Bangladesh Clean Water: बांग्लादेश में हर साल 5 वर्ष से कम उम्र के हजारों बच्चों की मौत डायरिया से हो जाती है। सिर्फ 60 फीसदी आबादी तक साफ पानी की पहुंच हो पाई। ऐसे में देश की तारिक रहमान की नई सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती ज्यादा से ज्यादा आबादी तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना होगी।
Bangladesh Polluted Water: बांग्लादेश करीब 18 करोड़ की आबादी वाला एक छोटा देश है। जनसंख्या के आधार पर विश्व में यह 8वें स्थान पर है, जबकि वर्ष 2023 में देश का प्रति व्यक्ति जीडीपी 2551 अमेरिकी डॉलर था। हालांकि, पूरे देश के लिए अब तक कोई समग्र सीवेज शोधन प्रणाली या सुरक्षित जल आपूर्ति व्यवस्था स्थापित नहीं की गई है। यही वजह है कि देश में करीब 40 प्रतिशत लोगों को मलजनित या खतरनाक रसायनों से युक्त पानी पीना पड़ रहा है।
बांग्लादेश की लगभग 59-60% आबादी को सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध है। इसका अर्थ है कि लगभग 40% लोगों तक अभी भी ऐसे पानी तक पहुंच नहीं है, जो मलजनित और खतरनाक रसायनों से मुक्त हो। यह आंकड़ा 2015 में लगभग 56% था और धीरे-धीरे बढ़कर करीब 59% हुआ है। बांग्लादेश में ग्रामीण और गरीब आबादी में लगभग 4 में से 2 लोग तक आज भी सुरक्षित पेयजल की पहुंच नहीं है। अनुपचारित सीवेज के खुले निस्तारण और सुरक्षित पेयजल की कमी के कारण जलजनित रोग और डेंगू यहां की प्रमुख बीमारियां हैं।
बांग्लादेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (DPHE) हैंडपंप और शौचालय उपलब्ध कराता है। हैंडपंप प्रायः 100–120 फीट गहरे होते हैं, जिनके निचले हिस्से में 20–30 फीट का स्ट्रेनर लगा होता है। दूसरी ओर शौचालय 3–4 कंक्रीट रिंगों को जमीन में गाड़कर बनाए जाते हैं, जिनके ऊपर भारतीय शैली का पैन लगाया जाता है। इन रिंगों के जोड़ और निचला हिस्सा सील नहीं किया जाता, जिससे मल आसानी से मिट्टी और भूजल में मिल जाता है। मानसून के दौरान स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, जब सतही जल और भूजल सीवेज के साथ मिल जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ये शौचालय प्रायः हैंडपंप ट्यूबवेल के पास बनाए जाते हैं, जिससे मलजनित प्रदूषण की आशंका और बढ़ जाती है।
ट्यूबवेल का पानी बिना किसी उपचार के सीधे पीने और अन्य उपयोगों में लिया जाता है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। बांग्लादेश के भूजल में प्रायः आयरन, कठोरता, सिलिका और कुछ क्षेत्रों में आर्सेनिक की मात्रा अधिक पाई जाती है, जो बिना उपचार के पीने योग्य नहीं है। ये तत्व दीर्घकालिक बीमारियों जैसे दस्त, कब्ज, मधुमेह, त्वचा शुष्कता, बाल झड़ना, मतली, हृदय रोग, यकृत एवं गुर्दा विकार आदि का कारण बनते हैं और अंततः पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित करते हैं। कई रिसर्च में यह जानकारी दी गई है कि 70% से अधिक ट्यूबवेलों में E. coli पाया गया है, जो गंभीर संक्रमण का कारण बनता है। खासकर मानसून के मौसम में सतही जल और सीवरेज का मिश्रण भूजल में डूबता है और यह संक्रामक बीमारियों को जन्म देता है।
बांग्लादेश के शहरों और कस्बों की स्थिति कुछ अलग है, लेकिन वे भी सीवेज प्रदूषण और सुरक्षित जल की कमी से मुक्त नहीं हैं। ढाका में आंशिक क्षमता वाला सीवरेज सिस्टम हैं, जबकि शेष मलजल पाइप नेटवर्क के माध्यम से निकटवर्ती नदियों में बिना उपचार के छोड़ दिया जाता है। अन्य जिलों और उपजिलों में सीवरेज नेटवर्क या सीवेज ट्रीटमेंट की व्यवस्था नहीं है, वहां सेप्टिक टैंक का उपयोग किया जाता है। वास्तव में सेप्टिक टैंक पूर्ण उपचार प्रणाली नहीं है, बल्कि यह केवल प्राथमिक उपचार प्रदान करता है। इससे निकलने वाला जल अभी भी प्रदूषित रहता है और सतही व भूजल को पीढ़ी दर पीढ़ी दूषित करता है।
बांग्लादेश के लगभग 97–98% ग्रामीण और शहरी दोनों आबादी को बुनियादी पेयजल स्रोत तक पहुंच है, लेकिन सुरक्षित पेयजल तक पहुंच कम लोगों की है। ग्रामीण इलाकों में लगभग 60 फीसदी लोगों तक सुरक्षित पेयजल की पहुंच है, जबकि शहरी इलाकों में यह लगभग 52–53% लोगों तक है।
शहरी और उपनगरीय जल आपूर्ति भी मुख्यतः अनुपचारित भूजल पर निर्भर है, केवल ढाका और चट्टग्राम के कुछ हिस्सों में आंशिक सतही जल उपचार प्रणाली है। अधिकांश लोग पानी को उबालकर या फिल्टर कर पीते हैं, जिससे आवश्यक खनिज तत्व नष्ट या फिल्टर में रह जाते हैं और लोग लगभग “मृत जल” पीते हैं। साथ ही, पानी उबालने में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस भी व्यर्थ होती है। वर्षों से इस मूलभूत आवश्यकता को प्राथमिकता नहीं दी गई है। जबकि सीवेज उपचार कोई जटिल कार्य नहीं है। अगर सरकार पहल और जनजागरूकता हो तो सीमित संसाधनों में भी इसे संभव बनाया जा सकता है।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अपशिष्ट जल को एकत्रित, शुद्ध और सुरक्षित रूप से निष्कासित करते हैं, जो पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। बांग्लादेश में राष्ट्रीय स्तर पर विशेषकर शहरी क्षेत्रों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रणाली धीरे-धीरे विकसित हो रही है। ढाका में 2023 में पहला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया। यह अबतक देश का सबसे बड़ा संयंत्र है और प्रतिदिन 500 मिलियन लीटर मलजल शोधन की क्षमता रखता है, जिससे लगभग 50 लाख लोगों को लाभ मिलता है। यह आधुनिक जैविक उपचार प्रक्रिया अपनाता है। यह परियोजना बांग्लादेश डेल्टा प्लान 2100 के अंतर्गत एशियाई विकास बैंक और अन्य साझेदारों के सहयोग से संचालित है। फिर भी अन्य शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तार एक बड़ी चुनौती है।