Anti Dandruff Shampoo: एंटी-डैंड्रफ शैम्पू को फेसवॉश की तरह इस्तेमाल करना कितना सही है? चेहरे से कील, मुंहासे हटाने के लिए यह उपाय सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस बारे में डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. अनिता विजय से पत्रिका ने विस्तार से बातचीत की। अपनी बातचीत में उन्होंने कई आंखें खोलने वाली बातें बताई। आप भी पढ़िए।
Anti Dandruff Shampoo Facewash trend : इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस दौर में आए दिन ब्यूटी और स्किनकेयर को लेकर नए-नए दावे और हैक्स (Skincare Hacks) वायरल होते रहते हैं। इन दिनों इंस्टाग्राम रील्स, और यूट्यूब शॉट्स पर एक नया ट्रेंड वायरल हो रहा है, जिसमें इन्फ्लुएंसर्स यह दावा कर रहे हैं कि एंटी-डैंड्रफ शैम्पू को फेसवॉश (Anti-Dandruff Shampoo as facewash) की तरह इस्तेमाल करने से चेहरे के जिद्दी कील, मुंहासे और काले धब्बे रातों-रात गायब हो जाते हैं। चूंकि एंटी-डैंड्रफ शैम्पू बहुत आसानी से और कम कीमत में मिल जाता है, इसलिए लाखों लोग बिना सोचे-समझे इस हैक को अपनी त्वचा पर आजमा रहे हैं। लेकिन क्या यह वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित है? क्या वाकई सिर की रूसी साफ करने वाला शैम्पू आपके चेहरे को बेदाग बना सकता है? या फिर यह हैक आपकी त्वचा को हमेशा के लिए बर्बाद कर सकता है? आइए डर्मेटोलॉजी से विस्तार से समझते है?
इस दावे के पीछे का विज्ञान थोड़ा पेचीदा है। सीधे शब्दों में कहें तो यह हैक हर किसी के लिए काम नहीं करता। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके चेहरे पर होने वाले दानों का 'मूल कारण' (Root Cause) क्या है। मेडिकल सांइस के अनुसार, चेहरे पर होने वाले दाने मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं- सामान्य मुंहासे (Bacterial Acne ) और फंगस के कारण होने वाले दाने (Fungal Acne)।
यह समझने के लिए कि शैम्पू चेहरे पर कैसे काम करता है, हमें डैंड्रफ और फंगल एक्ने के संबंध को समझना होगा।
हमारे सिर में डैंड्रफ (रूसी) होने की मुख्य वजह 'मैलासेजिया' (Malassezia) नाम का एक फंगस (यिस्ट) होता है। एंटी-डैंड्रफ शैम्पू में इस फंगस को मारने के लिए शक्तिशाली एंटी-फंगल तत्व मिलाए जाते हैं, जैसे जिंक पाइरिथियोन (Zinc Pyrithione), केटोकोनाज़ोल (Ketoconazole) या सेलेनियम सल्फाइड (Selenium Sulfide)। दिलचस्प बात यह है कि यही 'मैलासेजिया' फंगस कभी-कभी हमारे चेहरे, छाती और पीठ के रोम छिद्रों में जाकर जमा हो जाता है, जिससे वहां छोटे-छोटे, लाल और दानेदार उभार आ जाते हैं। मेडिकल सांइस में इसे पिटायरोस्पोरम फॉलिकुलिटिस (Pityrosporum Folliculitis) या आम बोलचाल में 'फंगल एक्ने' कहा जाता है। चूंकि दोनों समस्याओं की जड़ एक ही फंगस है, इसलिए जब आप एंटी-डैंड्रफ शैम्पू को चेहरे पर लगाते हैं, तो उसमें मौजूद एंटी-फंगल तत्व चेहरे के फंगस को खत्म कर देते हैं और फंगल एक्ने ठीक होने लगता है। सोशल मीडिया पर जिन लोगों को इस हैक से फायदा हुआ है, वे असल में फंगल एक्ने से पीड़ित थे।
