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Collagen Supplements: ‘ग्लोइंग स्किन’ की चाहत या ‘एजिंग’ का डर! क्या वाकई झुर्रियां मिटा पाते हैं कोलेजन सप्लीमेंट्स?

Collagen Supplements: क्या चेहरे पर समय से पहले झुर्रियां नजर आने लगी हैं? क्या कोलेजन सप्लीमेंट्स वाकई असरदार हैं या नहीं? क्या होते हैं कोलेजन के फायदे? क्या होती है इसके इस्तेमाल करने की सही उम्र? ऐसे सभी सवालों के जवाब डॉक्टर पुनीत अग्रवाल से जानें।

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May 11, 2026
Collagen supplements

Collagen Supplements : जहां 'एंटी-एजिंग' और 'ग्लोइंग स्किन' की चाहत आज के युवाओं में तेजी से बढ़ी है, वहां 'कोलेजन' (Collagen) शब्द सबसे ज्यादा ट्रेंड कर रहा है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से लेकर स्किन केयर एक्सपर्ट्स तक, हर कोई कोलेजन पाउडर और कैप्सूल्स की बात कर रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या डिब्बे में बंद यह सफेद पाउडर वाकई आपकी त्वचा की उम्र को थाम सकता है?

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कोलेजन त्वचा के लिए क्यों होता है जरूरी?

कोलेजन हमारे शरीर में सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला प्रोटीन है। इसे शरीर का 'गोंद' (Glue) कहा जाता है क्योंकि यह त्वचा, हड्डियों, मांसपेशियों और टेंडन को आपस में जोड़कर रखता है। त्वचा के मामले में, कोलेजन डर्मिस (Dermis) यानी त्वचा की मध्य परत का मुख्य हिस्सा है। यह त्वचा को मजबूती, कसावट (Tightness) और लचीलापन (Elasticity) प्रदान करता है।

क्या वाकई झुर्रियों को रोकने में काम आते हैं सप्लीमेंट्स?

जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, शरीर में कोलेजन का उत्पादन प्राकृतिक रूप से कम होने लगता है। इसके अलावा धूप (UV Rays), प्रदूषण और खराब डाइट इस प्रक्रिया को और तेज कर देते हैं। नतीजा त्वचा का ढीला पड़ना और झुर्रियां।

विज्ञान क्या कहता है?

मेडिकल साइंस के अनुसार, हाइड्रोलाइज्ड कोलेजन पेप्टाइड्स (Hydrolyzed Collagen Peptides) के नियमित सेवन से त्वचा में नमी (Hydration) बढ़ती है और कोलेजन डेंसिटी (Collagen Density) में सुधार होता है। जब हम सप्लीमेंट लेते हैं, तो यह छोटे-छोटे हिस्सों में टूटकर हमारे रक्तप्रवाह (Blood Circulation) में पहुंचता है और शरीर को संकेत देता है कि उसे खुद का कोलेजन बनाना तेज करना चाहिए।

बारीक रेखाएं (Fine Lines): सप्लीमेंट्स इन्हें कम करने में प्रभावी हो सकते हैं।

गहरी झुर्रियां: ये झुर्रियों को पूरी तरह खत्म तो नहीं करते, लेकिन उन्हें और गहरा होने से रोकने में मदद जरूर करते हैं।

आपके लिए कौन सा बेस्ट है कोलेजन सप्लीमेंट्स ?

बाजार में कोलेजन कई रूपों में उपलब्ध है। सही चुनाव करना परिणाम के लिए बेहद जरूरी है:

स्रोत के आधार पर (Source):

मरीन कोलेजन (Marine Collagen) : यह मछली से प्राप्त होता है। इसमें 'टाइप 1' कोलेजन सबसे ज्यादा होता है, जो मानव त्वचा के लिए सबसे प्रभावी है। इसके अणु छोटे ( Small Molecule) होते हैं, इसलिए शरीर इसे 1.5 गुना तेजी से अवशोषित (Absorb) करता है।

बोवाइन कोलेजन(Bovine Collagen): यह गाय से प्राप्त होता है। यह मुख्य रूप से जोड़ों के दर्द और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है।

रूप के आधार पर (Form):

हाइड्रोलाइज्ड कोलेजन (Hydrolyzed Collagen) : यह सबसे अच्छा रूप है। इसमें कोलेजन को छोटे अणुओं में तोड़ दिया जाता है ताकि वह शरीर में आसानी से घुल सके।

