पटना

Rajya Sabha Election: AIMIM का साथ मिला तो क्या जीत जाएंगे तेजस्वी के उम्मीदवार? 5वीं सीट पर सस्पेंस बरकरार

Rajya Sabha Election: बिहार में पांचवीं राज्यसभा सीट के लिए राजनीतिक लड़ाई गरमाती जा रही है। महागठबंधन को जीत के लिए 6 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है। तेजस्वी यादव को AIMIM से पॉजिटिव सिग्नल मिले हैं, लेकिन मैजिक नंबर तक पहुंचने के लिए एक और विधायक की जरूरत है। 

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Mar 12, 2026
राजद नेता तेजस्वी यादव और AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Photo-IANS)

Rajya Sabha Election: बिहार की पांच राज्य सभा सीटों के लिए होने वाली वोटिंग को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। राजधानी पटना के सियासी गलियारों में हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि पांचवीं सीट का क्या होगा? क्या NDA कोई कमाल करके पांचों सीट पर कब्जा कर लेगी, या तेजस्वी यादव तेजस्वी यादव अपनी राजनीतिक बिसात से NDA को मात दे देंगे? राज्य सभा चुनाव में पांचवीं सीट दोनों गठबंधनों की साख और संख्या बल का लिटमस टेस्ट बन गई है। इधर, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और AIMIM के बीच बढ़ती नजदीकियां एनडीए के खेमे में हलचल पैदा कर रही हैं। लेकिन गणित कुछ ऐसा है कि तेजस्वी के लिए राह जितनी आसान दिख रही है, उतनी है नहीं।

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राज्य सभा की पांचवीं सीट का गणित

बिहार विधानसभा की मौजूदा स्थिति के अनुसार, किसी भी उम्मीदवार को राज्य सभा सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता की 41 वोटों की जरूरत होती है। विधानसभा की कुल सीटों की संख्या और विधायकों की संख्या को देखते हुए, NDA चार सीटों पर सुरक्षित है, लेकिन पांचवीं सीट एक पेच है।

चार सीटें जीतने के बाद, NDA के पास 38 सरप्लस वोट हैं। इसका मतलब है कि उसे पांचवीं सीट जीतने के लिए बस तीन और वोट चाहिए। वहीं, RJD की अगुवाई वाली महागठबंधन के पास अभी 35 MLA का पक्का सपोर्ट है। उन्हें 41 तक पहुंचने के लिए छह और MLA चाहिए। यहीं से ओवैसी की पार्टी और मायावती की BSP का गेम शुरू होता है। तेजस्वी यादव की नजर AIMIM के पांच और BSP के एक MLA पर है।

तेजस्वी-ईमान की पॉजिटिव मीटिंग

बुधवार को AIMIM बिहार के प्रदेश अध्यक्ष और MLA अख्तरुल ईमान पटना में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के घर पहुंचे। जहां दोनों ने करीब एक घंटे तक बंद कमरे में मीटिंग की, जिसमें उन्होंने पुरानी शिकायतों को सुलझाने की कोशिश की।

मीटिंग के बाद मीडिया से बात करते हुए अख्तरुल इमान ने कहा, 'हमारी बातचीत बहुत पॉजिटिव माहौल में हुई। RJD ने राज्य सभा के लिए हमसे सपोर्ट मांगा है। चूंकि मामला कम्युनल ताकतों को रोकने का है, इसलिए हम इस पर विचार कर रहे हैं।' हालांकि, उन्होंने यह साफ कर दिया कि आखिरी फैसला असदुद्दीन ओवैसी का ही होगा। आज पटना में AIMIM विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसमें ओवैसी को पूरी रिपोर्ट भेजी जाएगी।

इफ्तार पार्टी में बात फाइनल होगी

बिहार की राजनीति में इफ्तार पार्टी हमेशा से ही बड़े राजनीतिक गठजोड़ का गवाह रहा है। इस बार तेजस्वी यादव ने अपनी स्ट्रैटेजी में इफ्तार डिप्लोमेसी को अहम जगह दी है। चुनाव से ठीक पहले 15 मार्च बिहार की पॉलिटिक्स के लिए अहम दिन होगा। इसी दिन AIMIM प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने इफ्तार पार्टी रखी है, जिसमें तेजस्वी यादव को बुलाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि तेजस्वी यादव ने भी उसी दिन इफ्तार पार्टी रखी है। माना जा रहा है कि इस सपोर्ट का ऑफिशियल ऐलान 15 मार्च को होगा, जब ओवैसी खुद बिहार आ सकते हैं।

BSP का एक वोट: जीत का आखिरी और सबसे मुश्किल कदम

RJD के लिए राज्य सभा का गणित इतना आसान नहीं है। अगर AIMIM के सभी पांच विधायक भी राजद कैंडिडेट अमरेंद्र धारी सिंह को समर्थन दे दें, तो भी महागठबंधन का टैली 35 प्लस 5 यानि 40 तक ही पहुंच पाएगा। जीत के लिए अभी भी एक वोट कम होगा।

