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डिजिटल एस्टेट प्लानिंग में दुनिया आगे, भारत पीछे क्यों? अब तक स्पष्ट नहीं कानून?

Digital Assets Inheritance Law India: अगर आज आपके साथ कोई हादसा हो जाए, तो क्या आपके परिवार को आपके Gmail, Google Photos, YouTube से इनकम, क्लाउड में रखे दस्तावेज और UPI से जुड़े अकाउंट की सारी जानकारी आसानी से मिल पाएगी? आपका जवाब 'ना' है, तो ध्यान दें परिवार के लिए बड़ी मुसीबत छोड़ जाएंगे आप। दरअसल दुनिया भर में इसके लिए कानून बन रहे हैं, लेकिन भारत अब भी इन देशों की तुलना में पीछे है। साइबर एक्सपर्ट्स की राय और कंपनियों के नियमों पर आधारित patrika.com की इस खास पेशकश में संजना कुमार के साथ समझिए डिजिटल एस्टेट प्लानिंग कितनी जरूरी?
7 min read
Jul 31, 2026
Digital Estate Planing Law in India
Digital Estate Planing Law in India: जानें डिजिटल विरासत कितनी जरूरी? (AI Creative)

Digital Estate Planing Inheritance Law India: हम डिजिटल दुनिया में जीना शुरू कर चुके हैं। आपके ई मेल्स, आपकी गूगल लाइफ, आपकी इनकम का साधन आज यूट्यूब भी है। क्लाउड में रखे दस्तावेज और ऐसी ही कई डिजिटल संपत्तियां आज हर घर की विरासत हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि आज हमारी भौतिक संपत्ति की तरह ही डिजिटल संपत्ति भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो चुकी हैं, कि आपको सोचना होगा कि आपके बाद इस पर आपके किस उत्तराधिकारी कौन होगा? इस तर्क पर आज मुझे एक बीमा कंपनी की ये लाइन याद आ गई 'जीवन के साथ भी, जीवन के बाद भी।' लेकिन आज भी हम जीवन के बाद सबसे पहले भौतिक संपत्ति की ही चिंता कर रहे हैं.. हमारा घर, जमीन और बैंक खातों की विरासत किसकी होगी? क्या आपको नहीं लगता कि आपकी डिजिटल संपत्ति आपके बाद भी बनी रहना चाहिए। दरअसल दुनिया के कई देशों ने इन डिजिटल एसेट्स के उत्तराधिकार के लिए कानूनी व्यवस्था विकसित कर ली है, लेकिन भारत में आज भी ऐसा कोई स्पष्ट और समर्पित कानून नहीं है। वहीं इसे लेकर हम यूजर्स भी अभी तक उतने जागरूक नहीं हैं। नतीजा, डिजिटल अकाउंट और ऑनलाइन संपत्तियों के बारे में जानने और उन पर अपना अधिकार पाने के लिए परिवारों को कानूनी और तकनीकी दोनों तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। आइए सिर्फ एक केस से समझें डिजिटल एस्टेट प्लानिंग और विरासत की पूरी तस्वीर…

इस मामले से जानें, डिजिटल विरासत की प्लानिंग कितनी जरूरी?

Gandhinagar Gujarat case timeline: इस केस को ध्यान से पढ़ें और समझें आपकी डिजिटल एस्टेट कितनी कीमती? (AI Infographic): यह भारतीय अदालत में पहला डिजिटल विरासत केस था। एक परिवार में मुखिया की मौत के बाद पत्नी और बेटी को उत्तराधिकार के लिए लड़नी पड़ी थी कानूनी लड़ाई।
Digital Assets Historical Decision of Court in gandhinagar gujarat digital estate case: तब मामले में अदालत ने सुनाया था ऐतिहासिक फैसला। (AI Infographic)

जानिए दुनिया भर के देशों में डिजिटल वर्ल्ड में क्या हैं कानूनी नियम

अमेरिका : यहा ज्यादातर राज्यों में RUFADAA (Revised Uniform Fiduciary Access to Digital Assets Act) लागू है। इस कानून के तहत अदालत या अधिकृत उत्तराधिकारी को कुछ शर्तों के साथ डिजिटल अकाउंट तक पहुंचने की अनुमति दी आसानी से मिल जाती है।

फ्रांस : यह देश अपने नागरिकों को Digital Republic Act (2016) के तहत यह अधिकार देता है कि वे पहले से यह तय कर सकें कि उनके जाने के बाद उनके डिजिटल डेटा की जिम्मेदारी किसकी होगी?

जर्मनी : 2018 में जर्मनी की सर्वोच्च अदालत भी अक मामले में यह फैसला दे चुकी है कि डिजिटल अकाउंट भी अन्य संपत्ति की तरह विरासत का हिस्सा हैं।

यूरोपीय संघ (EU) : यूरोपीय संघ भी अपने GDPR सदस्य देशों (कुल 27 देशों) को मृत्यु के बाद डेटा प्रबंधन के लिए अपने नियम बनाने की अनुमति देता है।

भारत : अभी तक डिजिटल विरासत या डिजिटल एसेट्स के उत्तराधिकार पर इंडिया में कोई अलग और स्पष्ट कानून नहीं है।

क्या आप जानते हैं भारत में अभी क्या है कानूनी व्यवस्था?

  • IT Act, 2000 : भारत का यह कानून टेक्नोलॉजी से जुड़ा जरूर है, लेकिन यह केवल साइबर अपराध और डेटा सुरक्षा से जुड़ा कानून है। यह कानून मृत्यु के बाद डिजिटल अकाउंट किसे मिलेगा, इस बारे में कुछ नहीं कहता।
  • Indian Succession Act, 1925 : यह भारतीय कानून संपत्ति के उत्तराधिकार की व्यवस्था करता है। लेकिन इसमें डिजिटल असेट्स का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं मिलता।
  • Digital Personal Data Protection Act, 2023 : डिजिटल दुनिया का यह कानून व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और प्रोसेसिंग से जुड़ा कानून है। लेकिन डिजिटल असेट्स या उत्तराधिकार पर विस्तृत प्रावधान इसमें भी नहीं मिलता।
    • डिजिटल की दुनिया को लेकर हम दुनिया भर के कई देशों से पीछे रह गए हैं। क्योंकि इन भारतीय कानूनों में अभी अलग से Digital Assets Inheritance Law कहीं नहीं है।
    Digital Estate Safety Tips: AI Infographic

    ऐसे में सवाल उठता है कि भारत में डिजिटल असेट्स को मान्यता है भी या नहीं?

    दरअसल एक्सपर्ट्स बताते हैं कि भारत में अब तक डिजिटल विल या असेट्स नाम का अलग से कोई कानून ही नहीं है। लेकिन ऐसे मामलों को मान्यता जरूर मिली हुई है, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। यदि कोई व्यक्ति अपनी वैध वसीयत में Gmail, YouTube चैनल, डोमेन, डिजिटल वॉलेट, क्लाउड डेटा या अन्य डिजिटल संपत्तियों का उल्लेख करता है, तो उसे सामान्य उत्तराधिकार कानूनों के तहत देखा जा सकता है। लेकिन यहां भी परेशानी आती है, क्योंकि संबंधित प्लेटफॉर्म जैसे Google, Apple, Meta आदि की अपनी नीतियां भी लागू होती हैं। केवल पासवर्ड लिख देने से उत्तराधिकारी को डिजिटल संपत्तियों का स्वतः एक्सेस नहीं मिल जाता।

    जानिए आपके बाद किन वास्तविक परिस्थितियों में फंस सकता है आपका परिवार

    1. Gmail का पासवर्ड नहीं मिला तो आपके परिवार को आपके महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक ईमेल और पारिवारिक फोटो तक पहुंचने में मुश्किल हो सकती है।
    2. अगर आपका UPI ऑटो पे था, चलता रहेगा, उसे कौन डिएक्टिवेट करेगा। ऐसे में आपके नेटफ्लिक्स, बीमा, SIP जैसी अन्य ऑटो-डेबिट सेवाओं के लिए आपके खाते से पैसे तब तक कटते रहेंगे, जब तक बैंक या संबंधित सेवा को सूचना नही दी जाएगी।
    3. अगर आप यू ट्यूब चैनल से कमाई करने वाले थे, तो चैनल की आय स्वतः परिवार को नहीं मिलती। इसके लिए प्लेटफॉर्म की प्रक्रिया और कानूनी दस्तावेज पूरे करने पड़ सकते हैं।
    4. यदि क्लाउड स्टोरेज में जरूरी फाइलें थीं, बिजनिस, टैक्स, जमीन या परिवार के जरूरी रिकॉर्ड तो वे हमेशा के लिए inaccessible हो सकते हैं।
    5. क्रिप्टो या ऑनलाइन निवेश किया गया होगा, तब क्या होगा? ऐसे में यदि परिवार को जानकारी ही न हो कि निवेश कहां-कहां है, तो उनके लिए संपत्ति का दावा करना बेहद मुश्किल हो सकता है।
    Digital Estate Password Rules: AI Infographic

    भारत को अलग से कानून की जरूरत क्यों?

    • भारत में 80 करोड़ से ज्यादा इंटरनेट यूजर हैं।
    • अधिकांश परिवारों के पास कम से कम एक स्मार्टफोन है।
    • लाखों लोग YouTube, Instagram, Gaming, Freelancing जैसे अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से कमाई कर रहे हैं।
    • बैंकिंग, निवेश और दस्तावेज तेजी से डिजिटल हो रहे हैं।
    • अब मौजूदा कानून डिजिटल उत्तराधिकार पर स्पष्ट जवाब नहीं देते।
    • जबकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिजिटल संपत्तियों के उत्तराधिकार, डेटा एक्सेस और गोपनीयता के बीच संतुलन बनाने के लिए अलग कानूनी ढांचे की आवश्यकता है।
    biggest legal challenges in India: AI Infographic

    मौत के बाद कौन-सी कंपनी क्या सुविधा देती है?

    गूगल (Gmail, Drive, Photos, YouTube)

    अगर यूजर ने पहले से Inactive Account Manager सेट किया है, तो तय समय तक अकाउंट इस्तेमाल न होने पर चुने गए व्यक्ति को डेटा मिल सकता है या फिर अकाउंट अपने-आप डिलीट हो सकता है। अगर यह फीचर सेट नहीं है, तो परिवार दस्तावेजों के आधार पर विशेष अनुरोध कर सकता है, जिसकी Google अलग-अलग समीक्षा करता है। लेकिन गुगल का स्पष्ट कहना है कि पासवर्ड या लॉग इन एक्सेस नहीं दिया जाएगा।

    एप्पल (iPhone, iCloud)

    अगर यूजर ने पहले से Legacy Contact चुना है, तो वही व्यक्ति जरूरी दस्तावेज और एक्सेस की के जरिए डेटा तक पहुंच का अनुरोध कर सकता है। यदि Legacy Contact नहीं है, तो कई मामलों में कानूनी दस्तावेज या कोर्ट के आदेश की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन एप्पल के भी अपने सख्त नियम हैं कि कभी भी Apple ID का पासवर्ड शेयर नहीं किया जाएगा।

    मेटा (Facebook)

    Facebook अकाउंट को Memorial (स्मृति) अकाउंट में बदला जा सकता है। अगर Legacy Contact पहले से चुना गया है, तो वह प्रोफाइल से जुड़े कुछ सीमित काम कर सकता है। लेकिन पासवर्ड, निजी संदेश और लॉग-इन एक्सेस नहीं दिया जाता।

    इंस्टाग्राम

    Instagram भी अकाउंट को Memorialized Account में बदलने की सुविधा देता है। लेकिन लॉग-इन एक्सेस या पासवर्ड किसी को नहीं दिया जाता।

    X (पहले Twitter)

    X के लिए परिवार या अधिकृत व्यक्ति जरूरी दस्तावेज देकर अकाउंट हटाने का अनुरोध कर सकता है। लेकिन पासवर्ड या अकाउंट का लॉग-इन एक्सेस नहीं दिया जाता।

    Digital Companies Policies: AI Infographic

    क्या कहते हैं साइबर कानून एक्सपर्ट्स

    सुप्रीम कोर्ट के वकील और साइबर लॉ एक्सपर्ट डॉ. पवन दुग्गल के मुताबिक, ''हर दिन सैकड़ों गीगाबाइट डिजिटल डेटा हमेशा के लिए लॉक हो जाता है, वो भी इसलिए कि संबंधित मालिक की मौत हो चुकी होती है। इस मामले में कानून तकनीक से 10 कदम पीछे हैं। वे मानते हैं कि जैसे लोग अपनी चल और अचल संपत्ति की वसीयत बनाते हैं, वैसे ही लोगों को अपनी डिजिटल संपत्तियों की भी वसीयत बनानी चाहिए, फेसबुक अकाउंट, आईपेड जैसे अन्य डिजिटल एसेट भी उनकी संपत्ति ही है।

    ''पारंपरिक वसीयत संपत्ति और बौद्धिक संपदा को कवर करती है, लेकिन साइबर संपत्ति के मामले में अकाउंट और पासवर्ड का उल्लेख जरूरी है। वरना उत्तराधिकारियों के लिए उन्हें हासिल करना मुश्किल हो सकता है।''
    -सुहैल नाथानी, इकोनॉमिक लॉ प्रैक्टिस, पार्टनर

    एडवाया लीगल मैनेजिंग पार्टनर रमेश वैद्यनाथ के मुताबिक, ''किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद इलेक्ट्रॉनिक डाटा के स्वामित्व पर भारत में कोई संहिताबद्ध कानून नहीं है। ऐसे मामलों में उत्तराधिकार के सामान्य सिंद्धांत लागू होते हैं।''

    पूर्व प्रोडक्ट मैनेजर, एंड्रियास टुर्क ने भी गुगल इनएक्टिव अकाउंट मैनेजर की लॉन्चिंग के समय जानकारी दी थी कि, लोगों को अपने डिजिटल आफ्टरलाइफ की पहले से योजना बनाने का विकल्प मिलना चाहिए, ताकि उनकी गोपनीता को सुरक्षित रखा जा सके, जरूरत पड़ने पर भरोसेमंद लोगों को जरूरी जानकारी मिल सके।

    ''भारत में इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के और उत्तराधिकार कानूनों में डिजिटल वसीयत के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं। ऐसे में कानूनी वैधता पर यहां अब भी अनिश्चितता बनी हुई है।''
    -गुरप्रीत सिंह, अमरजीत एंड एसोशिएट्स मैनेजिंग

    एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यदि ताजा स्थिति की बात की जाए तो भारत में अदालतें अब डिजिटल डेटा को उत्तराधिकार कानूनों के तहत संपत्ति मानने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन इस विषय पर अलग और व्यापक कानून अब भी नहीं हैं।

    इस स्टोरी को पढ़कर आप समझ गए होंगे कि जिस तरह आप बैंक, बैलेंस और बीमा की वसीयत बनाते हैं, तो उसी तरह डिजिटल संपत्तियों की योजना बनाना भी अब बेहद जरूरी हो गया है। जब तक भारत में स्पष्ट कानून नहीं बन जाता, तब तक डिजिटल विरासत की सुरक्षा काफी हद तक आपकी पहले से तैयारी और संबंधित प्लेटफॉर्म की नीतियों पर ही निर्भर रहेगी। ये स्पेशल स्टोरी आपको कैसी लगी, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। हमारे साथ जुड़े रहने के लिए पढ़ते रहिए patrika.com.

    Updated on:
    31 Jul 2026 12:58 pm
    Published on:
    31 Jul 2026 12:58 pm