Patrika Special News

Anti Dandruff Shampoo: मुंहासे हटाने के लिए एंटी-डैंड्रफ शैम्पू को फेशवॉश की तरह कर सकते हैं इस्तेमाल? डॉक्टर से जानिए इसका पूरा सच

Anti Dandruff Shampoo: एंटी-डैंड्रफ शैम्पू को फेसवॉश की तरह इस्तेमाल करना कितना सही है? चेहरे से कील, मुंहासे हटाने के लिए यह उपाय सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस बारे में डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. अनिता विजय से पत्रिका ने विस्तार से बातचीत की। अपनी बातचीत में उन्होंने कई आंखें खोलने वाली बातें बताई। आप भी पढ़िए।

10 min read
May 20, 2026
क्यों डॉक्टर अनिता विजय ने एंटी डैंड्ररफ शैम्पू को त्वचा के लिए खतरनाक बताया। (Photo : AI Generated)

Anti Dandruff Shampoo Facewash trend : इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस दौर में आए दिन ब्यूटी और स्किनकेयर को लेकर नए-नए दावे और हैक्स (Skincare Hacks) वायरल होते रहते हैं। इन दिनों इंस्टाग्राम रील्स, और यूट्यूब शॉट्स पर एक नया ट्रेंड वायरल हो रहा है, जिसमें इन्फ्लुएंसर्स यह दावा कर रहे हैं कि एंटी-डैंड्रफ शैम्पू को फेसवॉश (Anti-Dandruff Shampoo as facewash) की तरह इस्तेमाल करने से चेहरे के जिद्दी कील, मुंहासे और काले धब्बे रातों-रात गायब हो जाते हैं। चूंकि एंटी-डैंड्रफ शैम्पू बहुत आसानी से और कम कीमत में मिल जाता है, इसलिए लाखों लोग बिना सोचे-समझे इस हैक को अपनी त्वचा पर आजमा रहे हैं। लेकिन क्या यह वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित है? क्या वाकई सिर की रूसी साफ करने वाला शैम्पू आपके चेहरे को बेदाग बना सकता है? या फिर यह हैक आपकी त्वचा को हमेशा के लिए बर्बाद कर सकता है? आइए डर्मेटोलॉजी से विस्तार से समझते है?

वायरल दावे का सच: हां भी और ना भी!

इस दावे के पीछे का विज्ञान थोड़ा पेचीदा है। सीधे शब्दों में कहें तो यह हैक हर किसी के लिए काम नहीं करता। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके चेहरे पर होने वाले दानों का 'मूल कारण' (Root Cause) क्या है। मेडिकल सांइस के अनुसार, चेहरे पर होने वाले दाने मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं- सामान्य मुंहासे (Bacterial Acne ) और फंगस के कारण होने वाले दाने (Fungal Acne)।

एंटी-डैंड्रफ शैम्पू और फंगल एक्ने का कनेक्शन

यह समझने के लिए कि शैम्पू चेहरे पर कैसे काम करता है, हमें डैंड्रफ और फंगल एक्ने के संबंध को समझना होगा।

हमारे सिर में डैंड्रफ (रूसी) होने की मुख्य वजह 'मैलासेजिया' (Malassezia) नाम का एक फंगस (यिस्ट) होता है। एंटी-डैंड्रफ शैम्पू में इस फंगस को मारने के लिए शक्तिशाली एंटी-फंगल तत्व मिलाए जाते हैं, जैसे जिंक पाइरिथियोन (Zinc Pyrithione), केटोकोनाज़ोल (Ketoconazole) या सेलेनियम सल्फाइड (Selenium Sulfide)। दिलचस्प बात यह है कि यही 'मैलासेजिया' फंगस कभी-कभी हमारे चेहरे, छाती और पीठ के रोम छिद्रों में जाकर जमा हो जाता है, जिससे वहां छोटे-छोटे, लाल और दानेदार उभार आ जाते हैं। मेडिकल सांइस में इसे पिटायरोस्पोरम फॉलिकुलिटिस (Pityrosporum Folliculitis) या आम बोलचाल में 'फंगल एक्ने' कहा जाता है। चूंकि दोनों समस्याओं की जड़ एक ही फंगस है, इसलिए जब आप एंटी-डैंड्रफ शैम्पू को चेहरे पर लगाते हैं, तो उसमें मौजूद एंटी-फंगल तत्व चेहरे के फंगस को खत्म कर देते हैं और फंगल एक्ने ठीक होने लगता है। सोशल मीडिया पर जिन लोगों को इस हैक से फायदा हुआ है, वे असल में फंगल एक्ने से पीड़ित थे।

सामान्य पिंपल्स (Bacterial Acne) पर क्यों फेल है यह हैक?

यदि आपके चेहरे पर होने वाले सामान्य पिंपल्स हैं, जो अत्यधिक तेल (Sebum), मृत त्वचा कोशिकाओं (Dead Skin Cells) और कटिबैक्टीरियम एक्नेस (C. acnes) नामक बैक्टीरिया के कारण होते हैं, तो एंटी-डैंड्रफ शैम्पू आपकी कोई मदद नहीं कर सकता। शैम्पू में मौजूद एंटी-फंगल तत्व बैक्टीरिया पर कोई असर नहीं करते। इसके विपरीत, शैम्पू में पाए जाने वाले हैवी क्लींजिंग एजेंट्स (जैसे Sulfates) त्वचा के प्राकृतिक तेल को पूरी तरह सोख लेते हैं। जब त्वचा अत्यधिक सूखी (Dry) हो जाती है, तो हमारा ब्रेन ऑयल ग्लैंड्स को और अधिक तेल बनाने का संदेश भेजता है। नतीजा यह होता है कि चेहरा पहले से ज्यादा ऑयली हो जाता है और सामान्य पिंपल्स की समस्या दोगुनी तेजी से बढ़ जाती है।

डार्क स्पॉट्स (काले धब्बे) का दावा

सोशल मी़डिया पर यह भी दावा किया जा रहा है कि इससे डार्क स्पॉट्स और पिगमेंटेशन भी दूर हो जाते हैं। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, यह दावा पूरी तरह से गलत और भ्रामक है। डार्क स्पॉट्स तब बनते हैं जब त्वचा में 'मेलानिन' (Melanin) का उत्पादन बढ़ जाता है। इसे ठीक करने के लिए त्वचा को ऐसे एक्टिव इंग्रीडिएंट्स की जरूरत होती है जो सेल टर्नओवर को बढ़ाएं या मेलानिन को रोकें (जैसे विटामिन सी, नियासिनामाइड, कोजिक एसिड या रेटिनॉल)। एंटी-डैंड्रफ शैम्पू में ऐसा कोई भी तत्व नहीं होता जो हाइपरपिगमेंटेशन या काले धब्बों को हल्का कर सके। बल्कि, शैम्पू से होने वाले रूखेपन के कारण त्वचा संवेदनशील हो सकती है, जिससे काले धब्बे और गहरे दिखाई दे सकते हैं।

चेहरे पर सीधे शैम्पू लगाने के गंभीर नुकसान

भले ही यह शॉर्टकट आपको लुभावना लगे, लेकिन स्कैल्प (सिर की त्वचा) और चेहरे की त्वचा की बनावट में जमीन-आसमान का फर्क होता है। सिर की त्वचा मोटी होती है और वह कड़े केमिकल्स को सहन कर सकती है, जबकि चेहरे की त्वचा बेहद पतली और संवेदनशील होती है। चेहरे पर शैम्पू का इस्तेमाल करने से निम्नलिखित गंभीर समस्याएं हो सकती हैं:

  • स्किन बैरियर (Skin Barrier) का डैमेज होना : हमारी त्वचा के ऊपर एक सुरक्षात्मक परत होती है जिसे स्किन बैरियर कहते हैं। शैम्पू में झाग बनाने के लिए 'सोडियम लॉरिल सल्फेट' (SLS) जैसे कड़े सर्फेक्टेंट्स का इस्तेमाल किया जाता है। यह चेहरे के इस सुरक्षा कवच को तोड़ देता है, जिससे त्वचा पर्यावरण के प्रदूषण और बैक्टीरिया के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाती है।
  • कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस और रेडनेस : शैम्पू में खुशबू (Fragrance) और प्रिजर्वेटिव्स की मात्रा बहुत अधिक होती है। जब इन्हें चेहरे पर लगाया जाता है, तो चेहरे पर लाल चकत्ते, खुजली, जलन और सूजन आ सकती है, जिसे मेडिकल टर्म में कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस (Contact Dermatitis) कहा जाता है।
  • समय से पहले बुढ़ापा (Premature Aging) : लगातार शैम्पू के इस्तेमाल से त्वचा की नमी पूरी तरह खत्म हो जाती है। अत्यधिक ड्राई स्किन पर बारीक रेखाएं (Fine Lines) और झुर्रियां (Wrinkles) बहुत जल्दी उभरने लगती हैं, जिससे आपकी उम्र वास्तविक उम्र से बड़ी दिखने लगती है।
  • आंखों के लिए खतरनाक : फेसवॉश करते समय शैम्पू का आंखों में जाना स्वाभाविक है। शैम्पू में मौजूद केमिकल्स आंखों की नाजुक झिल्ली को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे आंखों में गंभीर जलन, लालिमा और पानी आने की समस्या हो सकती है।

How to Safe Use : अगर आजमाना ही है, तो क्या है सुरक्षित तरीका?

अगर आपने डॉक्टर से परामर्श कर लिया है और यह सुनिश्चित है कि आपको फंगल एक्ने ही है, और आप डॉक्टर की बताई दवाओं की जगह इस घरेलू हैक को ही आजमाना चाहते हैं, तो आपको बेहद सावधानी बरतनी होगी। इसका सही और सुरक्षित तरीका नीचे दिया गया है।

  • पैच टेस्ट अनिवार्य है: चेहरे पर लगाने से पहले शैम्पू की एक बूंद अपनी कोहनी या कान के पीछे लगाकर 24 घंटे देखें। अगर जलन या लालिमा न हो, तभी आगे बढ़ें।
  • त्वचा को गीला करें: चेहरे को सादे पानी से गीला करें और शैम्पू की बहुत कम मात्रा (मटर के दाने के बराबर) लें।
  • समय का ध्यान रखें: इसे चेहरे पर लगाकर रगड़ना नहीं है। केवल प्रभावित हिस्से पर हल्के हाथ से लगाएं और 30 सेकंड से 1 मिनट के भीतर धो लें। इसे चेहरे पर फेसमास्क की तरह छोड़ना त्वचा को जला सकता है।
  • हफ्ते में सिर्फ दो बार: इसका इस्तेमाल रोजाना फेसवॉश की तरह सुबह-शाम बिल्कुल न करें। हफ्ते में अधिकतम 2 बार ही इसका प्रयोग करें।
  • मॉइस्चराइजर की डबल डोज: शैम्पू धोने के तुरंत बाद एक बेहतरीन हाइड्रेटिंग, नॉन-कॉमेडोजेनिक (जो पोर्स ब्लॉक न करे) मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं ताकि स्किन का बैरियर डैमेज न हो।

डर्मेटोलॉजिस्ट द्वारा अनुशंसित सही और सुरक्षित विकल्प

डर्मेटोलॉजिस्ट का मानना है कि जब बाजार में हर तरह की त्वचा और समस्या के लिए विशेष रूप से तैयार (Formulated) प्रोडक्ट्स मौजूद हैं, तो बालों के प्रोडक्ट को चेहरे पर लगाने का जोखिम क्यों उठाना? अपनी त्वचा की समस्याओं के लिए हमेशा सही सामग्री (Ingredients) चुनें।

  • सामान्य पिंपल्स और ऑयली स्किन के लिए: सैलिसिलिक एसिड (Salicylic Acid): यह एक BHA (बीटा हाइड्रॉक्सी एसिड) है जो त्वचा के भीतर जाकर पोर्स की गहराई से सफाई करता है और अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करता है।
  • बेंज़ोइल पेरोक्साइड (Benzoyl Peroxide): यह पिंपल्स पैदा करने वाले बैक्टीरिया को सीधे खत्म करता है।
  • फंगल एक्ने के इलाज के लिए सुरक्षित विकल्प: यदि आपको फंगल एक्ने है, तो डैंड्रफ शैम्पू के बजाय मेडिकल स्टोर पर मिलने वाला केटोकोनाज़ोल क्लींजर (Ketoconazole Cleanser) या सल्फर-बेस्ड सोप/फेसवॉश का उपयोग करें। ये विशेष रूप से त्वचा के लिए ही बनाए जाते हैं और इनमें चेहरे को नुकसान पहुंचाने वाले कड़े सर्फेक्टेंट्स नहीं होते।

डॉ. अनिता विजय के साथ पत्रिका की बातचीत

सोशल मीडिया पर एंटी-डैंड्रफ शैम्पू को फेसवॉश की तरह इस्तेमाल करने का ट्रेंड बहुत वायरल है। आप इस हैक को किस तरह देखते हैं?

एक डॉक्टर के तौर पर, मैं इस ट्रेंड को बेहद असुरक्षित मानती हूं। सोशल मीडिया पर दिखने वाले ये 30 सेकंड के वीडियो पूरी सच्चाई नहीं बताते। स्कैल्प (सिर की त्वचा) और चेहरे की त्वचा की बनावट, संवेदनशीलता और pH लेवल में जमीन-आसमान का फर्क होता है। शैम्पू में मौजूद कड़े केमिकल्स और सल्फेट्स सिर की सख्त त्वचा के लिए ठीक हो सकते हैं, लेकिन चेहरे पर लगाने से ये त्वचा के प्राकृतिक तेल (Sebum) को पूरी तरह छीन लेते हैं। इससे स्किन बैरियर टूट जाता है, जिससे चेहरे पर जलन, गंभीर सूखापन, समय से पहले झुर्रियां और इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। त्वचा के साथ ऐसे एक्सपेरिमेंट से बचना चाहिए।

क्या एंटी-डैंड्रफ शैम्पू में मौजूद तत्व (जैसे Zinc Pyrithione या Ketoconazole) वाकई चेहरे की त्वचा पर सुरक्षित रूप से काम कर सकते हैं?

ये तत्व चेहरे पर तभी सुरक्षित और प्रभावी हैं जब इन्हें विशेष रूप से त्वचा के लिए बने प्रोडक्ट्स (जैसे मेडिकेटेड क्लींजर या क्रीम) के जरिए लगाया जाए, न कि शैम्पू के रूप में। वैज्ञानिक रूप से, केटोकोनाज़ोल (Ketoconazole) और जिंक पाइरिथियोन (Zinc Pyrithione) बेहतरीन एंटी-फंगल तत्व हैं। ये चेहरे पर होने वाले फंगल एक्ने (Pittosporum Folliculitis) को खत्म करने की क्षमता रखते हैं। लेकिन जब ये तत्व एंटी-डैंड्रफ शैम्पू में होते हैं, तो उनके साथ भारी मात्रा में कड़े सर्फेक्टेंट्स (Surfactants), प्रिजर्वेटिव्स और तेज खुशबू (Fragrance) भी मिली होती है। यह पूरा फॉर्मूलेशन चेहरे की नाजुक त्वचा के लिए बहुत कठोर (Harsh) होता है, जो फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।

कई इन्फ्लुएंसर्स दावा कर रहे हैं कि इससे डार्क स्पॉट्स (काले धब्बे) भी ठीक हो जाते हैं। क्या इस दावे में कोई वैज्ञानिक सच्चाई है?

इस दावे में बिलकुल भी वैज्ञानिक सच्चाई नहीं है, यह पूरी तरह से एक मिथक (Myth) है। एंटी-डैंड्रफ शैम्पू का काम सिर्फ फंगस को खत्म करना है। डार्क स्पॉट्स या पिगमेंटेशन तब होते हैं जब त्वचा में 'मेलानिन' का उत्पादन बढ़ जाता है। इसे ठीक करने के लिए सैलिसिलिक एसिड, विटामिन सी, कोजिक एसिड या नियासिनामाइड जैसे एक्टिव्स की जरूरत होती है, जो मेलानिन को रोकते हैं या सेल टर्नओवर बढ़ाते हैं। शैम्पू में ऐसा कोई तत्व नहीं होता। बल्कि, शैम्पू से होने वाले अत्यधिक रूखेपन के कारण त्वचा संवेदनशील हो जाती है, जिससे काले धब्बे हल्के होने के बजाय और ज्यादा गहरे दिखाई दे सकते हैं।

स्कैल्प (सिर की त्वचा) और चेहरे की त्वचा का pH लेवल और मोटाई अलग होती है, तो सिर का प्रोडक्ट चेहरे पर लगाने से लॉन्ग टर्म में क्या नुकसान हो सकते हैं?

लॉन्ग टर्म में इसके गंभीर नुकसान हो सकते हैं। स्कैल्प की त्वचा मोटी होती है और उसका pH चेहरे से अलग होता है। चेहरे पर लगातार एंटी-डैंड्रफ शैम्पू लगाने से त्वचा का सुरक्षात्मक एसिड मैंटल (Acid Mantle) नष्ट हो जाता है। लंबे समय में इससे क्रोनिक स्किन डिहाइड्रेशन (त्वचा का परमानेंट सूखापन) हो सकता है, जिससे समय से पहले महीन रेखाएं और झुर्रियां (Premature Aging) उभरने लगती हैं। इसके अलावा, स्किन बैरियर पूरी तरह डैमेज होने के कारण त्वचा अत्यधिक संवेदनशील (Hypersensitive) हो जाती है, जिससे भविष्य में सामान्य स्किनकेयर प्रोडक्ट्स या धूप के संपर्क में आते ही चेहरे पर परमानेंट रेडनेस, सूजन और 'कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस' जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

यह हैक किन लोगों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है?

यह हैक उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है जिनकी त्वचा पहले से ही संवेदनशील या किसी समस्या से जूझ रही है:

  • एक्जिमा (Eczema) और सोरायसिस के मरीज: शैम्पू के कड़े केमिकल्स इनकी त्वचा को बुरी तरह छील सकते हैं, जिससे फ्लेयर्स और घाव बढ़ सकते हैं।
  • ड्राई और सेंसिटिव स्किन वाले लोग: इनकी त्वचा का नेचुरल बैरियर पहले से ही कमजोर होता है। शैम्पू लगाते ही इन्हें गंभीर जलन, रेडनेस और पीलिंग (त्वचा का निकलना) हो सकती है।
  • रोसैसिया (Rosacea) के मरीज: रोसैसिया में चेहरा पहले से ही लाल रहता है, शैम्पू की तेज खुशबू और सर्फेक्टेंट्स इसे और ज्यादा भड़का (Trigger) सकते हैं। इन लोगों को इस हैक से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।

अगर कोई व्यक्ति इस शैम्पू का चेहरे पर रोजाना इस्तेमाल करने लगे, तो उसका 'स्किन बैरियर' (Skin Barrier) कितने समय में और कैसे डैमेज हो सकता है?

अगर कोई व्यक्ति इस शैम्पू का चेहरे पर रोजाना इस्तेमाल करने लगे, तो उसका स्किन बैरियर मात्र 1 से 2 हफ्ते के भीतर ही बुरी तरह डैमेज हो सकता है। यह डैमेज बहुत तेजी से होता है क्योंकि शैम्पू में मौजूद 'सोडियम लॉरिल सल्फेट' (SLS) जैसे कड़े सर्फेक्टेंट्स चेहरे की ऊपरी परत में मौजूद नेचुरल लिपिड्स (वसा) और सिरेमाइड्स को पूरी तरह धो डालते हैं। यह लिपिड परत ही त्वचा की नमी को बांधकर रखती है। इसके हटते ही त्वचा की सुरक्षा दीवार टूट जाती है, जिससे त्वचा के अंदर का पानी तेजी से उड़ने लगता है (जिसे TEWL कहते हैं)। इसे चेहरे पर अत्यधिक सूखापन, पपड़ी जमना, खुजली और ब्रेकआउट्स शुरू हो जाते हैं।

लोग अक्सर यह अंतर नहीं कर पाते कि उन्हें फंगल एक्ने है या बैक्टीरियल (सामान्य) पिंपल्स। एक मरीज घर पर बैठकर इन दोनों में कैसे फर्क पहचान सकता है?

घर पर बैठकर दोनों में अंतर पहचानने के लिए इन तीन मुख्य बातों पर ध्यान दें:

  • खुजली और जलन: फंगल एक्ने में बहुत तेज और लगातार खुजली होती है, जबकि सामान्य (बैक्टीरियल) पिंपल्स में खुजली नहीं होती, बल्कि छूने पर दर्द या सूजन महसूस होती है।
  • दिखावट (Appearance): फंगल एक्ने के दाने आकार में बहुत छोटे, लाल और बिल्कुल एक जैसे (Uniform) दिखते हैं, जो अक्सर गुच्छों में होते हैं। वहीं, सामान्य पिंपल्स छोटे-बड़े आकार के होते हैं, जिनमें ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स या मवाद (Pus) भरा होता है।
  • जगह: फंगल एक्ने ज्यादातर माथे, हेयरलाइन, छाती और पीठ पर होते हैं, जबकि सामान्य पिंपल्स पूरे चेहरे (गाल, ठुड्डी) पर कहीं भी हो सकते हैं।

क्या फंगल एक्ने के इलाज के लिए सीधे एंटी-डैंड्रफ शैम्पू का इस्तेमाल करना सही है, या इसके लिए विशेष रूप से बने त्वचा के क्लींजर बाजार में मौजूद हैं?

नहीं, फंगल एक्ने के लिए सीधे एंटी-डैंड्रफ शैम्पू का इस्तेमाल करना बिल्कुल सही नहीं है। भले ही दोनों का कारण एक ही फंगस हो, लेकिन शैम्पू का पूरा फॉर्मूलेशन चेहरे के लिए बहुत कठोर (Harsh) होता है। बाजार में विशेष रूप से त्वचा के लिए बने कई सुरक्षित क्लींजर और सोप मौजूद हैं। फंगल एक्ने के इलाज के लिए डर्मेटोलॉजिस्ट अक्सर केटोकोनाज़ोल क्लींजर (Ketoconazole Cleanser), सल्फर-बेस्ड फेसवॉश (Sulfur-based facewash) या जिंक पाइरिथियोन सोप की सलाह देते हैं। ये प्रोडक्ट्स चेहरे की संवेदनशीलता और pH लेवल को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं, जो बिना स्किन बैरियर को नुकसान पहुंचाए फंगस को सुरक्षित तरीके से खत्म करते हैं।

अगर किसी ने सोशल मीडिया देखकर यह हैक आजमाया और उसके चेहरे पर लालिमा, जलन या 'कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस' (Contact Dermatitis) हो गया, तो उसे तुरंत क्या प्राथमिक उपचार (First Aid) करना चाहिए?

