पटना

कौन बनेगा बिहार का नया सीएम? सम्राट चौधरी सबसे आगे, लेकिन रेस में ये नाम भी शामिल; क्या BJP करेगी सरप्राइज?

बिहार की राजनीति इस समय एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? इस रेस में भाजपा के इन नेताओं का नाम सबसे आगे चल रहा है। 

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Apr 12, 2026
सीएम नीतीश कुमार के साथ डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी

बिहार के राजनीतिक गलियारों में इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि नीतीश कुमार के बाद अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? दिल्ली से लेकर पटना तक बैठकों का दौर जारी है और भाजपा इस बार मुख्यमंत्री पद को लेकर पूरी तरह से आक्रामक नजर आ रही है। फिलहाल, राजनीतिक हलकों में सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। हालांकि, कई अन्य दावेदार भी इस दौड़ में मजबूती से बने हुए हैं। लेकिन BJP की राजनीति को देखते हुए किसी 'चौंकाने वाले' उम्मीदवार के उभरने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

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रेस में सबसे आगे सम्राट चौधरी

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को इस समय मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है। कुशवाहा (कोइरी) समुदाय से आने वाले सम्राट चौधरी ने पिछले कुछ वर्षों में पार्टी और सरकार दोनों में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। उनका राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने 1999 में RJD के साथ अपने करियर की शुरुआत की और बाद में BJP में शामिल हो गए, जहां उन्होंने तेजी से तरक्की की। सूत्रों के अनुसार भाजपा में उनकी स्वीकार्यता मजबूत है और उन्हें केंद्रीय नेतृत्व का पूरा भरोसा हासिल है।

नित्यानंद राय का नाम भी दौड़ में शामिल

इस दौड़ में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के नाम की भी खूब चर्चा हो रही है। वे लंबे समय से BJP संगठन से जुड़े रहे हैं और अमित शाह के करीबी विश्वासपात्र माने जाते हैं। नित्यानंद राय के जरिए BJP बिहार के सबसे बड़े वोट बैंक यादव समुदाय में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर सकती है। उनके पास संगठनात्मक मामलों और शासन दोनों का अनुभव है, जो उनकी दावेदारी को और मजबूत बनाता है।

डॉ. संजय जायसवाल

मुख्यमंत्री पद की दौड़ में एक और अहम नाम डॉ. संजय जायसवाल का है। वे पहले बिहार BJP के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और पार्टी संगठन पर उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। वैश्य समुदाय से आने वाले जायसवाल को एक संतुलित और संगठन-उन्मुख नेता के तौर पर देखा जाता है। ऐसी चर्चा है कि दिल्ली में चल रही बैठकों के दौरान उनके नाम पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

OBC और दलित चेहरों पर भी फोकस

इन चेहरों के अलावा, मुख्यमंत्री पद के लिए कई अन्य नेता भी दौड़ में शामिल हैं। पटना की दीघा विधानसभा सीट से विधायक संजीव चौरसिया OBC वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं और पार्टी के एक अनुभवी कार्यकर्ता हैं। वहीं, BJP के पास विधान परिषद सदस्य जनक राम के रूप में एक मजबूत विकल्प मौजूद है, जो एक प्रमुख दलित चेहरा हैं और अनुसूचित जाति के वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की क्षमता रखते हैं।

ये महिलाएं भी रेस में

महिला नेतृत्व की बात करें तो पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी श्रेयसी सिंह भी सीएम पद की रेस में बताई जा रही हैं। श्रेयसी राजपूत समुदाय से आती हैं और उनकी छवि एक युवा, पढ़ी-लिखी नेता और अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में हैं। श्रेयसी सिंह अभी बिहार की खेल मंत्री हैं।

इसके अलावा, राज्यसभा सांसद धर्मशीला गुप्ता भी इस दौड़ में शामिल हैं। वैश्य समुदाय से आने वाली धर्मशीला का महिलाओं के साथ मजबूत तालमेल पार्टी के लिए एक बड़ी ताक़त साबित हो सकता है।

सरप्राइज फैक्टर

BJP अक्सर आखिरी समय पर अचानक और अप्रत्याशित फैसले लेने के लिए जानी जाती है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में पार्टी ने अचानक नए चेहरों को मुख्यमंत्री पद पर बिठाकर सबको चौंका दिया था। इसलिए, बिहार में भी इस बात की पूरी संभावना है कि ठीक आखिरी समय पर कोई ऐसा नाम सबसे आगे निकलकर आ जाए जिसकी अभी चर्चा भी नहीं हो रही है। इसी वजह से, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि मुख्यमंत्री पद की यह दौड़ अभी भी पूरी तरह से खुली हुई है।

जदयू कार्यकर्ता निशांत को चाहते हैं सीएम

जहां एक तरफ BJP अपने अंदरूनी विचार-विमर्श में लगी है, वहीं जदयू के भीतर नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। पटना की सड़कों पर उनके समर्थन में कई पोस्टर भी लगाए गए हैं। हालांकि भाजपा इस बार सीएम पद पर कोई समझौता करने के मूड में नहीं दिख रही।

इसके अलावा, समय-समय पर चर्चाओं में चिराग पासवान का नाम भी सामने आता रहता है। लेकिन उन्होंने खुद साफ कर दिया है कि वे इस दौड़ से फिलहाल बाहर हैं।

फैसला कब तक होगा?

सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 13 या 14 अप्रैल तक अपना इस्तीफ़ा दे सकते हैं। उम्मीद है कि 14 अप्रैल को NDA विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें नए नेता का चुनाव किया जाएगा। इसके बाद यह अनुमान लगाया जा रहा है कि नए मुख्यमंत्री 15 अप्रैल को अपने पद की शपथ लेंगे। हालाँकि इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक घटनाक्रम तेज़ी से बदल रहे हैं।

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