Cyber Frauds India: भारत में साइबर फ्रॉड की शिकायतों में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। अकेले राजस्थान में 2024 के मुकाबले 2025 में साइबर ठगी के मामलों में 27 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। आइए जानते हैं देश के अन्य राज्यों का क्या हाल है?
Cyber Frauds India : राजस्थान में 2024 के मुकाबले 2025 में साइबर अपराधों में 27% की बढ़ोतरी हुई है। विधानसभा में सोमवार को निर्दलीय विधायक रविंद्र भाटी ने कहा कि 2024 में लगभग एक लाख शिकायतें प्राप्त हुईं, जबकि 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 1 लाख 27 हजार हो गई। उन्होंने यह आरोप लगाया कि इन शिकायतों में 27 हजार पीड़ितों की ही एफआईआर दर्ज हुई हैं। आइए जानते हैं कि देश के अन्य राज्यों में साइबर अपराध को लेकर क्या है हाल?
राजस्थान के निर्दलीय विधायक रविंद्र भाटी ने आरोप लगाते हुए कहा कि आज के समय में आम आदमी अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए एफआईआर दर्ज करवाने जाता है तो उसे कहा जाता है कि शिकायत 1930 पोर्टल पर दर्ज कराएं। पीड़ित व्यक्ति शिकायत लेकर यहां से वहां घूमता रहता है, जबकि पीड़ित को कोई समाधान नहीं मिलता है। यह मालूम हो कि विधायक भाटी ने अपने वक्तव्य में NCRP पर दर्ज शिकायतों के आधार पर आंकड़े बताए।
NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में 2021 में लगभग 1,504 साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गए थे। वहीं 2022 और 2023 में क्रमश: 1,835 और 2,435 मामले दर्ज किए गए। मतलब 2021 की तुलना में राज्य में 2023 में दर्ज मामलों में 62 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2023 तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान, भारत में cybercrime के मामले में 8वें स्थान पर रहा।
विधायक ने कहा कि पुलिस के पास कोई तकनीकी व्यवस्था नहीं है, जिससे साइबर ठगी को रोका जा सके। जनवरी 2024 से जून 2025 तक लगभग 23 करोड़ रुपए की साइबर ठगी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने साइबर सेल में 350 विशेषज्ञों की नियुक्ति की घोषणा की थी, जो अभी तक नहीं हुई है।
| राज्य | साइबर अपराध शिकायतें (2024) |
|---|---|
| महाराष्ट्र | लगभग 3,03,000 |
| उत्तर प्रदेश | लगभग 3,01,000 |
| कर्नाटक | लगभग 1,69,000 |
| गुजरात | लगभग 1,68,000 |
| दिल्ली | लगभग 1,53,000 |
| राजस्थान | लगभग 1,00,000 |
Cyber Frauds in India: NCRP पर वर्ष 2024 और 2025 साइबर अपराध के दर्ज हुए आंकड़ों को देखा जाए तो सबसे ज्यादा शिकायतें महाराष्ट्र में दर्ज कराई गईं। वर्ष 2024 में लगभग 3,03,000 साइबर अपराध शिकायतें दर्ज कराई गईं जबकि 2025 में 3,40,000 शिकायतें दर्ज कराई गईं। वहीं इस मामले में उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र को कड़ी टक्कर दी, लेकिन दूसरे नंबर पर रहा। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2024 में लगभग 3,01,000 शिकायतें दर्ज की गईं जबकि 2025 में 3,35,000 मामले दर्ज कराए गए। महाराष्ट्र में लगभग 12.21% की जबकि उत्तर प्रदेश में 11.30% की वृद्धि दर्ज की गई।
| राज्य | साइबर अपराध शिकायतें (2025) |
|---|---|
| महाराष्ट्र | लगभग 3,40,000 |
| उत्तर प्रदेश | लगभग 3,35,000 |
| कर्नाटक | लगभग 1,95,000 |
| गुजरात | लगभग 1,90,000 |
| दिल्ली | लगभग 1,70,000 |
| राजस्थान | लगभग 1,20,000 |
देश में वर्ष 2024 में लगभग 19.18 लाख साइबर अपराध शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज हुईं। इसके अलावा केंद्र सरकार ने संसद में बताया था कि 22.6 लाख साइबर अपराध घटनाएं NCRP पर दर्ज कराई गईं और यह 2023 की तुलना में करीब 42% ज्यादा है। वर्ष 2023 में NCRP पर 15.6 लाख साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। वहीं वर्ष 2025 में लगभग 24 लाख से अधिक साइबर-फ्रॉड शिकायतें राष्ट्रीय साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और वित्तीय साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग सिस्टम (CFCFRMS) पर दर्ज की गईं।
आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, 2025 में साइबर फ्रॉड से होने वाला वित्तीय नुकसान लगभग 22,495 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि, अन्य अनुमान इससे भी अधिक संभावित नुकसान का संकेत देते हैं। उन अनुमानों के अनुसार, साइबर फ्रॉड से देश में 20,000 करोड़ रुपये से लेकर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक नुकसान होने का अनुमान है। यह संकट संगठित घोटालेबाजों के गिरोहों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जो डिजिटल अरेस्टिंग, फर्जी निवेश योजनाओं (यह 77% नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं) और क्लोनिंग जैसी उन्नत रणनीति का उपयोग करते हैं। साइबर फ्रॉड के ऐसे मामले दिल्ली, तेलंगाना और तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर सामने आए।
वर्ष 2014 में दिल्ली में मात्र 226 वित्तीय साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज हुए थे, जिसमें कुल लगभग 2.63 करोड़ रूपये के नुकसान की रिपोर्ट थी। अगले साल 2015 में 712 साइबर फ़्रॉड मामले दर्ज हुए और नुकसान 6.3 करोड़ रुपये का हुआ। वहीं पांच साल बाद यानी 2020 में दर्ज मामलों की संख्या में दोगुनी से ज्यादा की बढ़ोतरी हो गई। इस साल 1,687 मामले दर्ज हुए और नुकसान करीब छह गुणा बढ़कर 35 करोड़ रुपये हो गया। 2022 में लगभग 1,545 साइबर फ़्रॉड मामले दर्ज किए गए। कोरोना काल के बाद दर्ज मामलों में कमी आई लेकिन साइबर ठगी का नुकसान बढ़कर 400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं 2024 में साइबर फ्रॉड के 1,591 मामले दर्ज हुए और लगभग ₹817.64 करोड़ रुपये की क्षति दर्ज की गई। यह नुकसान पिछले 11 सालों में सबसे अधिक थी।