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ऐसे पता करें नसों में ब्लॉकेज है या नहीं! अगर है… तो तुरंत करें ये काम..

Heart Attack Risk Dil ka sach series part 9: आपके दिल का हाल सुनाती इस सीरीज के हर पार्ट में एक्सपर्ट्स ने बताया है कि दिल की बीमारियां अचानक नहीं होती हैं... ये धीरे-धीरे शरीर के अंदर पनपने वाली बीमारियां हैं। जब तक हमें कुछ भी पता चलता है, तब तक अक्सर काफी हद तक नुकसान हो चुका होता है। लेकिन अब कार्डियोलॉजिस्ट कहते हैं कि एक आसान टेस्ट करके आप पता लगा सकते हैं कि आपकी नसों में प्लाक है या नहीं? क्या आप जानना चाहते हैं... अगर हां तो जरूर पढ़ें हेल्दी हार्ट के लिए patrika.com की ये खास सीरीज...

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Mar 21, 2026
Heart Attack Risk dial ka sach series part 9 plaque or blockage test at home(photo:patrika creative)

Heart Attack Risk Dil ka sach series part 9: अभी तक आप अपने दिल की सेहत और उसे प्रभावित करने वाले कारकों के बारे में जान चुके हैं। हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस् का अंतर भी आपको समझ आया होगा। नसों में बनने वाला प्लाक क्या है, कब बनता है, क्या होता है जैसी जरूरी जानकारी भी आपके पास है… इसी कड़ी में आज patrika.com आपको बताने वाला है हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार प्लाक के बारे में बड़ा ही रोचक फैक्ट कि आप घर बैठे-बैठे कैसे पता कर सकते हैं कि आपकी नसों में ब्लॉकेज या प्लाक बना है या नहीं… तो आइए चलते हैं… Bhopal AIIMS… जहां हार्ट एक्सपर्ट डॉ. विक्रम वाटी ने बताया प्लाक है या नहीं… घर में करें ये आसान टेस्ट.. संजना कुमार की खास रिपोर्ट…

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जानें क्या है ये टेस्ट, मेडिकल भाषा में इसका नाम

इस खास रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे एक आसान तरीका, जिससे आप शुरुआती अंदाजा लगा सकते हैं और साथ ही यह भी समझेंगे कि आगे क्या करें? इस टेस्ट को मेडिकल भाषा में एंकल-ब्रैकियल इंडेक्स (ABI) कहा जाता है। इसे करने के लिए ब्ल्ड प्रेशर चेक करने की मशीन होना चाहिए।

कैसे करें टेस्ट?

  • टेस्ट शुरू करने से पहले कॉपी-पेन लें, कॉपी में टाइटल लिखें बीपी- फिर इसे एक टेबल के रूप में दो भागों में बांट लें, एक पर लिखें राइट हैंड बीपी दूसरे भाग में लिखें लेफ्ट हैंड बीपी… इसी तरह दोनों पैरों के बीपी के लिए भी लिखें राइट लेग, लेफ्ट लेग…
  • अब टेस्ट करने के लिए सबसे पहले लेट जाएं।
  • अब दोनों हाथों का बीपी चेक करें। (इसके लिए आपको घर के किसी सदस्य को साथ रखना चाहिए, ताकि सही बॉडी पॉजिशन और कूल रहकर ये टेस्ट किया जा सके। वरना बीपी रीडिंग गड़बड़ आ सकती है।) दोनों हाथों का बीपी नोट करें।
  • अब दोनों पैरों का बीपी चैक करें। (इसके लिए टखनों के जस्ट ऊपरी हिस्से पर बीपी चेक करना होता है) दोनों पैरों का बीपी नोट करें।

अब दोनों हाथों में जिस हाथ की बीपी रीडिंग ऊपर आए या ज्यादा आए उसे अलग से लिखें. और इसी तरह पैर वाले बीपी में भी जो रीडिंग ज्यादा है उसे लिखें और टखने के बीपी में हाथ के बीपी का भाग दे दें। भाग देने पर जो नंबर आएगा वो आपका ABI नंबर होगा। यही नंबर बताएगा कि आपकी नसों में प्लाक है या नहीं?

Heart Attack Risk Dil ka sach series part 9 ABI Test at home(photo:AI)

ये स्कोर बता देगा आपके दिल का हाल

यदि ABI 0.9 से ऊपर आता है तो इसका अर्थ है कि सामान्य स्थिति है, प्लाक या ब्लॉकेज नहीं है।
वहीं यदि ABI 0.9 से कम है तो नसों में प्लाक या ब्लॉकेज बनने की आशंका है।

हालांकि ये टेस्ट परफेक्ट नहीं है, लेकिन यह एक अर्ली वार्निंग सिग्नल जरूर बन जाता है। इस टेस्ट के बाद आपको आगे की जांच करवाने हार्ट एक्सपर्ट्स से जरूर मिलना चाहिए।

क्यों काम का है ये तरीका?

दरअसल आपका पूरा ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम एक नेटवर्क की तरह है। दिल से निकलने वाली नसें पूरे शरीर में फैली होती हैं। अगर पैरों की नसों में खून का दबाव कम हो रहा है, तो इसका मतलब हो सकता है कि वहां ब्लॉकेज या नसों में संकरापन है। और जब यह समस्या एक जगह है, तो इसके शरीर में दूसरी जगह होने की भी आशंका बढ़ जाती है।

अगर रिपोर्ट लगे संदिग्ध तो क्या करें?

