Environmental Impact of Period Hygiene Products: मेंस्ट्रुअल हाइजीन प्रोडक्ट्स महिलाओं की सेहत के लिए कितने सुरक्षित हैं और इनका पर्यावरण पर क्या असर पड़ता है? गायनेकोलॉजिस्ट और पर्यावरण विशेषज्ञों की राय के साथ जानिए पैड, टैम्पॉन और अन्य पीरियड प्रोडक्ट्स से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां।
Environmental Impact of Period Hygiene Products: सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति जे.बी. परदीवाला और आर. महादेवन की पीठ ने हाल ही में अपने एक आदेश में मासिक धर्म स्वच्छता (Menstrual Hygiene) को लेकर कहा कि मेंस्ट्रुअल हाइजीन बालिका के जीवन, गरिमा, स्वास्थ्य और शिक्षा के अधिकार का अभिन्न अंग है। देश के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रत्येक विद्यालय में मुफ्त सैनिटरी नैपकिन, अलग शौचालय और मासिक धर्म स्वास्थ्य जागरूकता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक निर्देश जारी किए। पीठ ने टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि "मासिक धर्म (Menstruation) एक सजा है और इसका अंत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सरकार का यह सकारात्मक दायित्व है कि वह स्वास्थ्य के अधिकार, विशेष रूप से बालिकाओं के मासिक धर्म स्वास्थ्य की रक्षा करे।
सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश महिलाओं खासतौर पर स्कूल जाने वाली लड़कियों के स्वास्थ्य और पढ़ाई के लिए एक अच्छा कदम माना जा रहा है। अब अगर बात चल रही है महिलाओं के मासिक धर्म की तो इससे जुड़ी और भी मुद्दों पर बात करना भी जरुरी है, जैसे पीरियड्स के दौरान इस्तेमाल किये जाने वाले हाइजीन प्रोडक्ट्स के फायदे और नुकसान, महिलाओं के स्वास्थ्य पर इनके नकारात्मक प्रभाव, पर्यावरण पर इन प्रोडक्ट्स का प्रभाव इत्यादि।
हाइजीन प्रोडक्ट्स, जैसे सैनिटरी पैड, टैम्पॉन, पैंटी लाइनर, इंटिमेट वॉश और डियोडरेंट स्प्रे ने एक महिला के जीवन में साफ-सफाई और सुविधा को आसान बनाया है। इन प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से स्कूल जाने वाली लड़कियां हों, वर्किंग वुमन हों या फिर हाउस वाइफ के उन दिनों की जिंदगी बहुत आसान हो गई है क्योंकि अब न दाग लगने की चिंता है और न ही पीरियड्स का डर। मगर बीते कुछ सालों में एक सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या ये प्रोडक्ट्स वाकई महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं? या फिर इनके पीछे कुछ ऐसे जोखिम छिपे हैं, जिन पर अब तक खुलकर बात नहीं हुई? कई रिसर्च में ये बात सामने आई है कि इन हाइजीन प्रोडक्ट्स में तरह-तरह के कैमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो महिलाओं के लिए कई तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों को लाते हैं।
जयपुर के कोकून हॉस्पिटल में ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनोकॉलोजी डिपार्टमेंट में कार्यरत डॉ. हिमानी शर्मा से हमने हाइजीन प्रोडक्ट्स और उनके हानिकारक प्रभावों पर बात की उन्होंने इसके बारे में बताया कि कैसे ये प्रोडक्ट्स महिलाओं के लिए स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रवाव डालते हैं?
क्या खुशबूदार (सेंटेड) सैनिटरी प्रोडक्ट्स से नुकसान हो सकता है?
हां, खुशबूदार सैनिटरी पैड हानिकारक हो सकते हैं, क्योंकि वेजाइना महिलाओं की बॉडी का एक खुद साफ होने वाला और बहुत सेंसटिव अंग है। और खुशबूदार हाइजीन प्रोडक्ट्स नेचुरल pH संतुलन को बिगाड़ सकते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है।
सैनिटरी पैड के कारण वेजाइनल इंफेक्शन के आम लक्षण क्या होते हैं?
टैम्पॉन के इस्तेमाल से टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम (TSS) कितना खतरनाक है?
क्या कपड़े के रीयूजेबल पैड स्वास्थ्य के लिए सही विकल्प हैं?
हां, अगर सही तरीके से इस्तेमाल किए जाएं, तो रीयूजेबल पैड एक बहुत अच्छा विकल्प हो सकते हैं। ये “पुराने जमाने” के नहीं हैं, बल्कि सही उपयोग के साथ ये सुरक्षित और स्किन फ्रेंडली ऑप्शन के रूप में प्रचलित हो रहे हैं।
रीयूजेबल कपड़े के पैड क्यों अच्छे हैं?
क्या इंटिमेट वॉश या स्प्रे का रोजाना इस्तेमाल जरूरी है?
इंटीमेट वॉश का बार-बार उपयोग करने से,
इंटिमेट वॉश के अलावा सफाई का क्या है सही तरीका?
मेन्स्ट्रुअल कप महिलाओं के लिए कितना सुरक्षित है?