यदि आपके चेहरे पर होने वाले सामान्य पिंपल्स हैं, जो अत्यधिक तेल (Sebum), मृत त्वचा कोशिकाओं (Dead Skin Cells) और कटिबैक्टीरियम एक्नेस (C. acnes) नामक बैक्टीरिया के कारण होते हैं, तो एंटी-डैंड्रफ शैम्पू आपकी कोई मदद नहीं कर सकता। शैम्पू में मौजूद एंटी-फंगल तत्व बैक्टीरिया पर कोई असर नहीं करते। इसके विपरीत, शैम्पू में पाए जाने वाले हैवी क्लींजिंग एजेंट्स (जैसे Sulfates) त्वचा के प्राकृतिक तेल को पूरी तरह सोख लेते हैं। जब त्वचा अत्यधिक सूखी (Dry) हो जाती है, तो हमारा ब्रेन ऑयल ग्लैंड्स को और अधिक तेल बनाने का संदेश भेजता है। नतीजा यह होता है कि चेहरा पहले से ज्यादा ऑयली हो जाता है और सामान्य पिंपल्स की समस्या दोगुनी तेजी से बढ़ जाती है।
सोशल मी़डिया पर यह भी दावा किया जा रहा है कि इससे डार्क स्पॉट्स और पिगमेंटेशन भी दूर हो जाते हैं। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, यह दावा पूरी तरह से गलत और भ्रामक है। डार्क स्पॉट्स तब बनते हैं जब त्वचा में 'मेलानिन' (Melanin) का उत्पादन बढ़ जाता है। इसे ठीक करने के लिए त्वचा को ऐसे एक्टिव इंग्रीडिएंट्स की जरूरत होती है जो सेल टर्नओवर को बढ़ाएं या मेलानिन को रोकें (जैसे विटामिन सी, नियासिनामाइड, कोजिक एसिड या रेटिनॉल)। एंटी-डैंड्रफ शैम्पू में ऐसा कोई भी तत्व नहीं होता जो हाइपरपिगमेंटेशन या काले धब्बों को हल्का कर सके। बल्कि, शैम्पू से होने वाले रूखेपन के कारण त्वचा संवेदनशील हो सकती है, जिससे काले धब्बे और गहरे दिखाई दे सकते हैं।
भले ही यह शॉर्टकट आपको लुभावना लगे, लेकिन स्कैल्प (सिर की त्वचा) और चेहरे की त्वचा की बनावट में जमीन-आसमान का फर्क होता है। सिर की त्वचा मोटी होती है और वह कड़े केमिकल्स को सहन कर सकती है, जबकि चेहरे की त्वचा बेहद पतली और संवेदनशील होती है। चेहरे पर शैम्पू का इस्तेमाल करने से निम्नलिखित गंभीर समस्याएं हो सकती हैं:
अगर आपने डॉक्टर से परामर्श कर लिया है और यह सुनिश्चित है कि आपको फंगल एक्ने ही है, और आप डॉक्टर की बताई दवाओं की जगह इस घरेलू हैक को ही आजमाना चाहते हैं, तो आपको बेहद सावधानी बरतनी होगी। इसका सही और सुरक्षित तरीका नीचे दिया गया है।
डर्मेटोलॉजिस्ट का मानना है कि जब बाजार में हर तरह की त्वचा और समस्या के लिए विशेष रूप से तैयार (Formulated) प्रोडक्ट्स मौजूद हैं, तो बालों के प्रोडक्ट को चेहरे पर लगाने का जोखिम क्यों उठाना? अपनी त्वचा की समस्याओं के लिए हमेशा सही सामग्री (Ingredients) चुनें।
सोशल मीडिया पर एंटी-डैंड्रफ शैम्पू को फेसवॉश की तरह इस्तेमाल करने का ट्रेंड बहुत वायरल है। आप इस हैक को किस तरह देखते हैं?
एक डॉक्टर के तौर पर, मैं इस ट्रेंड को बेहद असुरक्षित मानती हूं। सोशल मीडिया पर दिखने वाले ये 30 सेकंड के वीडियो पूरी सच्चाई नहीं बताते। स्कैल्प (सिर की त्वचा) और चेहरे की त्वचा की बनावट, संवेदनशीलता और pH लेवल में जमीन-आसमान का फर्क होता है। शैम्पू में मौजूद कड़े केमिकल्स और सल्फेट्स सिर की सख्त त्वचा के लिए ठीक हो सकते हैं, लेकिन चेहरे पर लगाने से ये त्वचा के प्राकृतिक तेल (Sebum) को पूरी तरह छीन लेते हैं। इससे स्किन बैरियर टूट जाता है, जिससे चेहरे पर जलन, गंभीर सूखापन, समय से पहले झुर्रियां और इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। त्वचा के साथ ऐसे एक्सपेरिमेंट से बचना चाहिए।
क्या एंटी-डैंड्रफ शैम्पू में मौजूद तत्व (जैसे Zinc Pyrithione या Ketoconazole) वाकई चेहरे की त्वचा पर सुरक्षित रूप से काम कर सकते हैं?
ये तत्व चेहरे पर तभी सुरक्षित और प्रभावी हैं जब इन्हें विशेष रूप से त्वचा के लिए बने प्रोडक्ट्स (जैसे मेडिकेटेड क्लींजर या क्रीम) के जरिए लगाया जाए, न कि शैम्पू के रूप में। वैज्ञानिक रूप से, केटोकोनाज़ोल (Ketoconazole) और जिंक पाइरिथियोन (Zinc Pyrithione) बेहतरीन एंटी-फंगल तत्व हैं। ये चेहरे पर होने वाले फंगल एक्ने (Pittosporum Folliculitis) को खत्म करने की क्षमता रखते हैं। लेकिन जब ये तत्व एंटी-डैंड्रफ शैम्पू में होते हैं, तो उनके साथ भारी मात्रा में कड़े सर्फेक्टेंट्स (Surfactants), प्रिजर्वेटिव्स और तेज खुशबू (Fragrance) भी मिली होती है। यह पूरा फॉर्मूलेशन चेहरे की नाजुक त्वचा के लिए बहुत कठोर (Harsh) होता है, जो फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।
कई इन्फ्लुएंसर्स दावा कर रहे हैं कि इससे डार्क स्पॉट्स (काले धब्बे) भी ठीक हो जाते हैं। क्या इस दावे में कोई वैज्ञानिक सच्चाई है?
इस दावे में बिलकुल भी वैज्ञानिक सच्चाई नहीं है, यह पूरी तरह से एक मिथक (Myth) है। एंटी-डैंड्रफ शैम्पू का काम सिर्फ फंगस को खत्म करना है। डार्क स्पॉट्स या पिगमेंटेशन तब होते हैं जब त्वचा में 'मेलानिन' का उत्पादन बढ़ जाता है। इसे ठीक करने के लिए सैलिसिलिक एसिड, विटामिन सी, कोजिक एसिड या नियासिनामाइड जैसे एक्टिव्स की जरूरत होती है, जो मेलानिन को रोकते हैं या सेल टर्नओवर बढ़ाते हैं। शैम्पू में ऐसा कोई तत्व नहीं होता। बल्कि, शैम्पू से होने वाले अत्यधिक रूखेपन के कारण त्वचा संवेदनशील हो जाती है, जिससे काले धब्बे हल्के होने के बजाय और ज्यादा गहरे दिखाई दे सकते हैं।
स्कैल्प (सिर की त्वचा) और चेहरे की त्वचा का pH लेवल और मोटाई अलग होती है, तो सिर का प्रोडक्ट चेहरे पर लगाने से लॉन्ग टर्म में क्या नुकसान हो सकते हैं?
लॉन्ग टर्म में इसके गंभीर नुकसान हो सकते हैं। स्कैल्प की त्वचा मोटी होती है और उसका pH चेहरे से अलग होता है। चेहरे पर लगातार एंटी-डैंड्रफ शैम्पू लगाने से त्वचा का सुरक्षात्मक एसिड मैंटल (Acid Mantle) नष्ट हो जाता है। लंबे समय में इससे क्रोनिक स्किन डिहाइड्रेशन (त्वचा का परमानेंट सूखापन) हो सकता है, जिससे समय से पहले महीन रेखाएं और झुर्रियां (Premature Aging) उभरने लगती हैं। इसके अलावा, स्किन बैरियर पूरी तरह डैमेज होने के कारण त्वचा अत्यधिक संवेदनशील (Hypersensitive) हो जाती है, जिससे भविष्य में सामान्य स्किनकेयर प्रोडक्ट्स या धूप के संपर्क में आते ही चेहरे पर परमानेंट रेडनेस, सूजन और 'कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस' जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
यह हैक किन लोगों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है?
यह हैक उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है जिनकी त्वचा पहले से ही संवेदनशील या किसी समस्या से जूझ रही है:
अगर कोई व्यक्ति इस शैम्पू का चेहरे पर रोजाना इस्तेमाल करने लगे, तो उसका 'स्किन बैरियर' (Skin Barrier) कितने समय में और कैसे डैमेज हो सकता है?
अगर कोई व्यक्ति इस शैम्पू का चेहरे पर रोजाना इस्तेमाल करने लगे, तो उसका स्किन बैरियर मात्र 1 से 2 हफ्ते के भीतर ही बुरी तरह डैमेज हो सकता है। यह डैमेज बहुत तेजी से होता है क्योंकि शैम्पू में मौजूद 'सोडियम लॉरिल सल्फेट' (SLS) जैसे कड़े सर्फेक्टेंट्स चेहरे की ऊपरी परत में मौजूद नेचुरल लिपिड्स (वसा) और सिरेमाइड्स को पूरी तरह धो डालते हैं। यह लिपिड परत ही त्वचा की नमी को बांधकर रखती है। इसके हटते ही त्वचा की सुरक्षा दीवार टूट जाती है, जिससे त्वचा के अंदर का पानी तेजी से उड़ने लगता है (जिसे TEWL कहते हैं)। इसे चेहरे पर अत्यधिक सूखापन, पपड़ी जमना, खुजली और ब्रेकआउट्स शुरू हो जाते हैं।
लोग अक्सर यह अंतर नहीं कर पाते कि उन्हें फंगल एक्ने है या बैक्टीरियल (सामान्य) पिंपल्स। एक मरीज घर पर बैठकर इन दोनों में कैसे फर्क पहचान सकता है?
घर पर बैठकर दोनों में अंतर पहचानने के लिए इन तीन मुख्य बातों पर ध्यान दें:
क्या फंगल एक्ने के इलाज के लिए सीधे एंटी-डैंड्रफ शैम्पू का इस्तेमाल करना सही है, या इसके लिए विशेष रूप से बने त्वचा के क्लींजर बाजार में मौजूद हैं?
नहीं, फंगल एक्ने के लिए सीधे एंटी-डैंड्रफ शैम्पू का इस्तेमाल करना बिल्कुल सही नहीं है। भले ही दोनों का कारण एक ही फंगस हो, लेकिन शैम्पू का पूरा फॉर्मूलेशन चेहरे के लिए बहुत कठोर (Harsh) होता है। बाजार में विशेष रूप से त्वचा के लिए बने कई सुरक्षित क्लींजर और सोप मौजूद हैं। फंगल एक्ने के इलाज के लिए डर्मेटोलॉजिस्ट अक्सर केटोकोनाज़ोल क्लींजर (Ketoconazole Cleanser), सल्फर-बेस्ड फेसवॉश (Sulfur-based facewash) या जिंक पाइरिथियोन सोप की सलाह देते हैं। ये प्रोडक्ट्स चेहरे की संवेदनशीलता और pH लेवल को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं, जो बिना स्किन बैरियर को नुकसान पहुंचाए फंगस को सुरक्षित तरीके से खत्म करते हैं।
अगर किसी ने सोशल मीडिया देखकर यह हैक आजमाया और उसके चेहरे पर लालिमा, जलन या 'कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस' (Contact Dermatitis) हो गया, तो उसे तुरंत क्या प्राथमिक उपचार (First Aid) करना चाहिए?
सामान्य पिंपल्स और डार्क स्पॉट्स के लिए ऐसे कौन से सुरक्षित एक्टिव इंग्रीडिएंट्स (जैसे Salicylic acid, Niacinamide आदि) हैं, जिन्हें शैम्पू के बजाय प्राथमिकता दी जानी चाहिए?
अगर किसी को मजबूरी में या डॉक्टर की सलाह पर ही एंटी-फंगल शैम्पू चेहरे पर लगाना पड़े, तो उसका सबसे सुरक्षित तरीका (Application method) क्या होना चाहिए?
यदि डॉक्टर की सलाह पर एंटी-फंगल शैम्पू चेहरे पर लगाना ही पड़े, तो सुरक्षा के लिए इन नियमों का पालन करें: