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Delhi Pollution:’गंदी हवा और दूषित पानी ‘आप’ की देन’, लोग बोले- ‘ हमारा फेफड़ा खराब हो रहा’, दिल्ली CM ने शेयर की पूरी योजना

दिल्ली में वायु प्रदूषण और दूषित जल को लेकर प्रदेश की बीजेपी सरकार और विपक्षी पार्टी आप के बीच ठनी रहती है। इन मुद्दों पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Delhi CM Rekha Gupta) ने पत्रिका से बातचीत की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

Delhi Pollution : दिल्ली के बीजेपी सरकार (Delhi BJP Government) में जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा (Pravesh Sahib Singh Verma) ने दिल्ली विधानसभा में बताया कि लगभग 7,900 किलोमीटर के क्षेत्र में फैली दिल्ली की पेयजल पाइपलाइनों में से लगभग 50% 20 से 30 साल पुरानी हैं और उन्हें पूरी तरह से बदलने में सात से आठ साल लगेंगे।

आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) की पूर्व सरकार पर निशाना साधते हुए जल मंत्री ने कहा कि दूषित पानी (Delhi Water Pollution), पाइपलाइन रिसाव और अनियमित आपूर्ति जैसी समस्याएं नई नहीं हैं, बल्कि ये 'पिछली सरकारों की वर्षों की उपेक्षा, अनिर्णय और देरी का परिणाम' हैं। उन्होंने कहा, 'मुख्य सीवरों की सफाई दशकों से नहीं हुई थी। इसका पूरा बोझ मौजूदा सरकार पर आ गया है, लेकिन हम इन विरासत में मिली चुनौतियों से पार पाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।'

'अरविंद केजरीवाल को गाली देने से दिल्ली का प्रदूषण खत्म नहीं होगा'

आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के वरिष्ठ नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री गोपाल राय (Gopal Rai) ने विधानसभा में प्रदूषण पर चर्चा के दौरान भाजपा के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा (Manjinder Singh Sirsa) द्वारा किए गए झूठे दावों की पोल खोल कर रख दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली की अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को गाली देने से दिल्ली का प्रदूषण (Delhi Air Pollution) खत्म नहीं होगा, भाजपा (BJP) सरकार को काम करना होगा। उन्होंने कहा कि 2016 में दिल्ली में अच्छे दिनों की संख्या 109 थी, जिसे केजरीवाल सरकार ने कड़ी मेहनत करके 209 दिनों तक पहुंचाया था। 'आप' सरकार ने 24 घंटे बिजली देकर और पराली पर बायो डीकंपोजर का छिड़काव करके प्रदूषण को कम किया था।

'सरकार के लिए 9-10 महीने में AQI कम करना असंभव'

दिल्ली के वायु प्रदूषण को लेकर लगातार उठ रहे सवाल पर ​दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कुछ समय पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा था,'किसी भी चुनी हुई सरकार के लिए 9-10 महीने में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कम करना असंभव है।' उन्होंने लागों को आश्वस्त करते हुए कहा, 'रेखा सरकार इस समस्या को ठीक करने के लिए काम कर रही है।'

'बीजेपी अपने कार्यकाल में सिर्फ 30% पाइपलाइन बदल पाएगी'

जल मंत्री ने विधानसभा में यह कहा कि सरकार दिल्ली में पूरे पेयजल नेटवर्क के व्यापक नवीनीकरण की योजना बना रही है। उन्होंने आगे कहा, 'भाजपा सरकार के कार्यकाल में 30% जल पाइपलाइनों का नवीनीकरण किया जा सकता है और इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सरकार अगले एक वर्ष में निविदाएं जारी करेगी और कार्यों का आवंटन करेगी।'

'पाइपलाइन बदलने में खर्च होंगे 50 हजार करोड़ रुपये'

जल मंत्री ने यह भी बताया कि इस नवीनीकरण पर लगभग 50,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी और अगले दो वर्षों में लगभग 7,000 किलोमीटर पुरानी पाइपलाइनों को बदला जाएगा।

उन्होंने बताया कि दिल्ली के 16,000 किलोमीटर लंबे जल पाइपलाइन नेटवर्क में से 5,200 किलोमीटर से अधिक पाइपलाइन 30 साल से अधिक पुरानी हैं और लगभग 2,700 किलोमीटर पाइपलाइन 20 साल पुरानी हैं। उन्होंने आगे कहा, "इसके परिणामस्वरूप, बार-बार रिसाव, पाइप फटने, प्रदूषण का खतरा और 55% तक पानी का गैर-राजस्व जल के रूप में नुकसान होता है।"

दिल्ली की गंदी हवा और दूषित पानी पर क्या कर रही है रेखा सरकार

दिल्ली की बीजीपी सरकार की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta, CM, Delhi) ने राजस्थान पत्रिका की सीनियर रिपोर्टर डॉ. मीना कुमारी से बातचीत में कहा, 'दिल्ली सरकार राजधानी की हवा और पानी में सुधार के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को जीरो उत्सर्जन करने के लिए मजबूत किया जा रहा है। इसके लिए ईवी बसों को बढ़ाया जा रहा है। दिल्ली में वर्तमान में कुल 5,290 सरकारी बसें चलाई जा रही हैं। इनमें कुल 3,518 ईवी बसें हैं। वर्ष 2026 के अंत तक 7000 इलेक्ट्रिक बसें दिल्लीवासियों को उपलब्ध करा दी जाएंगी।'

पेयजल संयंत्रों को किया जा रहा है अपग्रेड : CM

उन्होंने पानी के मुद्दे पर बताया, 'राजधानी के पेयजल संकट को दूर करने और प्रदूषित पानी की रोकथाम के लिए पेयजल संयंत्रों को अपग्रेड किया जा रहा है। सरकार पूरी राजधानी की पानी की पुरानी पाइप लाइनों को बदलने की योजना पर गंभीरता पूर्वक कार्य कर रही है। इसके लिए विशेषज्ञों की राय भी ली जा रही है।'