मेंस्ट्रुअल कप सही तरीके से इस्तेमाल किए जाएं तो ज्यादातर महिलाओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित होते हैं, और वर्तमान में मार्किट में मिलने वाले हाइजीन प्रोडक्ट्स में सबसे सुरक्षित में से एक माना जाता है। क्योंकि,
महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े हाइजीन प्रोडक्ट्स पर अब भी खुलकर बात नहीं होती। विज्ञापन इन उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित दिखाते हैं, लेकिन जागरूकता की कमी महिलाओं को जोखिम में डाल सकती है। जरूरी है कि महिलाएं अपने शरीर को समझें, सही जानकारी लें और जरूरत के अनुसार सुरक्षित विकल्प चुनें।
ग्लोबल वॉर्मिंग का मुद्दा पिछले कई सालों से चर्चा का विषय बना हुआ है। और ग्लोबल वॉर्मिंग की बढ़ती समस्या में हाइजीन प्रोडक्ट्स का भी काफी बड़ा योगदान है। ऐसा इसलिए क्योंकि अधिकांश सैनिटरी पैड और टैम्पॉन 90% तक प्लास्टिक और सिंथेटिक सामग्री से बने होते हैं। एक महिला अपने जीवनकाल में औसतन 8,000 से 10,000 पीरियड प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती है। ये उत्पाद इस्तेमाल के बाद सीधे कचरे में चले जाते हैं और लैंडफिल में 500 से 800 साल तक पड़े रह सकते हैं।
इस मुद्दे पर हमने राजस्थान के अजमेर में स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मी कांत शर्मा से बात की और उन्होंने बताया,
महिला स्वच्छता उत्पाद स्वास्थ्य और गरिमा के लिए आवश्यक हैं, लेकिन इनके पर्यावरणीय प्रभाव पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता। प्रचलित सैनिटरी पैड एकल-उपयोग वाले उत्पाद हैं, जिनमें बड़ी मात्रा में प्लास्टिक होता है, जो सैकड़ों वर्षों तक नष्ट नहीं होता। राजस्थान सहित कई क्षेत्रों में उचित कचरा पृथक्करण और निपटान की व्यवस्था न होने के कारण यह अपशिष्ट खुले में फेंका जाता है या जलाया जाता है, जिससे मिट्टी-जल प्रदूषण, विषैली गैसों का उत्सर्जन और सफाई कर्मियों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ते हैं। समाधान उत्पादों की उपलब्धता सीमित करने में नहीं, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देने, सुरक्षित निपटान व्यवस्था विकसित करने और जन-जागरूकता बढ़ाने में है। मासिक धर्म स्वच्छता को स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरणीय स्थिरता के संदर्भ में भी देखना आवश्यक है।
सैनिटरी पैड और टैम्पॉन पर्यावरण के लिए काफ़ी हानिकारक हो सकते हैं, क्योंकि इनमें प्लास्टिक, सिंथेटिक फाइबर और रासायनिक अवशोषक पदार्थ होते हैं, जो लंबे समय तक नष्ट नहीं होते। एक सैनिटरी पैड को पूरी तरह विघटित होने में सैकड़ों वर्ष लग सकते हैं। इनके अनुचित निपटान से मिट्टी और जल प्रदूषण बढ़ता है, नालियां जाम होती हैं और खुले में जलाने पर विषैली गैसें निकलती हैं। इसके अलावा, यह अपशिष्ट सफाई कर्मियों के स्वास्थ्य के लिए भी जोखिम पैदा करता है। इसलिए इनके पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए सुरक्षित निपटान और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाना आवश्यक है।
यह दावा पूरी तरह सटीक नहीं है, वैज्ञानिक दृष्टि से सही बात यह है कि एक सामान्य सैनिटरी पैड में 80–90% तक प्लास्टिक और सिंथेटिक पॉलिमर होते हैं। ऐसे पदार्थों के पूर्ण अपघटन का कोई निश्चित समय नहीं बताया जा सकता, क्योंकि वे पूरी तरह नष्ट नहीं होते बल्कि माइक्रोप्लास्टिक में टूटते रहते हैं। अधिकांश वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार एक सैनिटरी पैड को 300 से 500 वर्ष या उससे अधिक समय लग सकता है विशेषकर लैंडफिल जैसी ऑक्सीजन-रहित परिस्थितियों में। इसलिए,“800 साल कहना एक चेतावनी रूप में आंकड़ा है, न कि प्रयोगशाला में मापा गया निश्चित तथ्य। जन-संवाद में कहना अधिक वैज्ञानिक रूप से सही होगा कि“एक सैनिटरी पैड को नष्ट होने में सैकड़ों वर्ष लग सकते हैं।”
अधिकांश पीरियड प्रोडक्ट्स, विशेषकर सैनिटरी पैड और टैम्पॉन, अपने वजन और संरचना के आधार पर मुख्यतः प्लास्टिक-आधारित होते हैं। इनमें पॉलीइथिलीन बैकशीट, पॉलीप्रोपाइलीन टॉपशीट, सुपर-एब्ज़ॉर्बेंट पॉलिमर और प्लास्टिक पैकेजिंग शामिल होती है। ये सभी घटक जैव-अवक्रमणीय नहीं हैं और लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं। उपयोग के बाद ये उत्पाद टूटकर माइक्रोप्लास्टिक में बदल जाते हैं, जो मिट्टी, जल और जीवों के शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। चूँकि इनका व्यवहार और पर्यावरणीय प्रभाव अन्य सिंगल-यूज़ प्लास्टिक अपशिष्ट के समान है, इसलिए वैज्ञानिक और अपशिष्ट प्रबंधन की दृष्टि से पीरियड प्रोडक्ट्स को प्लास्टिक वेस्ट की श्रेणी में रखना आवश्यक है, ताकि इनके संग्रह, पृथक्करण और निपटान के लिए प्रभावी नीतियाँ लागू की जा सकें।