
Gold Price Effect on Ayurvedic medicine: सोने की बढ़ती कीमतें केवल गहनों की खरीदारी या महिलाओं की पसंद को ही ठेस नहीं पहुंचा रहीं। बल्कि इसकी चमक अब बच्चों की सेहत और आयुर्वेदिक दवाओं पर भारी पड़ रही है। दरअसल प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों में जिस रसायन को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शरीर को ताकत देने वाला माना जाता था, आज वही आम लोगों की पहुंच से दूर हो रहा है। ऐसा पहली बार है कि जब सोने की बढ़ती कीमतों का असर आयुर्वेद पर नजर आ रहा है। दरअसल सोने की रिकॉर्ड तोड़ कीमतों के कारण स्वर्ण भस्म से तैयार की जाने वाली आयुर्वेदिक दवाओं की कीमतों में डेढ़ से दोगुना तक इजाफा हुआ है। जबकि बच्चों को दी जाने वाले स्वर्ण प्राशन की फीस भी दोगुनी हो चुकी है। सवाल यही है कि क्या सोने की बढ़ती कीमतें परम्परागत भारतीय चिकित्सा पद्धति को भी आम आदमी की पहुंच से बाहर कर रही हैं?
सोने की बढ़ती कीमतों ने (Gold Price Effect on treatment) हमारी भारतीय प्राचीन उपचार पद्धति आयुर्वेद को भी खासा महंगा कर दिया है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेद चिकित्सालय में स्वर्ण प्रशासन की एक चम्मच जो पहले 50 रुपए में मिलती थी, अब उसके 100 रुपए चुकाना पड़ रहे हैं। डेढ़ से दो गुना की बढ़ोतरी सिर्फ स्वर्ण प्राशन में ही नहीं, उन सभी आयुर्वेदिक दवाओं में हुई है, जिसमें सोने की भस्म का उपयोग होता है।
आयुर्वेद उपचार में सोने का विशेष महत्व (Gold Price Effect on health) माना गया है। आयुर्वेद की कई दवाओं में इसका उपयोग होता है। सोने की कीमतें बढ़ने के कारण कुछ महीनों में इन दवाओं की कीमतें भी सोने की तरह आसमान पर पहुंच गई हैं। इसलिए सोने की ही तरह ऐसी आयुर्वेदिक दवाएं भी आम लोगों की पहुंच से बाहर हो रही है। जानकार बताते हैं, पांच-छह महीने में उन सभी दवाओं की कीमत में बड़ा उछाल आया है, जिनमें सोने की भस्म का उपयोग होता है। इसमें विशेष च्यवनप्राश से लेकर दर्द निवारक और शुगर कंट्रोल करने वाली दैनिक उपयोग की दवाएं तक शामिल हैं।
सोने के दाम बढ़ने (Gold Price Effect on swarn bhasm ) से स्वर्ण भस्म भी खासी महंगी हो गई है। पहले एक ग्राम प्रीमियन स्वर्ण भस्म की कीमत 24 हजार 326 रुपए थी। कुछ महीने में यह बढ़कर 36 हजार 813 रुपए प्रति ग्राम पर पहुंच चुकी है। इसके चलते जिन आयुर्वेदिक दवाओं में (विशेषकर टेबलेट्स में) स्वर्ण भस्म का उपयोग होता है, इनकी कीमतों में बड़ा उछाल आ गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आयुर्वेद में कहा गया है कि यदि धातु का इस्तेमान भस्म (पाउडर) रूप में सही तरह से किया जाए, तो यह कई बीमारियों से छुटकारा दिलाने में अहम भूमिका निभा सकता है। इसके उपयोग से स्ट्रेंथ और इम्यूनिटी पावर (Gold Price Effect on health as power booster) मिलती है। सुश्रुत संहिता और चरक संहिता में भी स्वर्ण भस्म के लाभ का वर्णन है। मानसिक बीमारी, हृदय संबंधित बीमारी, चर्म रोग, मेन्सट्रूअल डिसऑर्डर जैसे रोगों के उपचार में स्वर्ण भस्म लाभगारी साबित हुई है। हालांकि इसका उपयोग चिकित्सक की सलाह अनुसार निर्धारित मात्रा और समय तक ही करना चाहिए।
आयुर्वेदिक उपचार पद्धति (Gold Price Effect on immunity) में स्वर्ण का विशेष महत्व है। स्वर्ण भस्म अन्य दवाओं के प्रभाव को दस गुना बढ़ा देती है। स्वर्ण एक रसायन की तरह भी कार्य करता है। यही कारण है कि पूर्व में राजा-महाराज सोने-चांदी के बर्तन में भोजन-पानी लेते थे, जिससे इन धातु का असर उनके शरीर पर पड़ता है। स्वर्ण भस्म मानसिक व शारीरिक बल, रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
-डॉ. जेपी चौरसिया, प्राचार्य शासकीय स्वशासी धन्वंतरि आयुर्वेद महाविद्यालय, उज्जैन
सोने की कीमत बढ़ने से स्वर्ण भस्म की (Gold Price Effect on Swarn Bhasma) कीमत भी बढ़ी है। इससे उन सभी दवाओं की कीमत डेढ़ गुना तक बढ़ गई है इसमें इनका उपयोग होता है। उम्मीद है कि अब कीमतें स्थिर होंगी।
-नीललोहित पलशीकर, आयुर्वेदिक दवा विक्रेता, उज्जैन