Space Success Stories: पहले अंतरिक्ष में अमेरिका और रूस का दबदबा था, लेकिन अब भारत, चीन, यूरोपीय देश और जापान जैसे देश भी इस रेस में आगे बढ़ रहे हैं। भारत कम खर्च में इस दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं अब चांद और मंगल पर पहुंचने की तैयारी चल रही है। आइए जानते हैं कि कौन से देश इस मामले में कहां हैं।
Space Success story of India: आसमान की ऊंचाइयों में अब सिर्फ तारे ही नहीं, बल्कि कृत्रिम उपग्रहों की भीड़ भी तेजी से बढ़ती जा रही है। कभी इस अंतरिक्ष पर अमेरिका और रूस का दबदबा हुआ करता था। वही तय करते थे कि स्पेस में असली ताकत किसके पास है और भविष्य की दिशा क्या होगी। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। 2026 में Bryce Space and Technology की रिपोर्ट के अनुसार भारत, चीन और कई अन्य देश इस दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। 1960 के दशक की धीमी शुरुआत से लेकर आज की रॉकेट जैसी रफ्तार तक पहुंचा यह सफर सिर्फ आंकड़ों का नहीं है,बल्कि तकनीक और भविष्य की दिशा बदल रही है।
रूस ने 1960 के दशक में अपनी अंतरिक्ष यात्रा की शुरूआत की। साल 1960 के दशक में अमेरिका ने सफल 30 सैटेलाइट लॉन्च कर दिए थे। वहीं रूस इस क्षेत्र में अपनी रफ्तार बढ़ाने में जुट चुका था। 1970 दशक में रूस ने 442 सफल सैटेलाइट लॉन्च कर दिए थे, जबकि अमेरिका ने 488। 1980 के दशक में रूस ने ऐसी तेज रफ्तार पकड़ी कि अगले ही 10 सालों में उसने 2000 सफल सैटेलाइट लॉन्च का आंकड़ा पार कर पूरी दुनिया को चौंका दिया। स्पेस स्टेट्स और ब्राइस स्पेस एंड टेक्नोलॉजी (Bryce Space and Technology) के रिपोर्ट अनुसार 2026 में रूस 3,185 सफल लॉन्च के साथ दुनिया में पहले नंबर पर आ चुका है। यह आंकड़ा बताता है कि अंतरिक्ष की बुनियाद रूस ने कितनी मजबूती से रखी थी।
अमेरिका हमेशा से रूस का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी रहा है। नासा (NASA) के जरिए अमेरिका ने चांद पर कदम रखने से लेकर मंगल तक की दूरी तय की। लेकिन इस बीच के कुछ सालों में अमेरिका की रफ्तार रूस के मुकाबले थोड़ी धीमी रही थी। एलन मस्क की 'स्पेसएक्स' (SpaceX) जैसी प्राइवेट कंपनियों के आने के बाद पासा पलट गया। आज अमेरिका 2,208 सफल सैटेलाइट लॉन्च के साथ दूसरे नंबर पर है। 2020 से 2026 के बीच अमेरिका ने भारी मात्रा में सफल सैटेलाइट लॉन्चिंग की है। यह आंकड़ा 1572 से बढ़कर सीधा 2200 के पार पहुंच गया है।
चीन ने वर्ष 1965 तक एक भी सैटेलाइट लॉन्च नहीं किया था। चीन ने पहला सैटेलाइट लॉन्च 1970 में किया। वर्ष 2010 तक चीन के कुल 117 लॉन्च थे। हालांकि इसके बाद चीन ने अंतरिक्ष यान की लॉन्चिंग में बहुत तरक्की की। स्पेस में सैटेलाइट की लॉन्चिंग 2026 तक बढ़कर 711 हो गए। आंकड़ों के अनुसार 16 सालों में चीन ने अपनी ताकत करीब 6 गुना बढ़ा ली। आज के समय में चीन अपना खुद का स्पेस स्टेशन चला रहा है और अंतरिक्ष क्षेत्र में रूस और अमेरिका के बाद तीसरी सबसे बड़ी ताकत बन चुका है।
भारत ने अंतरिक्ष की दौड़ में अपनी अलग पहचान बनाई है। कभी सीमित संसाधनों के बीच भारतीय वैज्ञानिक साइकिल और बैलगाड़ी पर रॉकेट के पुर्जे ले जाते थे, लेकिन आज वही भारत दुनिया की बड़ी स्पेस ताकतों में गिना जा रहा है। 1980 तक भारत के पास सिर्फ 1 सफल सैटेलाइट लॉन्च था। 2005 तक यह आंकड़ा बढ़कर 12 पहुंचा। इसके बाद भारत ने तेजी से नई ऊंचाइयां हासिल की। इसरो (Indian Space Research Organisation) ने Mars Orbiter Mission और Chandrayaan programme जैसे मिशनों से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। आज 2026 में भारत 84 सफल लॉन्च के साथ दुनिया के बड़े स्पेस देशों में शामिल हो गया है। भारत ने कम खर्च में बड़े मिशन पूरे करके भारत ने दुनिया को अपनी तकनीक की ताकत दिखा दी है। आज भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
यूरोप ने अंतरिक्ष की दौड़ में अपनी शुरुआत 1970 के दशक में की थी। 1970 में उसके पास सिर्फ 2 सफल सैटेलाइट लॉन्च थे, जो 1990 तक बढ़कर 41 हो गए। यूरोप की अन्तरिक्ष यात्रा 21वीं सदी से ज्यादा बढ़ी है। साल 2000 तक यह संख्या 133 तक पहुंच गई, और 2026 तक बढ़कर 310 हो गई। समय के साथ यूरोप ने अपनी अंतरिक्ष क्षमता लगातार बढ़ाई है और आज वह दुनिया की बड़ी अंतरिक्ष शक्तियों में शामिल हो चुका है।
जापान की अंतरिक्ष यात्रा भी 1970 में मात्र 1 सफल सैटेलाइट लॉन्च से शुरू हुई थी। वहीं जापान ने अंतरिक्ष यात्रा में तेजी से भागने के बजाय अपनी तकनीक को मजबूत करने पर ध्यान दिया। 1980 तक उनके पास 16 सैटेलाइट लॉन्च थे, जो 2000 तक बढ़कर 51 हुए। पिछले दो दशकों में जापान ने अपनी गति बढ़ाई और 2015 में 89 से तक पहुंच गया। आंकड़ों के अनुसार 2026 तक 124 सफल लॉन्च कर लिया है। जापान का डेटा यह दर्शाता है कि उनकी प्रगति बहुत ही संतुलित और स्थिर रही है।
2026 के ये आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं हैं, ये भविष्य की तस्वीर हैं। अब जंग सिर्फ सैटेलाइट भेजने की नहीं है, बल्कि चांद पर बस्तियां बसाने और मंगल ग्रह पर इंसान को भेजने की है। भारत अब 'गगनयान' मिशन की तैयारी में है, जिससे हम अंतरिक्ष में अपने इंसान भेजेंगे। वहीं, एलन मस्क की नजरें मंगल पर शहर बसाने पर टिकी हैं। इस रेस में अब वही जीतेगा जिसके पास तकनीक के साथ-साथ सस्ते और टिकाऊ मिशन भेजने की क्षमता होगी। भारत ने इस मामले में तेज रफ्तार पकड़ लिया है।