
Diabetes and cataracts: युवाओं में डायबिटीज व स्मोकिंग की लत आंखों को कमजोर कर रहा है। 30-32 साल की उम्र में मोतियाबिंद सर्जरी करानी पड़ रही है। हालांकि ऐसे युवाओं की संख्या कम है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यह खतरे की घंटी है। पहले 60 की उम्र वालों को मोतियाबिंद सर्जरी करानी पड़ती थी। आंबेडकर समेत राजधानी के निजी अस्पतालों में पिछले साल ऐसे 250 से ज्यादा मरीजों का ऑपरेशन कर आंखों में लैंस लगाना पड़ा। नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादातर वे मरीज होते हैं, जो स्ट्रेस के बीच काम करते हैं और कथित रूप से तनाव कम करने के लिए नियमित स्मोकिंग करते हैं।
ऐसे लोग डायबिटीज टाइप-2 के मरीज भी बन गए हैं। आंबेडकर अस्पताल में पिछले साल चार माह में 35 साल या इससे कम उम्र वाले 53 लोगों का मोतियाबिंद ऑपरेशन किया गया है। नेशनल एंटी फ्राड यूनिट (नाफू) की रिपोर्ट में ये आंकड़े सामने आए थे। हालांकि नाफू ने इन केसों को संदेहास्पद मानते हुए अस्पताल से जरूरी दस्तावेज भेजने को कहा था। अस्पताल प्रबंधन ने दस्तावेज भी भेज दिए थे। एक स्टडी के अनुसार 40 साल से कम उम्र के 20 से 25 फीसदी मरीजों में मोतियाबिंद हो रहा है। इतना ही नहीं 3 से 4 फीसदी ऐसे भी हैं, जिनकी उम्र 18 साल से कम है।
नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार अंधापन के कुल मामलों में से 51 फीसदी मामलों में मुख्य वजह मोतियाबिंद होती है। आंबेडकर अस्पताल में रोजाना औसतन 5 से 6 मरीजों की मोतियाबिंद सर्जरी की जाती है। माह में 125 से 150 केस होता है। निजी अस्पतालों में 500 से ज्यादा ऑपरेशन मोतियाबिंद के होते हैं।
30 वर्षीय एक युवा प्रोफेशनल को धुंधला दिखने लगा। जांच करवाने पर मोतियाबिंद की पुष्टि हुई। हिस्ट्री से पता चला कि युवा काफी स्ट्रेस लेता है और स्माेकिंग करता है। वह डायबिटीज का भी मरीज है। सर्जरी कर लैंस लगाया गया। डॉक्टर ने युवक को स्मोकिंग न करने व जीवनशैली सुधारने की सलाह दी है।
32 वर्षीय एक जूनियर इंजीनियर नियमित स्मोकिंग कर रहा था। इसकी वजह से खून सप्लाई करने वाली नसों में प्लॉक जम गया था। इससे ब्लड सर्कुलेशन ठीक से नहीं हो पा रहा था। इसका असर आंखों पर भी पड़ा और दायीं आंख में लेंस लगाना पड़ा। डॉक्टर ने हमेशा चश्मा पहनने को भी कह दिया है।
डायबिटीज के मरीज
धूम्रपान करने वाले
लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का सेवन करने वाले
आंख में चोट लगने वाले लोग
अत्यधिक धूप या UV किरणों के संपर्क में रहने वाले
पारिवारिक इतिहास वाले लोग
धुंधला या कम दिखाई देना
रात में देखने में कठिनाई
तेज रोशनी से चकाचौंध महसूस होना
रंग फीके या धुंधले दिखना
चश्मे का नंबर बार-बार बदलना
एक आंख से दोहरी छवि दिखाई देना
प्रोटीनयुक्त व विटामिन ए युक्त खाना खाएं।
फलों व सब्जियों से भरपूर आहार लें। प्रोसेस्ड फूड्स न खाएं।
यूवी किरणों से आंखों को बचाने के लिए धूप का चश्मा व टोपी पहनें।
आंखों की नियमित जांच करवाएं। डॉक्टर नए या बदलते लक्षणों को बताएं।
स्मोकिंग व शराब सेवन बिल्कुल न करें।
डायबिटिक हो तो नियमित जांच कराएं। खेलकूद या अन्य कार्यों के दौरान आंखों को सुरक्षित रखें।
स्मोकिंग, डायबिटीज व ब्लड सर्कुलेशन ठीक नहीं होने वाले लोगों की आंखों पर विपरीत असर पड़ रहा है। अब 35 साल की उम्र में मोतियाबिंद के केस आ रहे हैं, जो चौंकाने वाले हैं। डायबिटीज है तो हर 6 माह में आंखों की रेटिना की जांच करवाएं। हैल्दी डाइट लें। इससे आंखों की रोशनी बनी रहेगी।
डॉ.अनिल गुप्ता, सीनियर नेत्र रोग विशेषज्ञ