Chhattisgarh Tribal Village: छत्तीसगढ़ में आज भी एक ऐसा आदिवासी गांव मौजूद है, जहां पिछले 30 सालों से सड़क नहीं बन पाई है। बारिश शुरू होते ही गांव का संपर्क पूरी तरह कट जाता है और पूरा इलाका टापू में तब्दील हो जाता है।
Chhattisgarh Tribal Village: बस्तर के सुदूरवर्ती कोटिगुड़ा गांव के 450 से 500 आदिवासी परिवारों ने तीन दशक से बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा जाहिर की है। ग्रामीणों ने गांव तक ऑल-वेदर सडक़ निर्माण, आंतरिक सीसी रोड, स्ट्रीट लाइट और राशन सोसाइटी शुरू करने की मांग की है। प्रधानमंत्री कार्यालय ( क्करूह्र) में 16 मई 2026 को दर्ज शिकायत ( क्करूह्रक्कत्र/ श्व/2026/0083126) को संबंधित विभागों को भेज दिया गया है, जिसके बाद अब ग्रामीणों को कार्रवाई की उम्मीद है।
ग्रामीण प्रतिनिधि सन्ना राम दिरदो और प्रवेश कुमार जोशी द्वारा भेजे गए पत्र में बताया गया है कि सुकमा मुख्यालय से कोटिगुड़ा की दूरी महज 4 किलोमीटर है, लेकिन आज भी यहां तक पहुंचने के लिए कच्चा, उबड़-खाबड़ और जोखिम भरा रास्ता ही एकमात्र विकल्प है। झाडिय़ों, पत्थरों और कीचड़ से भरे इस मार्ग पर बरसात के दिनों में आवाजाही पूरी तरह ठप हो जाती है। हालात ऐसे हैं कि एंबुलेंस और अन्य जरूरी सेवाएं भी गांव तक नहीं पहुंच पातीं।
ग्रामीणों ने अपने पत्र में यह भी सवाल उठाया है कि जब सुकमा जिले की अधिकांश आबादी आदिवासी है और जनप्रतिनिधि भी इसी समुदाय से आते हैं, तो कोटिगुड़ा जैसे गांव 30 वर्षों से विकास से वंचित क्यों हैं। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा— ‘‘क्या हम यह मान लें कि नेता सिर्फ चुनाव के समय ही वोट मांगने आते हैं?’’
ग्रामीणों के अनुसार बरसात के मौसम में कोटिगुड़ा पूरी तरह बाहरी दुनिया से कट जाता है। राशन, स्वास्थ्य सेवाएं, हाट-बाजार और सरकारी कार्यों के लिए लोगों को कई किलोमीटर जंगल के रास्ते पैदल सुकमा जाना पड़ता है। इससे विद्यार्थियों, शिक्षकों, युवाओं और छोटे व्यापारियों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित होती है और कई बार गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
गांव में राशन वितरण के लिए सोसाइटी भवन का निर्माण तो कर दिया गया है, लेकिन वहां आज तक राशन वितरण शुरू नहीं किया गया। ग्रामीणों को खाद्यान्न लेने के लिए सुकमा मुख्यालय पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे समय और संसाधनों की अतिरिक्त बर्बादी होती है।
ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में सुकमा से कोटिगुड़ा तक 4 किमी ऑल-वेदर सडक़ निर्माण, गांव की आंतरिक गलियों में सीसी रोड, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था और राशन सोसाइटी को तत्काल शुरू करने की मांग की है। साथ ही निर्माण कार्यों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जियो-टैग्ड फोटो और वीडियो के माध्यम से मॉनिटङ्क्षरग की व्यवस्था करने की भी अपील की है।
सुकमा जिला लंबे समय से नक्सल प्रभावित रहा है। हालांकि सरकार द्वारा सडक़ों और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कोटिगुड़ा जैसे छोटे गांव अब भी इन योजनाओं से पूरी तरह लाभान्वित नहीं हो पाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसे दूरस्थ गांवों पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो विकास का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकता है।
पीएमओ द्वारा शिकायत संबंधित विभागों को अग्रेषित किए जाने के बाद अब ग्रामीणों की निगाहें स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। कोटिगुड़ा के आदिवासी परिवारों को उम्मीद है कि 30 वर्षों से चली आ रही उनकी समस्या का समाधान होगा और उनका गांव भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकेगा।