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आपके बाद परिवार की सबसे बड़ी परेशानी बैंक बैलेंस नहीं, आपका मोबाइल पासवर्ड होगा? जानिए क्यों?

Digital Estate Planing: एक दिन हम सब दुनिया से चले जाएंगे, लेकिन पीछे छूट जाएगी हमारी डिजिटल जिंदगी। क्या कभी आपने सोचा है, आपके बाद आपके ई मेल, सोशल मीडिया, यूपीआई और ऑनलाइन डॉक्यूमेंट्स का क्या होगा? आपकी ये डिजिटल विरासत किसे मिलेगी? patrika.com पर संजना कुमार के साथ पढ़िए क्यों आपकी मौत के बाद आपका मोबाइल पासवर्ड बन सकता है अपनों की सबसे बड़ी परेशानी?
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Jul 30, 2026
Digital Legacy
Digital Legacy: मरने के बाद व्यक्ति घर, जमीन, बैंक बैलेंस नहीं अब डिजिटल विरासत भी छोड़ता है। मौत के बाद इन पर किसका हक? (AI Creative)

Digital Estate Planing India: आज एक व्यक्ति की डिजिटल विरासत सिर्फ उसके मोबाइल तक सीमित नहीं है। Gmail, Google Drive, Google Photos, Apple i cloud, Facebook, Instagram, WhataApp और UPI ऐप्स में उसकी पर्सनल यादें ही नहीं रहतीं, बल्कि महत्वपूर्ण दस्तावेज, फायनेंशियल जानकारी और पूरी डिजिटल पहचान सुरक्षित रहती है। ऐसे में ये सवाल महज फर्ज करने के लिए नहीं हैं। बल्कि, डिजिटल युग में बेहद अहम हो चुके हैं। क्योंकि ये दस्तावेज नौकरी से जुड़े हो सकते हैं, मेडिकल रिकॉर्ड हो सकते हैं, टैक्स रिटर्न, बैंकिंग, बीमा, निवेश, निजी तस्वीरें हो सकती हैं। ऐसे में किसी व्यक्ति के मरने के बाद उसकी डिजिटल संपत्ति (Digital Assets) का क्या होगा? यह केवल तकनीक नहीं, बल्कि परिवार, कानून और गोपनीयता से जुड़ा बड़ा मुद्दा है।

घर, जमीन, बैंक बैलेंस के साथ डिजिटल पहचान भी है अब आपकी विरासत

पहले विरासत का मतलब जहां घर, जमीन, गहने और बैंक बैलेंस होता था। अब इसमें डिजिटल पहचान भी जुड़ गई है। यही कारण है कि दुनिया भर में डिजिटल लेगेसी (Digital Legacy) या डिजिटल विरासत की चर्चा तेजी से बढ़ रही है। कई देशों में इसके लिए नए कानूनी ढांचे विकसित किए जा रहे हैं। कुछ बड़ी टेक कंपनियां भी अपने उपयोगकर्ताओं को मृत्यु के बाद अकाउंट प्रबंधन से जुड़े विकल्प उपलब्ध कराने लगी हैं।

Digital Assets: AI Infographic

जानिए मौत के बाद सबसे पहले क्या बदलता है?

ज्यादातर लोगों को लगता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके मोबाइल या ईमेल का पासवर्ड जान लेने से सभी अकाउंट आसानी से खुल जाएंगे। ऐसा लगना जितना आसान है, हकीकत इससे कहीं ज्यादा कठिन है। यदि मोबाइल नंबर बंद हो जाएं या सिम डिएक्टिव हो जाए, तो OTP आधारित लॉगिन संभव नहीं रहता। कई सेवाएं दो-स्तरीय सुरक्षा (Two-Factor Authentication) का उपयोग करती हैं, जिसके कारण परिवार के सदस्य चाहकर भी अकाउंट तक नहीं पहुंच पाते। कई बार क्लाउड में रखे जरूरी दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड या पारिवारिक तस्वीरें वर्षों तक लॉक रह जाती हैं। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों ने मृत्यु के बाद अकाउंट प्रबंधन के लिए अलग-अलग नीतियां और सुविधाएं विकसित करनी शुरू की हैं। हालांकि, हर प्लेटफॉर्म के नियम अलग हैं और सभी मामलों में परिवार को स्वतः एक्सेस नहीं मिल पाता।

अब यह बड़ा सवाल है…

क्या Google, Facebook जैसी दूसरी बड़ी टेक कंपनियां परिवार को मृत व्यक्ति का डेटा सौंप देती हैं? क्या भारत में इसके लिए कोई स्पष्ट कानून है? और क्या कोई व्यक्ति पहले से तय कर सकता है कि उसकी मृत्यु के बाद उसके डिजिटल अकाउंट का क्या होगा? जानने के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ और पढ़ते रहिए patrika.com.

Updated on:
30 Jul 2026 04:47 pm
Published on:
30 Jul 2026 04:43 pm