
Padma Shri Shekhar Sen: छत्तीसगढ़ के रायपुर के पद्मश्री शेखर सेन पिछले करीब तीन दशकों से अपने एकल नाट्य मंचन के माध्यम से संत कबीर के विचारों को देश-विदेश तक पहुंचा रहे हैं। कबीर जयंती के अवसर पर पत्रिका से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर कबीर केवल संत या कवि नहीं, बल्कि जनजीवन का हिस्सा हैं।
संत कबीर के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सैकड़ों साल पहले थे। उनकी सच्चाई, सामाजिक चेतना और इंसानियत का संदेश समय की सीमाओं से परे है। पद्मश्री शेखर सेन पिछले करीब तीन दशकों से अपने एकल नाट्य मंचन के जरिए कबीर के विचारों को देश और दुनिया तक पहुंचा रहे हैं।कबीर जयंती के अवसर पर विशेष बातचीत में शेखर सेन ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर कबीर सिर्फ संत या कवि नहीं, बल्कि जनजीवन का हिस्सा हैं। यहां कबीरपंथी समाज की मजबूत मौजूदगी है और उनकी वाणी गांव-गांव तक पहुंची है।
शेखर सेन के अनुसार कबीर (Kabir Jayanti) की सबसे बड़ी ताकत उनकी भाषा और विचार हैं। करीब 600 साल बाद भी कबीर के दोहे आम लोगों की जुबान पर हैं, क्योंकि उनमें जीवन का सीधा सच दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि कबीर ने समाज को बिना डर के आईना दिखाया। उनकी वाणी में अंधविश्वास, भेदभाव और दिखावे के खिलाफ स्पष्ट संदेश मिलता है। यही कारण है कि बदलते समय में भी कबीर की प्रासंगिकता बनी हुई है।
शेखर सेन ने बताया कि वर्ष 1998 में तुलसीदास पर पहला एकल नाटक करने के बाद उनके मन में कबीर के जीवन और विचारों पर नाटक करने का विचार आया। लेकिन कबीर के जीवन से जुड़ी प्रमाणिक सामग्री जुटाना बड़ी चुनौती थी। इसके लिए उन्होंने करीब 78 पुस्तकों, शोध ग्रंथों और कबीरपंथी साहित्य का अध्ययन किया। लंबे शोध के बाद तैयार किए गए नाटक को दर्शकों का भरपूर समर्थन मिला और आज भी इसके मंचन का सिलसिला जारी है।
शेखर सेन अब तक अपने कबीर नाटक के 472 मंचन कर चुके हैं। उन्होंने भारत के अलावा लंदन, बेल्जियम, अमेरिका, सिंगापुर, हांगकांग, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका और सूरीनाम जैसे देशों में भी कबीर के विचारों को मंच के माध्यम से प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपने खर्च पर काशी से मगहर तक 14 शहरों की सांस्कृतिक यात्रा भी की, जहां गांव-गांव जाकर कबीर पर आधारित प्रस्तुतियां दीं।
शेखर सेन ने बताया कि उनके परिवार का कबीर साहित्य से पुराना रिश्ता रहा है। उनके पिता के चाचा आचार्य क्षितिमोहन सेन ने वर्ष 1910 में पहली बार कबीर के पदों का बंगला में संकलन प्रकाशित किया था। इसी संकलन के आधार पर गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर ने बाद में ‘100 पोयम्स ऑफ कबीर’ का अंग्रेजी अनुवाद किया। शेखर सेन के अनुसार कबीर की वाणी भारतीय संत साहित्य और रहस्यवाद को समझने की महत्वपूर्ण कुंजी है।
आज जब समाज में कई तरह की चुनौतियां मौजूद हैं, तब कबीर के विचार लोगों को समानता, प्रेम और सच्चाई का रास्ता दिखाते हैं। शेखर सेन का मानना है कि कबीर की वाणी इसलिए अमर है, क्योंकि उसमें इंसान और समाज को बेहतर बनाने की ताकत है।