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दहेज में मांगे थे सिर्फ 7 पौधे, अब 12 राज्यों में मुफ्त बांट रहे हरियाली की उम्मीद… जानें बालोद के ‘बीज दूत’ भोज साहू की प्रेरक कहानी

Balod News: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के 'बीज दूत' भोज साहू पर्यावरण संरक्षण की ऐसी मिसाल बन चुके हैं, जिसकी चर्चा अब देश के 12 राज्यों तक पहुंच चुकी है।
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Aug 06, 2026
Chhattisgarh News
बालोद के 'बीज दूत' भोज साहू (फोटो सोर्स- पत्रिका)

बालोद@ सतीश रजक। Beej Doot: आज के दौर में जहां शादी-ब्याह में लाखों रुपये, गाड़ियां और महंगे उपहार दहेज के रूप में मांगे जाने की खबरें अक्सर सुर्खियां बनती हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के एक युवक ने अपनी शादी में ऐसी मांग रखी, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने दहेज में न तो नकद राशि मांगी और न ही कोई कीमती सामान, बल्कि सिर्फ 7 पौधे मांगकर पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संदेश दिया। यही छोटी-सी शुरुआत आज एक ऐसे अभियान में बदल चुकी है, जिसकी हरियाली देश के 12 राज्यों तक पहुंच चुकी है।

गुंडरदेही विकासखंड के ग्राम देवरी (द) निवासी भोज साहू (40) आज पूरे इलाके में 'बीज दूत' के नाम से पहचाने जाते हैं। पिछले सात वर्षों से वे बिना किसी शुल्क के लोगों तक पेड़ों के बीज पहुंचाकर पर्यावरण बचाने की अलख जगा रहे हैं।

सोशल मीडिया से जुड़ते लोग, स्पीड पोस्ट से पहुंचते हैं बीज

भोज साहू बताते हैं कि सोशल मीडिया के जरिए जब भी कोई व्यक्ति उनसे बीज मांगता है, तो वे बिना किसी शुल्क के स्पीड पोस्ट के माध्यम से बीज भेज देते हैं। अब तक वे 1200 से अधिक लोगों तक 100 से 200 बीजों के पैकेट भेज चुके हैं। इन पैकेटों में आम, नीम, इमली, हर्रा, गुलमोहर समेत कई उपयोगी और छायादार पेड़ों के बीज शामिल होते हैं। उनकी यह पहल केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रही, बल्कि बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब सहित 12 राज्यों तक पहुंच चुकी है।

बालोद के 'बीज दूत' भोज साहू (फोटो सोर्स- पत्रिका)

3000 सीड बॉल से तैयार कर रहे नए जंगल

भोज साहू सिर्फ बीज भेजने तक ही सीमित नहीं हैं। वे बच्चों और ग्रामीणों के सहयोग से अब तक करीब 3000 सीड बॉल तैयार कर चुके हैं। मिट्टी में लिपटे इन बीजों को वे सड़क किनारे, पहाड़ियों और खाली पड़ी जमीनों पर डालते हैं। बारिश के मौसम में यही सीड बॉल अंकुरित होकर नए पौधों का रूप ले लेते हैं और धीरे-धीरे हरियाली बढ़ने लगती है।

इस काम के लिए वे कई बार खुद जंगलों में जाकर बीज इकट्ठा करते हैं। जरूरत पड़ने पर अपनी जेब से पैसे खर्च कर बीज खरीदते भी हैं, ताकि उनका अभियान लगातार चलता रहे।

दहेज में मांगे थे सिर्फ 7 पौधे

भोज साहू की सोच सबसे ज्यादा चर्चा में तब आई, जब वर्ष 2018 में अपनी शादी के दौरान उन्होंने दहेज में नकदी या सामान की जगह सिर्फ 7 पौधे मांगे। उनका मानना था कि पौधे किसी भी भौतिक वस्तु से ज्यादा मूल्यवान हैं, क्योंकि वे आने वाली पीढ़ियों को जीवन देते हैं। शादी के बाद भी उन्होंने इस संकल्प को नहीं छोड़ा। आज वे जन्मदिन, विवाह समारोह, सामाजिक कार्यक्रम और अन्य खुशी के अवसरों पर लोगों को उपहार में पौधे देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर मिल चुका सम्मान

भोज साहू की इस अनोखी पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय** ने जल एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 'जल शक्ति सम्मान' से सम्मानित किया है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ शासन और जिला प्रशासन भी कई बार उनके कार्यों की सराहना कर चुका है।

'एक बीज भी धरती बदल सकता है'

भोज साहू का मानना है कि यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक बीज भी रोप दे और उसकी देखभाल करे, तो धरती को फिर से हरा-भरा बनाया जा सकता है। वे कहते हैं कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। आज उनकी यही सोच हजारों लोगों को प्रेरित कर रही है। एक समय दहेज में सिर्फ 7 पौधे मांगने वाला यह युवक अब देशभर में हरियाली की उम्मीद बांट रहा है और सच मायनों में 'बीज दूत' बनकर पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल पेश कर रहा है।

Updated on:
06 Aug 2026 12:32 pm
Published on:
06 Aug 2026 12:32 pm
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