यह एक वोट BSP के इकलौते विधायक सतीश कुमार सिंह यादव का है। BSP के सपोर्ट के बिना, ओवैसी का सपोर्ट भी तेजस्वी को जीत की दहलीज पार नहीं करा पाएगा। लेकिन बसपा का रुख अभी भी एक पहेली बना हुआ है। BSP विधायक ने कहा है, 'पार्टी सुप्रीमो मायावती जो भी कहेंगी वही होगा, उनका जो निर्देश हम उनके साथ चलेंगे। थोड़ा इंतजार करें, सब साफ हो जाएगा।' यदि बसपा तटस्थ रहती है या एनडीए की ओर झुकती है, तो तेजस्वी का सारा नेगोशिएशन धरा का धरा रह जाएगा।

महागठबंधन को AIMIM का सपोर्ट जरूरी या मजबूरी

राजनीतिक जानकारों का मानना ​​है कि ओवैसी की पार्टी के लिए तेजस्वी को सपोर्ट करना अब मजबूरी भी है और स्ट्रेटेजी भी। ओवैसी पर अक्सर 'BJP की B-टीम' होने का आरोप लगाया जाता रहा है। तेजस्वी को सपोर्ट करके वह यह साबित करना चाहते हैं कि वह BJP को रोकने के लिए सीरियस हैं।

इतना ही नहीं, सीमांचल का समीकरण भी ओवैसी के लिए भी जरूरी है, क्योंकि उनके वोटर और विधायक उसी इलाके से हैं और अमित शाह के सीमांचल दौरे के बाद वहां पोलराइजेशन तेज हो गया है। अगर ओवैसी इस समय किनारे हट जाते हैं, तो उनका मुस्लिम वोट बैंक वापस RJD की तरफ जा सकता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना ​​है कि महागठबंधन को सपोर्ट करने के पीछे की वजह AIMIM की भविष्य की स्ट्रैटेजी भी हो सकती है। ओवैसी भविष्य के चुनावों के लिए बिहार में एक बड़े विपक्षी फ्रंट का हिस्सा बनना चाहते हैं और महागठबंधन उनके लिए सबसे सही ऑप्शन होगा।

बातचीत की टेबल पर डेवलपमेंट

अख्तरुल ईमान और तेजस्वी के बीच मीटिंग सिर्फ वोटों को लेकर नहीं थी। सूत्रों के मुताबिक, ईमान ने तेजस्वी से सीमांचल में पिछड़ेपन और घुसपैठ जैसे गंभीर मुद्दों पर अपना रुख साफ करने को कहा। तेजस्वी ने भरोसा दिलाया है कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आती है या उनके असर में आती है, तो सीमांचल में डेवलपमेंट में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। यह बातचीत ओवैसी को अपने वोटरों को जवाब देने के लिए एक मजबूत बेस देगी।

एनडीए को सता रहा क्रॉस-वोटिंग का डर!

ऐसा नहीं है कि राज्य सभा चुनाव को लेकर सिर्फ महागठबंधन ही हाथ-पांव मार रहा है, NDA खेमा भी चुप नहीं बैठा है। मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्य सभा जा रहे नीतीश कुमार के नॉमिनेशन के बाद, NDA अब पांचवीं सीट पक्की करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रहा है। गुरुवार को डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के घर पर NDA विधायकों की एक बड़ी मीटिंग बुलाई गई है।

NDA को डर है कि उनके कुछ विधायक तेजस्वी यादव के उम्मीदवार के पक्ष में न वोट कर दें। इस बीच, महागठबंधन में भी दरार की खबरें आ रही हैं। खासकर, कांग्रेस के कुछ विधायकों के NDA के संपर्क में होने की खबरें हैं। इसलिए, तेजस्वी यादव ने महागठबंधन के विधायकों के साथ बैठक कर विस्तृत चर्चा की है।

16 मार्च को होगा फैसला

बिहार राज्यसभा की पांचवीं सीट का मुकाबला अब रोमांचक मोड़ पर है। यह कहना मुश्किल है कि किसका पलड़ा भारी है, क्योंकि पांचवीं सीट के लिए NDA को 3 वोट (उनके पास 38) चाहिए। महागठबंधन को 6 वोट (उनके पास 35) चाहिए। अगर ओवैसी के पांच विधायक और BSP का एक विधायक महागठबंधन साथ आ जाते हैं, तो तेजस्वी खेला कर देंगे। हालांकि, अगर NDA विपक्षी विधायकों में सेंध लगा लेता है, तो BJP के मुख्यमंत्री बनने से पहले यह NDA के लिए एक बड़ी साइकोलॉजिकल जीत होगी।

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