कहा कि यदि दोनों परिवार शादी के लिए तैयार हैं और इस संबंध में लिखित समझौता अदालत में प्रस्तुत करते हैं, तो युवक को जमानत दी जा सकती है। अदालत के इस मानवीय रुख के बाद दोनों परिवारों ने सहमति जताई। इसके फलस्वरूप करीब 8 महीने बाद युवक को जेल से रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद दोनों की शादी कोर्ट परिसर में स्थित मंदिर में संपन्न कराई गई।
Published on:
19 Mar 2026 10:50 am
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