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बांग्लादेश सरकार की सबसे बड़ी चुनौती: 40% आबादी पी रही प्रदूषित पानी, 70% ट्यूबवेल जल में मिला E. coli

Bangladesh Clean Water: बांग्लादेश में हर साल 5 वर्ष से कम उम्र के हजारों बच्चों की मौत डायरिया से हो जाती है। सिर्फ 60 फीसदी आबादी तक साफ पानी की पहुंच हो पाई। ऐसे में देश की तारिक रहमान की नई सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती ज्यादा से ज्यादा आबादी तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना होगी।

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Feb 22, 2026
बांग्लादेश में सिर्फ 60 फीसदी लोगों को मिलता है पीने योग्य पानी।

Bangladesh Polluted Water: बांग्लादेश करीब 18 करोड़ की आबादी वाला एक छोटा देश है। जनसंख्या के आधार पर विश्व में यह 8वें स्थान पर है, जबकि वर्ष 2023 में देश का प्रति व्यक्ति जीडीपी 2551 अमेरिकी डॉलर था। हालांकि, पूरे देश के लिए अब तक कोई समग्र सीवेज शोधन प्रणाली या सुरक्षित जल आपूर्ति व्यवस्था स्थापित नहीं की गई है। यही वजह है कि देश में करीब 40 प्रतिशत लोगों को मलजनित या खतरनाक रसायनों से युक्त पानी पीना पड़ रहा है।

  • देश में पेयजल की आपूर्ति का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भूजल पर निर्भर है। यहां पीने का पानी ट्यूबवेल और हैंडपंप द्वारा निकाले जाते हैं।

11 वर्षों में 56% से बढ़कर 59 फीसदी तक स्वच्छ जल की पहुंच

बांग्लादेश की लगभग 59-60% आबादी को सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध है। इसका अर्थ है कि लगभग 40% लोगों तक अभी भी ऐसे पानी तक पहुंच नहीं है, जो मलजनित और खतरनाक रसायनों से मुक्त हो। यह आंकड़ा 2015 में लगभग 56% था और धीरे-धीरे बढ़कर करीब 59% हुआ है। बांग्लादेश में ग्रामीण और गरीब आबादी में लगभग 4 में से 2 लोग तक आज भी सुरक्षित पेयजल की पहुंच नहीं है। अनुपचारित सीवेज के खुले निस्तारण और सुरक्षित पेयजल की कमी के कारण जलजनित रोग और डेंगू यहां की प्रमुख बीमारियां हैं।

यहां मल और जल मिलकर खतरनाक हालात पैदा करते हैं

बांग्लादेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (DPHE) हैंडपंप और शौचालय उपलब्ध कराता है। हैंडपंप प्रायः 100–120 फीट गहरे होते हैं, जिनके निचले हिस्से में 20–30 फीट का स्ट्रेनर लगा होता है। दूसरी ओर शौचालय 3–4 कंक्रीट रिंगों को जमीन में गाड़कर बनाए जाते हैं, जिनके ऊपर भारतीय शैली का पैन लगाया जाता है। इन रिंगों के जोड़ और निचला हिस्सा सील नहीं किया जाता, जिससे मल आसानी से मिट्टी और भूजल में मिल जाता है। मानसून के दौरान स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, जब सतही जल और भूजल सीवेज के साथ मिल जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ये शौचालय प्रायः हैंडपंप ट्यूबवेल के पास बनाए जाते हैं, जिससे मलजनित प्रदूषण की आशंका और बढ़ जाती है।

भूजल में भारी तत्व, किसी को बीमार करने के लिए काफी

ट्यूबवेल का पानी बिना किसी उपचार के सीधे पीने और अन्य उपयोगों में लिया जाता है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। बांग्लादेश के भूजल में प्रायः आयरन, कठोरता, सिलिका और कुछ क्षेत्रों में आर्सेनिक की मात्रा अधिक पाई जाती है, जो बिना उपचार के पीने योग्य नहीं है। ये तत्व दीर्घकालिक बीमारियों जैसे दस्त, कब्ज, मधुमेह, त्वचा शुष्कता, बाल झड़ना, मतली, हृदय रोग, यकृत एवं गुर्दा विकार आदि का कारण बनते हैं और अंततः पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित करते हैं। कई रिसर्च में यह जानकारी दी गई है कि 70% से अधिक ट्यूबवेलों में E. coli पाया गया है, जो गंभीर संक्रमण का कारण बनता है। खासकर मानसून के मौसम में सतही जल और सीवरेज का मिश्रण भूजल में डूबता है और यह संक्रामक बीमारियों को जन्म देता है।

शहरों और कस्बों में हालात एक जैसे, नदियों में खुलते हैं सीवेज

बांग्लादेश के शहरों और कस्बों की स्थिति कुछ अलग है, लेकिन वे भी सीवेज प्रदूषण और सुरक्षित जल की कमी से मुक्त नहीं हैं। ढाका में आंशिक क्षमता वाला सीवरेज सिस्टम हैं, जबकि शेष मलजल पाइप नेटवर्क के माध्यम से निकटवर्ती नदियों में बिना उपचार के छोड़ दिया जाता है। अन्य जिलों और उपजिलों में सीवरेज नेटवर्क या सीवेज ट्रीटमेंट की व्यवस्था नहीं है, वहां सेप्टिक टैंक का उपयोग किया जाता है। वास्तव में सेप्टिक टैंक पूर्ण उपचार प्रणाली नहीं है, बल्कि यह केवल प्राथमिक उपचार प्रदान करता है। इससे निकलने वाला जल अभी भी प्रदूषित रहता है और सतही व भूजल को पीढ़ी दर पीढ़ी दूषित करता है।

सिर्फ 53 फीसदी शहरी को पीने को मिलता है साफ पानी

बांग्लादेश के लगभग 97–98% ग्रामीण और शहरी दोनों आबादी को बुनियादी पेयजल स्रोत तक पहुंच है, लेकिन सुरक्षित पेयजल तक पहुंच कम लोगों की है। ग्रामीण इलाकों में लगभग 60 फीसदी लोगों तक सुरक्षित पेयजल की पहुंच है, जबकि शहरी इलाकों में यह लगभग 52–53% लोगों तक है।

बांग्लादेश में स्वच्छ जल: क्या है जन्नत की हकीकत?

  • WHO-UNICEF के अनुसार, 59–60% आबादी को ही “सुरक्षित प्रबंधित” पेयजल उपलब्ध।
  • 97–98% आबादी को “कम से कम बुनियादी” जल स्रोत तक पहुंच, लेकिन सभी को प्रदूषण-मुक्त नहीं मिलता पानी।
  • 90% से अधिक लोग भूजल (हैंडपंप और ट्यूबवेल) पर निर्भर।
  • कुछ अध्ययनों में 60–70% तक ट्यूबवेल में E. coli संदूषण पाया गया।
  • लगभग 2 करोड़ आबादी आर्सेनिक जोखिम वाले क्षेत्र में करती है निवास।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में 62% आबादी, वहीं शहरी क्षेत्रों में 52–53% को सुरक्षित पानी।
  • हर साल 5 वर्ष से कम उम्र के लगभग 6,700 – 18,400 से अधिक बच्चों की डायरिया से मौत हो जाती है।

ढाका और चट्टग्राम में लोग मृत जल पीने को मजबूर

शहरी और उपनगरीय जल आपूर्ति भी मुख्यतः अनुपचारित भूजल पर निर्भर है, केवल ढाका और चट्टग्राम के कुछ हिस्सों में आंशिक सतही जल उपचार प्रणाली है। अधिकांश लोग पानी को उबालकर या फिल्टर कर पीते हैं, जिससे आवश्यक खनिज तत्व नष्ट या फिल्टर में रह जाते हैं और लोग लगभग “मृत जल” पीते हैं। साथ ही, पानी उबालने में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस भी व्यर्थ होती है। वर्षों से इस मूलभूत आवश्यकता को प्राथमिकता नहीं दी गई है। जबकि सीवेज उपचार कोई जटिल कार्य नहीं है। अगर सरकार पहल और जनजागरूकता हो तो सीमित संसाधनों में भी इसे संभव बनाया जा सकता है।

वर्ष 2023 में ढाका में लगाया गया पहला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अपशिष्ट जल को एकत्रित, शुद्ध और सुरक्षित रूप से निष्कासित करते हैं, जो पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। बांग्लादेश में राष्ट्रीय स्तर पर विशेषकर शहरी क्षेत्रों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रणाली धीरे-धीरे विकसित हो रही है। ढाका में 2023 में पहला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया। यह अबतक देश का सबसे बड़ा संयंत्र है और प्रतिदिन 500 मिलियन लीटर मलजल शोधन की क्षमता रखता है, जिससे लगभग 50 लाख लोगों को लाभ मिलता है। यह आधुनिक जैविक उपचार प्रक्रिया अपनाता है। यह परियोजना बांग्लादेश डेल्टा प्लान 2100 के अंतर्गत एशियाई विकास बैंक और अन्य साझेदारों के सहयोग से संचालित है। फिर भी अन्य शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तार एक बड़ी चुनौती है।

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