Patrika Special News

India Bans Nimesulide : निमेसुलाइड जैसे पेनकिलर खतरनाक? राजस्थान ड्रग कंट्रोलर, डॉक्टर्स से जानिए Ban और Pain की कहानी

India Bans Nimesulide : भारत में दर्द की दवा निमेसुलाइड को बैन कर दिया गया है। केंद्र सरकार के फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। इस पर राजस्थान के ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक (Ajay Phatak, Drug Controller Rajasthan) ने पत्रिका के साथ बातचीत में बैन को लेकर बातचीत की। साथ ही डॉक्टर ने बताया कि दर्द की दवा खुद से लेना कितना खतरनाक है।

5 min read
Jan 02, 2026
अजय फाटक, डॉ. अर्जुन राज की फाइल फोटो | Photo - Patrika/ Gemini AI

India Bans Nimesulide above 100mg :सिर दर्द, कमर दर्द या घुटनों का दर्द… हर दर्द में हम खुद डॉक्टर बनकर दवा ले लेते हैं। पर, ऐसा करना बेहद खतरनाक है। इसलिए, दर्द की दवा निमेसुलाइड (सभी ओरल फॉर्मूलेशन) को तत्काल प्रभाव से सरकार ने देशभर में बैन कर दिया है। अब 100mg से अधिक डोज वाली निमेसुलाइड दवा (टैबलेट) नहीं मिलेगी। पेन किलर निमेसुलाइड बैन (Nimesulide Banned In India) को लेकर 'पत्रिका' के रवि कुमार गुप्ता की बातचीत अजय फाटक (ड्रग कंट्रोलर, राजस्थान), डॉ. संदीप जोशी (चिकित्सा अधिकारी) और डॉ. अर्जुन राज (आयुर्वेदिक) से बातचीत हुई है।

ये भी पढ़ें

Rum Benefits In Winter : सर्दी में रम दवा या जानलेवा शौक? कैंसर डॉक्टर की बातें सुनकर रह जाएंगे दंग

Experts on Nimesulide Ban | निमेसुलाइड बैन पर एक्सपर्ट्स की राय

निमेसुलाइड बैन को लेकर कई सवाल हैं जो आम लोगों के मन में उठ सकते हैं। हमने अलग-अलग एक्सपर्ट्स से कई सवाल पूछे हैं। आप स्टोरी में निम्नलिखित सवालों के जवाब जानेंगे-

  • सरकार ने निमेसुलाइड बैन क्यों किया?
  • बैन करना असरदार है या नहीं?
  • भारत में दर्द के दवा का बाजार कितना बड़ा?
  • निमेसुलाइड के अलावा और कौन सी दवाएं भी लिवर या सेहत पर असर डालती हैं?
  • क्या 100mg या उससे कम वाले निमेसुलाइड सुरक्षित हैं?
  • किन परिस्थितियों में पेनकिलर दिया जाता है?
  • पेनकिलर जो बिना डॉक्टरी सलाह के ले सकते हैं?
  • किस तरह की दर्द की दवा को बिना डॉक्टरी सलाह के नहीं ले सकते हैं?
  • महीने में कितनी बार ले सकते हैं पेनकिलर?
  • दर्द के लिए सबसे तेज घरेलू उपाय क्या है?
  • दर्द के लिए सबसे अच्छा तेल कौन सा होता है?
  • आयुर्वेद में दर्द के लिए कौन सी गोली है?

सरकार ने निमेसुलाइड बैन क्यों किया?

Photo - NotebookLM

अजय फाटक (ड्रग कंट्रोलर, राजस्थान) ने कहा, "जैसा कि सरकार की ओर से बताया गया है निमेसुलाइड का हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है। खासकर, लिवर पर इसका असर देखने को मिलता है। इसलिए, सरकार की ओर से बैन करने का निर्णय लिया गया। ये कदम आम आदमी के हेल्थ को ध्यान में रखकर लिया गया है।"

राजस्थान में निमेसुलाइड बैन को लेकर क्या तैयारी है?

अजय कहते हैं, सरकार ने तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश दिया है। इसलिए, हमारी ड्रग कंट्रोलर टीम ने बिना देरी किए संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों को पालन करने का आदेश जारी किया। टीम इस पर काम कर रही है। साथ ही दवा कंपनियों से लेकर विक्रेताओं तक जानकारी दे दी गई है ताकि बैन को प्रभावी बनाया जा सके।

बैन करना असरदार है या नहीं?

अजय कहते हैं कि बिल्कुल गलत दवाओं का बैन करना जरूरी है। इसे प्रभावी बनाने के लिए हम काम कर रहे हैं। साथ ही सोशल मीडिया के दौर में सूचना फैलाना आसान हो गया है। इसलिए, आजकल ये काम और भी अच्छी तरह हो रहा है। मीडिया के अलावा कुछ जागरूक नागरिक भी हमें उन लोगों की जानकारी देते हैं जो बैन को जाने-अनजाने फॉलो नहीं कर रहे हैं तो हमारी टीम वहां पहुंच कर कानूनी एक्शन लेती है। ऐसे में गलत दवाओं को बैन करना जरूरी है और असरदार बनाने के लिए हम और आप काम कर रहे हैं।

भारत में दर्द के दवा का बाजार कितना बड़ा?