  • चेहरे कोतुरंत धोएं और बंद करें: चेहरे को तुरंत ठंडे या सादे पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि केमिकल्स निकल जाएं। शैम्पू या किसी भी अन्य एक्टिव स्किनकेयर प्रोडक्ट का इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें।
  • बर्फ या कोल्ड कंप्रेस: जलन और सूजन को शांत करने के लिए साफ कपड़े में बर्फ लपेटकर चेहरे की सिकाई करें।
  • सिरेमाइड मॉइस्चराइजर और एलोवेरा: चेहरे पर खुशबू-रहित (Fragrance-free) सिरेमाइड मॉइस्चराइजर या शुद्ध एलोवेरा जेल लगाएं, जो स्किन बैरियर को रिपेयर करे।
  • धूप से बचें: ठीक होने तक धूप में बिल्कुल न निकलें और सनस्क्रीन जरूर लगाएं। आराम न मिलने पर तुरंत डर्मेटोलॉजिस्ट से मिलें।

सामान्य पिंपल्स और डार्क स्पॉट्स के लिए ऐसे कौन से सुरक्षित एक्टिव इंग्रीडिएंट्स (जैसे Salicylic acid, Niacinamide आदि) हैं, जिन्हें शैम्पू के बजाय प्राथमिकता दी जानी चाहिए?

  • सामान्य पिंपल्स (Acne) के लिए: सैलिसिलिक एसिड (Salicylic Acid) सबसे बेहतरीन है, यह एक BHA है जो पोर्स के अंदर जाकर अतिरिक्त तेल और गंदगी को साफ करता है। इसके अलावा, बेंज़ोइल पेरोक्साइड (Benzoyl Peroxide) पिंपल्स पैदा करने वाले बैक्टीरिया को सीधे खत्म करता है।
  • डार्क स्पॉट्स (Dark Spots) के लिए: नियासिनामाइड (Niacinamide) त्वचा के दाग-धब्बों को हल्का करता है और स्किन बैरियर मजबूत करता है। इसके साथ ही, विटामिन सी (Vitamin C) और अल्फा अर्बुटिन (Alpha Arbutin) मेलेनिन के उत्पादन को कम करके त्वचा की रंगत को साफ और बेदाग बनाते हैं।

अगर किसी को मजबूरी में या डॉक्टर की सलाह पर ही एंटी-फंगल शैम्पू चेहरे पर लगाना पड़े, तो उसका सबसे सुरक्षित तरीका (Application method) क्या होना चाहिए?

यदि डॉक्टर की सलाह पर एंटी-फंगल शैम्पू चेहरे पर लगाना ही पड़े, तो सुरक्षा के लिए इन नियमों का पालन करें:

  • चेहरा गीला करें: सबसे पहले चेहरे को सादे पानी से गीला कर लें। सूखे चेहरे पर सीधे शैम्पू कभी न लगाएं।
  • कम मात्रा: मटर के दाने के बराबर (Pea-sized) शैम्पू लें और केवल प्रभावित हिस्से (जैसे माथा या हेयरलाइन) पर ही हल्के हाथों से लगाएं। पूरे चेहरे पर इसे फेसवॉश की तरह न रगड़ें।
  • शॉर्ट कॉन्टैक्ट थेरेपी: इसे चेहरे पर 30 से 60 सेकंड से ज्यादा न छोड़ें। इसके बाद ठंडे पानी से अच्छी तरह धो लें।
  • हैवी मॉइस्चराइजर: त्वचा को ड्राई होने से बचाने के लिए तुरंत बाद एक अच्छा फ्रेग्रेंस-फ्री, हाइड्रेटिंग मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं। सप्ताह में इसे 2 से अधिक बार इस्तेमाल न करें।
Also Read
View All