अगर आपको लगता है कि आपकी ABI रिपोर्ट संदिग्ध यानी 0.9 से कम आ रही है, तो इसे हल्के में न लें। ये संकेत हो सकता है कि आपकी नसों में प्लाक बनना शुरू हो चुका है।

ऐसी स्थिति में जरूरी हो जाते हैं ये टेस्ट

  • कैल्शियम स्कोर
  • hs-CRO (सूजन का स्तर)
  • लिपिड प्रोफाइल

अब बड़ा सवाल- अगर प्लाक बन चुका है तो क्या करें?

बहुत से लोग यही सोचते हैं कि ब्लॉकेज का मतलब तुरंत दिल का ऑपरेशन, लेकिन असल में सच्चाई ये नहीं है। सच्चाई इससे अलग है। दरअसल नसों में बनने वाला प्लाक कई तरह का हो सकता है, कुछ प्लाक सख्त और स्थिर होते हैं और कुछ नरम और कमजोर। नरम प्लाक ज्यादा खतरनाक होता है, क्योंकि यह कभी भी फट सकता है और खून का थक्का जम सकता है। जो हार्ट अटैक की वजह बन सकता है। ऐसे में जरीरी सिर्फ प्लाक को हटाना नहीं बल्कि उसे स्थिर बनाना पहला मकसद होना चाहिए।

प्लाक को स्थिर बनाने समझनी होंगी ये 5 बड़ी बातें

1. दवाइयां क्यों जरूरी?

दिल के मरीजों को अक्सर स्टैटिन जैसी दवाएं दी जाती हैं। इनका काम सिर्फ कोलेस्ट्रॉल कम करना नहीं होता, बल्कि प्लाक की बाहरी परत को मजबूत करना होता है। ताकि नरम प्लाक को फटने से रोका जा सके।

2. शरीर में सूजन को कम करना

प्लाक को स्थिर बनाने के लिए जरूरी है कि शरीर में लगातार सूजन को कम किया जाए। लगातार सूजन से प्लाक अस्थिर बनता है। तो सूजन को कम करने आपको हेल्दी डाइट अपनानी होगी। अपनी नींद पर काम करना होगा। तनाव को कंट्रोल करना होगा। ये तीनों चीजें दुरुस्त तो नसों की रिपेयरिंग भी बेहतर हो जाएगी और सूजन कम।

3. नाइट्रिक ऑक्साइड बढ़ाना जरूरी ये है नेचुरल बूस्टर

नाइट्रिक ऑक्साइड नसों को खोलने में मदद करता है, ताकि वो बेहतर तरीके से काम कर सकें। इसे बढ़ाने के लिए डाइट में हरी सब्जियां, पालक, मेथी, चुकंदर आदि शामिल करें। नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। सुबह-सुबह की धूप भी बहुत जरूरी है।

4. ब्लड प्रेशर हो कंट्रोल में

हाई बीपी प्लाक को और खतरनाक बना सकता है। इसलिए इसे कंट्रोल रखना जरूरी है। इसे कंट्रोल रखने के लिए आपको नमक का सेवन सीमित करना होगा। रोजाना हल्की एक्सरसाइज करनी होगी। जरूरत है तो दवाएं लेनी होंगी।

5. फास्टिंग लेकिन तरीका सही होना जरूरी

कुछ रिसर्च बताती हैं कि सही तरीके से फास्टिंग की जाए तो शरीर में इंसुलिन लेवल को कम करती है। वहीं सूजन को घटाती है। इससे शुरुआती प्लाक को कम करने में मदद मिल सकती है। लेकिन इस फास्टिंग रूल को फॉलो करने के लिए आपको अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

सिर्फ यही तरीका काम नहीं आएगा, आपको करने होंगे ये भी काम

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि सिर्फ दवाएं लेने, डाइट बदलने से सब ठीक हो जाएगा, तो ऐसा सोचना गलत है। लेकिन दिल की बीमारी एक मल्टी फैक्टर प्रॉब्लम है। इसलिए एक तरीका काम नहीं करेगा। इसके लिए आपको एक साथ कई चीजों पर एक साथ काम करना होगा। खानपान के साथ ही नींद पर्याप्त लें, स्ट्रेस से दूर रहने मेडिटेशन करें, योग करें, एक्सरसाइज करें, जो मसल्स बनाने का काम करती हैं। क्योंकि इंसुलिन हार्मोन आपकी मसल्स में ही अवशोषित होता है। वरना इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या परेशानी हार्ट की इन प्रॉबल्म्स का बड़ा कारण बन सकती हैं।

चुपचाप बढ़ती खतरनाक बीमारी जानलेवा बनने से पहले कई बार संकेत जरूर देती है। अगर उन संकेतों को समझ लें और समय पर कदम उठा लिए जाएं, तो दिल की इस बीमारी को हराना आसान होगा। जरूरत है जागरूक बने रहने की। एक बात और आपको ध्यान देना चाहिए कि ये टेस्ट 100 फीसदी सही नहीं, लेकिन संकेत जरूर दे देता है। मेडिकल साइंस में यह टेस्ट केवल इसलिए काम का है, कि यह बता देता है हाथ या पैरों की नसों में ब्लॉकेज तो नहीं, अगर है तो फिर यह शरीर में कहीं भी प्लाक की आशंका बढ़ा सकता है। Dil ka sach series के अगले पार्ट में आप जानेंगे हार्ट अटैक से बचने डॉक्टर्स के ऐसे उपाय जो आमतौर पर डॉक्टर्स आपको नहीं बता पाते। हमारे साथ जुड़े रहने के लिए पढ़ते रहिए… Patrika.com

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Updated on:
21 Mar 2026 05:11 pm
Published on:
21 Mar 2026 05:06 pm
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