पाउडर या कैप्सूल: एक्सपर्ट्स अक्सर पाउडर की सलाह देते हैं क्योंकि एक स्कूप पाउडर में कोलेजन की जितनी मात्रा (करीब 5-10 ग्राम) होती है, उतनी मात्रा पाने के लिए आपको 10-15 कैप्सूल्स खाने पड़ सकते हैं।

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सिर्फ कोलेजन काफी नहीं है। एक बेहतर सप्लीमेंट में ये चीजें भी होनी चाहिए:

विटामिन C: बिना विटामिन C के शरीर कोलेजन का संश्लेषण (Synthesis) नहीं कर सकता।

हाईऐल्युरोनिक एसिड (Hyaluronic Acid): यह त्वचा में पानी को रोके रखता है, जिससे स्किन प्लंपी और हाइड्रेटेड दिखती है।

बायोटिन: यह बालों और नाखूनों की मजबूती के लिए भी जरूरी है।

नतीजे दिखने में कितना समय लगता है?

  • कोलेजन कोई 'इंस्टेंट ग्लो' फॉर्मूला नहीं है। त्वचा की कोशिकाओं को रिपेयर होने में समय लगता है।
  • स्किन हाइड्रेशन: 4 से 6 हफ्ते।
  • झुर्रियों में सुधार: 8 से 12 हफ्ते (3 महीने) का नियमित सेवन।

साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

कोलेजन आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखें:

  • एलर्जी: अगर आपको सीफूड या मछली से एलर्जी है, तो मरीन कोलेजन न लें।
  • पाचन: कुछ लोगों को शुरुआत में पेट फूलना या भारीपन महसूस हो सकता है।
  • क्वालिटी: हमेशा लैब-टेस्टेड और अच्छी ब्रांड का सप्लीमेंट ही चुनें।

The Holistic Approach: लाइफस्टाइल भी है जरूरी

सप्लीमेंट तब तक काम नहीं करेंगे जब तक आप अपनी लाइफस्टाइल नहीं सुधारेंगे।

शुगर कम करें: ज्यादा चीनी खाने से 'ग्लाइकेशन' की प्रक्रिया होती है, जो कोलेजन को डैमेज करती है।

धूप से बचाव: बिना SPF वाली सनस्क्रीन के बाहर निकलना कोलेजन के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

डाइट: संतरा, नींबू, आंवला (विटामिन C के लिए), अंडे और हरी पत्तेदार सब्जियां अपनी डाइट में शामिल करें।

डॉ.पुनीत अग्रवाल के साथ पत्रिका के सवाल जवाब

क्या 25 साल की उम्र से ही कोलेजन का स्तर गिरने लगता है? इसके मुख्य संकेत क्या हैं ?

पत्रिका से बात करते उन्होंने बताया, आमतौर पर शरीर में कोलेजन का स्तर 20s के मध्य (25 साल) से गिरने लगता है। हर साल हम अपने शरीर का करीब 1% कोलेजन खो देते हैं।

  • 25 से 30 की उम्र: यह 'प्रिवेंटिव स्टेज' (Preventive Stage) है। इस उम्र में शुरू करने से भविष्य में होने वाली झुर्रियों की रफ्तार धीमी की जा सकती है।
  • 35 से 45 की उम्र: इस दौरान त्वचा में बदलाव दिखने लगते हैं। सप्लीमेंट लेने से त्वचा की इलास्टिसिटी बनी रहती है।
  • 50 के बाद (Post Menopause): महिलाओं में मेनोपॉज के पहले 5 सालों में कोलेजन का स्तर करीब 30% तक गिर सकता है। इस उम्र में डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट्स लेना बहुत फायदेमंद हो सकता है।

बाजार में पाउडर, कैप्सूल और गमीज़ (Gummies) जैसे कई विकल्प मौजूद हैं। कौन सा फॉर्म सबसे ज्यादा प्रभावी है?

उन्होंने बताया, बाजार में उपलब्ध विकल्पों में 'पाउडर' (Powder) सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है। इसके मुख्य कारण हैं।

  • अधिक मात्रा (High Dosage): पाउडर के एक स्कूप में आमतौर पर 5 से 10 ग्राम कोलेजन होता है, जबकि उतनी ही मात्रा के लिए आपको कई कैप्सूल या गमीज़ खानी पड़ेंगी।
  • बेहतर अवशोषण (Absorption): पाउडर पानी में घुलने के बाद शरीर द्वारा जल्दी सोख लिया जाता है।
  • शुद्धता: कैप्सूल और गमीज़ को बनाने में अक्सर बाइंडिंग एजेंट्स, आर्टिफिशियल फ्लेवर या शुगर का इस्तेमाल होता है, जो पाउडर में कम या नहीं के बराबर होते हैं।

कई लोग शिकायत करते हैं कि उन्होंने कोलेजन लिया लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। क्या इसके पीछे एब्जॉर्प्शन (Absorption) की कोई समस्या हो सकती है?

उन्होंने बताया, एब्जॉर्प्शन की समस्या इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण है। यदि शरीर कोलेजन को सही ढंग से सोख ही नहीं पा रहा, तो उसका असर त्वचा पर नहीं दिखेगा। इसके मुख्य कारण हैं जैसे

  • पेप्टाइड्स का आकार: यदि कोलेजन 'Hydrolyzed' (छोटे अणुओं वाला) नहीं है, तो पाचन तंत्र उसे खून तक पहुंचाने में विफल रहता है।
  • विटामिन C की कमी: विटामिन C के बिना शरीर कोलेजन को 'सिंथेसाइज' यानी अवशोषित नहीं कर सकता।
  • पाचन स्वास्थ्य: कमजोर गट हेल्थ या कम स्टमक एसिड भी अवशोषण में बाधा डालते हैं।
  • गलत समय: भारी भोजन के तुरंत बाद कोलेजन लेने से उसका एब्जॉर्प्शन धीमा हो सकता है। असर न दिखने का एक और कारण धैर्य की कमी है। कोलेजन को काम करने के लिए कम से कम 90 दिनों का समय चाहिए होता है।

क्या पुरुषों और महिलाओं के लिए कोलेजन की जरूरतें अलग-अलग होती हैं?

उन्होंने बताया, पुरुषों और महिलाओं के लिए कोलेजन की जरूरतें और उसकी गिरावट की प्रक्रिया काफी अलग होती है। पुरुषों की त्वचा प्राकृतिक रूप से महिलाओं की तुलना में लगभग 25% अधिक मोटी होती है और उनमें कोलेजन का घनत्व भी अधिक होता है, जिसके कारण उन पर उम्र का असर देर से दिखाई देता है। दूसरी ओर, महिलाओं को उम्र के साथ कोलेजन की अधिक आवश्यकता होती है, विशेषकर मेनोपॉज के दौरान और उसके बाद, क्योंकि एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर गिरने से उनके शरीर में कोलेजन का उत्पादन बहुत तेजी से कम हो जाता है। इसलिए महिलाओं को समय रहते सप्लीमेंट्स की जरूरत महसूस हो सकती है, जबकि पुरुषों के लिए यह उनकी सक्रिय जीवनशैली और त्वचा की बनावट पर निर्भर करता है।

एक दिन में कोलेजन की सुरक्षित मात्रा (Dosage) कितनी होनी चाहिए? क्या ज्यादा कोलेजन लेने के कोई नुकसान भी हैं?

उन्होंने बताया, एक स्वस्थ वयस्क के लिए आमतौर पर प्रतिदिन 2.5 ग्राम से 15 ग्राम कोलेजन की मात्रा सुरक्षित और प्रभावी मानी जाती है। हालांकि त्वचा में सुधार के लिए अक्सर डॉक्टर 5 से 10 ग्राम की सलाह देते हैं। जहां तक इसके नुकसान का सवाल है, कोलेजन की अत्यधिक मात्रा लेने से शरीर को कोई विशेष लाभ नहीं होता क्योंकि अतिरिक्त प्रोटीन शरीर से बाहर निकल जाता है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह पाचन संबंधी समस्याओं जैसे पेट फूलना, भारीपन या कब्ज का कारण बन सकता है। इसके अलावा, यदि कोलेजन का स्रोत खराब है या इसमें भारी धातुओं की मिलावट है, तो यह सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।

क्या हम सिर्फ प्राकृतिक खान-पान (जैसे खट्टे फल या अंडे) से कोलेजन की कमी को पूरा कर सकते हैं, या सप्लीमेंट लेना अनिवार्य है?

उन्होंने बताया, प्राकृतिक खान-पान से शरीर को कोलेजन बनाने के लिए जरूरी पोषक तत्व जरूर मिलते हैं, लेकिन यह सप्लीमेंट का पूर्ण विकल्प नहीं हो सकता। खट्टे फल (विटामिन C), अंडे, ब्रोकली और कद्दू के बीज शरीर की 'कोलेजन फैक्ट्री' को ईंधन देते हैं, जिससे शरीर खुद का कोलेजन बना पाता है। हालांकि, उम्र बढ़ने पर यह प्राकृतिक प्रक्रिया काफी धीमी हो जाती है। सप्लीमेंट्स में कोलेजन पहले से ही 'हाइड्रोलाइज्ड' यानी टूटे हुए रूप में होता है, जिसे शरीर तुरंत सोख लेता है, जबकि भोजन से प्राप्त प्रोटीन को तोड़कर कोलेजन बनाना एक जटिल और लंबी प्रक्रिया है। संक्षेप में, शुरुआती उम्र में अच्छी डाइट काफी है, लेकिन झुर्रियों और ढलती उम्र के संकेतों को रोकने के लिए सप्लीमेंट अधिक प्रभावी और सीधा तरीका है।

चीनी (Sugar) और धूप (Sunlight) कोलेजन को कैसे नुकसान पहुंचाती हैं? क्या सप्लीमेंट लेते समय डाइट में कुछ खास बदलाव करने पड़ते हैं?

उन्होंने बताया, चीनी और धूप कोलेजन के सबसे बड़े दुश्मन हैं। चीनी के सेवन से शरीर में 'ग्लाइकेशन' (Glycation) नामक प्रक्रिया होती है, जिसमें शुगर मॉलिक्यूल्स कोलेजन से चिपककर उसे सख्त और कमजोर बना देते हैं, जिससे त्वचा का लचीलापन खत्म हो जाता है। वहीं, सूरज की UV किरणें त्वचा की गहरी परतों में जाकर कोलेजन के फाइबर को तेजी से तोड़ती हैं, जिसे 'फोटो-एजिंग' कहा जाता है। सप्लीमेंट लेते समय डाइट में कुछ खास बदलाव जरूरी हैं। आपको विटामिन-C युक्त फलों का सेवन बढ़ाना चाहिए क्योंकि यह कोलेजन के अवशोषण को तेज करता है। साथ ही, जंक फूड और अधिक मीठे से परहेज करना चाहिए, अन्यथा सप्लीमेंट का असर बहुत कम हो जाएगा।

क्या कोलेजन सप्लीमेंट्स का वजन बढ़ने (Weight gain) या किडनी पर कोई असर पड़ता है?

उन्होंने बताया, कोलेजन सप्लीमेंट्स का वजन बढ़ने से कोई सीधा संबंध नहीं है। वास्तव में, यह एक प्रोटीन है जो पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराकर वजन नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। हालांकि, यदि सप्लीमेंट में आर्टिफिशियल शुगर या हाई कैलोरी फ्लेवर मिला हो, तो कैलोरी बढ़ने से वजन पर असर पड़ सकता है। किडनी के स्वास्थ्य के मामले में, स्वस्थ व्यक्तियों के लिए यह पूरी तरह सुरक्षित है। चूंकि कोलेजन एक प्रोटीन है, इसलिए किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोगों को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए। अधिक मात्रा में प्रोटीन किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। यदि आपको पहले से किडनी से जुड़ी कोई समस्या है, तो सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य है।

क्या यह सप्लीमेंट्स उन लोगों के लिए भी सुरक्षित हैं जिन्हें कोई स्किन कंडीशन (जैसे एक्ने या सोरायसिस) है?

कोलेजन सप्लीमेंट्स आमतौर पर एक्ने (दाग और धब्बे) या सोरायसिस जैसी स्किन कंडीशंस वाले लोगों के लिए सुरक्षित और फायदेमंद माने जाते हैं। वास्तव में, कोलेजन में मौजूद अमीनो एसिड्स त्वचा की 'बैरियर हेल्थ' को सुधारते हैं और सूजन (inflammation) को कम करने में मदद कर सकते हैं, जो सोरायसिस के मरीजों के लिए राहतकारी हो सकता है। एक्ने के मामले में, यह पुराने दाग-धब्बों को भरने (scars healing) की प्रक्रिया को तेज करता है। हालांकि, यदि आपके सप्लीमेंट में हाई शुगर, डेयरी डेरिवेटिव्स या आयोडीन की मात्रा अधिक है, तो यह एक्ने को बढ़ा सकता है। इसलिए, ऐसी स्थिति में हमेशा 'शुद्ध पेप्टाइड्स' चुनें और शुरू करने से पहले डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह जरूर लें।

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