Data Source- imarcgroup (Photo - NotebookLM)

भारत का पेन रिलीफ का मार्केट रॉकेट की तरह बढ़ रहा है। पिछले कुछ माह में हेल्थ रिसर्च रिपोर्टों में इस बात को लेकर काफी चर्चा रही है।

  • मार्केट साइज (₹16,000 करोड़) : मार्केट रिसर्च फर्म IQVIA की रिपोर्ट बताती है कि भारत में पेनकिलर का बाजार काफी तेजी से बढ़ रहा है। 16 हजार करोड़ का ये आंकड़ा बताता है कि पिछले 05 वर्षों में दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गया है।
  • हम बन चुके हैं 'दर्द के डॉक्टर' : नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (National Sample Survey Office) और जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसीन एंड प्राइमरी केयर (Journal of Family Medicine and Primary Care) ने पाया है कि आधे से अधिक भारतीय डॉक्टर के पास जाने के बजाय सीधे मेडिकल स्टोर से दर्द की दवाएं खरीदते हैं। 52% भारतीय खुद से दर्द की दवा लेकर खाते हैं।

निमेसुलाइड के अलावा और कौन सी दवाएं भी लिवर या सेहत पर असर डालती हैं?

Photo - NotebookLM

निमेसुलाइड, पेरासिटामोल के अलावा ऐसी कई सामान्य दर्द निवारक और अन्य दवाएं हैं, जिनका बिना डॉक्टरी सलाह के या लंबे समय तक सेवन करने पर लिवर, किडनी और पेट पर गंभीर असर पड़ सकता है-

  • पेरासिटामोल - इसका ओवरडोज लिवर के लिए सबसे घातक
  • डिक्लोफेनाक - लिवर एंजाइम्स को बढ़ाने का खतरा और किडनी पर असर
  • मेफेनैमिक एसिड - अल्सर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग का खतरा
  • इबुप्रोफेन और नेप्रोक्सन - एसिडिटी, अल्सर और किडनी की कार्यक्षमता कम होने का खतरा
  • कुछ एंटीबायोटिक्स - ड्रग-इंड्यूस्ड लिवर इंजरी का कारण बनती हैं

क्या 100mg या उससे कम वाले निमेसुलाइड सुरक्षित हैं?

डॉ. संदीप जोशी (चिकित्सा अधिकारी) ने बताया कि निमेसुलाइड को खुद से लेना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। सरकार ने भी बताया कि वो किस तरह से लिवर और किडनी पर बुरा असर डालती हैं। इस हिसाब से निमेसुलाइड जैसे पेनकिलर नहीं खाने चाहिए।

किन परिस्थितियों में पेनकिलर दिया जाता है?

डॉ. संदीप कहते हैं, पेन किलर सूजन, चोट, घाव आदि परिस्थितियों में दिया जाता है। पहले दर्द के लक्षण को समझना होता है तब ही सही दवा दी जा सकती है।

महीने में कितनी बार ले सकते हैं दर्द की दवा?

डॉ. संदीप कहते हैं, शोध में ये बात सामने आ चुकी है कि दर्द की दवाएं किडनी पर असर डालती हैं। अगर बहुत जरूरी नहीं है तो ना लें। अगर फिर भी कोई ले रहा है तो 3 दिन, दिन में 2 बार से ज्यादा ना ले। हमेशा मेरी सलाह रहती है कि दर्द की दवा डॉक्टर से पूछकर ही खरीदें।

ऐसे पेनकिलर जो बिना डॉक्टरी सलाह के ले सकते हैं और किन दवाओं को बिना प्रिस्क्रिप्शन नहीं ले सकते?

डॉ. संदीप ने बताया सामान्यत: सभी प्रकार के पेनकिलर डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए। अगर बहुत जरूरी हो तो सिर्फ पैरासिटामोल ही खुद से एक दो डोज ले सकते हैं। हालांकि, खुद से किसी भी दवा को लेने की सलाह मैं नहीं देता हूं।

आयुर्वेदिक इलाज हैं सुरक्षित- डॉ. अर्जुन राज

Photo - NotebookLM

डॉ. अर्जुन राज ने बताया कि दर्द के लिए आयुर्वेद में सुरक्षित इलाज है। आयुर्वेद में दर्द का इलाज तेल और नेचुरल तरीके से किया जाता है। इसलिए, साइड इफेक्ट का खतरा नहीं होता है! वात, पित्त, कफ के अनुसार आयुर्वेद में इलाज व्यक्तिगत किया जाता है।

दर्द के लिए सबसे तेज घरेलू उपाय क्या है?

  • अदरक की चाय या रस : अदरक में 'जिंजरॉल' होता है जो सूजन और दर्द को कम करने में एस्पिरिन की तरह काम करता है। सिरदर्द या मांसपेशियों के दर्द में आप इस चाय को पी सकते हैं।
  • हल्दी वाला दूध : हल्दी में मौजूद 'करक्यूमिन' एक नेचुरल पेनकिलर है। चोट या अंदरूनी दर्द के लिए यह सबसे तेज रिकवरी देता है।
  • सेंधा नमक का सेंक : अगर मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द है, तो गर्म पानी में सेंधा नमक डालकर सिकाई करने से तुरंत राहत मिलती है। यह मैग्नीशियम की कमी को पूरा कर मांसपेशियों को आराम देता है।

दर्द के लिए सबसे अच्छा तेल कौन सा होता है?

  • लौंग का तेल (Clove Oil)
  • नीलगिरी का तेल
  • सरसों का तेल

डॉ. अर्जुन ने ये भी बताया कि दर्द का इलाज आयुर्वेद से कराने पर तभी फायदा मिलता है जब आप किसी आयुर्वेदिक चिकित्सा की देख-रेख में इलाज कराते हैं। खुद से इलाज कराने पर इससे भले नुकसान ना हो लेकिन फायदा भी नहीं मिल पाता है।

ये भी पढ़ें

Milk and Heart Attack Risk : दूध पीने से हार्ट अटैक जैसी दिल की बीमारी? वैज्ञानिकों ने शोध में क्या पाया

Also Read
View All

अगली खबर