सीवर सिस्टम को सुधारने के लिए चल रहा है काम

दिल्ली की सीएम ने बताया, 'दिल्ली को जलभराव से मुक्ति दिलाने व सीवर सिस्टम को सुधारने के लिए पुराने ड्रेनेज मास्टर प्लान में महत्पूर्ण बदलाव किए गए हैं। राजधानी में पुराने नालों का फ्लो बढ़ाने व नए नालों का निर्माण चल रहा है। पुराना मास्टर प्लान 1970 के दशक में बना था। इसी योजना के तहत चार बड़े नालों का निर्माण चल रहा है, जिनमें किराड़ी से दक्षिण दिल्ली तक, मुंडका हॉल्ट-सप्लीमेंट्री ड्रेन आदि शामिल हैं।'

दिल्ली ही नहीं, भारत के लगभग 1800 शहर वायु प्रदूषण की चपेट में

वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने एक्स पर कांग्रेस का बयान जारी साझा किया है। इस बयान में बताया गया है कि भारत के लगभग 44 फीसदी शहर यानी आकलन किए गए 4,041 वैज्ञानिक नगरों में से 1,787 शहर लगातार वायु प्रदूषण की गंभीर चपेट में हैं।

दिल्ली के पानी में यूरेनियम, नाइट्रेट, फ्लोराइड बहुत ज्यादा

कुछ समय पहले हुए केंद्रीय भूमिजल बोर्ड (CGWB) के एक सर्वे के अनुसार, राजधानी दिल्ली के कई इलाकों के भूजल में यूरेनियम, नाइट्रेट, फ्लोराइड, लेड और अत्यधिक नमक आदि खतरनाक रसायनिक तत्व भारी मात्रा में मौजूद पाए गए हैं। पानी के प्रदूषण चलते कई तरह की गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

'यूरेनियम और फ्लोराइड शरीर को भारी नुकसान पहुंचाते हैं'

सर्वे में यह बात सामने आई है कि दिल्ली के भूजल में यूरेनियम की मात्रा काफी बढ़ चुकी है। अभी भी दिल्ली के कई इलाके हैं, जहां बोरिंग का पानी पेयजल और खाना बनाने के काम में इस्तेमाल में लाया जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि भूजल में सीवर का गंदा पानी मिलने से पानी में यूरेनियम की मात्रा बढ़ जाती है। इस बारे में हड्डी रोग विशेष डॉ. आरिफ फारूखी ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि पानी के जरिए शरीर में यूरेनियम इकट्ठा होने लगता है और जिसकी वजह से किडनी, हड्डी और शरीर के कई अंगों को काफी ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है। वहीं फ्लोराइड की मात्रा बढ़ने से हड्डी और दांत कमजोर हो जाते हैं।

'प्रदूषण से बढ़ेगी श्वांस संबंधी बीमारियां'

श्वसन संबंधी मामलों के डॉक्टर नलिन जोशी ने पत्रिका से बातचीत में कहा ​कि प्रदूषण के चलते ग्लोबल वार्मिंग की समस्या बढ़ रही है। एक और वायु प्रदूषण बढ़ रहा है और दूसरी तरफ इसके चलते धूप की कमी भी हो रही है। इन दोनों दिक्कतों से त्वचा रोग, एलर्जी और सांस संबंधी बीमारियां बढ़ेगी। प्रदूषण के चलते एयरोसोल के निर्माण से शरीर की इम्यूनिटी कम होगी, स्लीप डिस्टरेंब बढ़ेगा और मनोवैज्ञानिक समस्याएं बढ़ेंगी। इससे आंतों की समस्या भी बढ़ेगी।

'बीजेपी सिर्फ पिछली सरकार पर दोष मढ़ने का काम करती है'

दिल्ली के शाहाबाद डेयरी गांव में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद का कहना है वायु और जल प्रदूषण की समस्या पिछली सरकारों में भी थी, लेकिन दूसरी सरकारें या तो उसे हल करने की दिशा में बढ़ती थी या कुछ भी नहीं करती थी। बीजेपी सरकार समस्या से पल्ला झाड़ती है। पिछली सरकार पर दोष मढ़ने का काम करती है। शिक्षा, स्वास्थ्य की तरह स्वच्छ वायु और स्वच्छ पानी बुनियादी सुविधाएं जनता को मिलनी चाहिए। इस समय पर टीवी पर एयर प्यूरीफायर, वॉटर प्यूरीफायर और आरओ का विज्ञापन बहुत ज्यादा दिखाए जाने लगा है। सरकार बोतलबंद पानी की तरह स्वच्छ हवा के नाम पर एयर प्यूरीफायर निर्माताओं की चांदी कराने वाली है।

'आप-बीजेपी के झगड़े में जनता का फेफड़ा खराब हो रहा है'

दिल्ली के रोहिणी इलाके के बाशिंदे हरीश ने बताया कि बीजेपी सरकार दिल्ली की हवा और पानी के लिए आम आदमी पार्टी की पूर्व सरकार को दोषी ठहरा रही है। एक-दूसरे को दोषी ठहराने से काम नहीं चलने वाला है। उन्होंने एक आंकड़े का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में करीब 22 लाख बच्चों के फेफड़ों को स्थायी तौर पर नुकसान पहुंच चुका है। दिल्ली में खांसी जैसी मामूली से बीमारी को ठीक होने में कई हफ्ते लग जा रहे हैं। फेफड़े और आंतें दिल्ली की जनता की खराब हो रही है।

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