Heart Attack vs Cardiac Attack Dil ka sach Series Part 8: हाल ही में 7 मार्च 2026, को मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में एक होटल मालिक ग्राहकों को खाना परोस रहे थे। अचानक वे जमीन पर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही उनकी हालत गंभीर हो चुकी थी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। ये पहला केस लेकिन.... केस 2 चौंकाने वाला...
Heart Attack vs cardiac Arrest Who killed: इंदौर की युवती विदिशा में शादी समारोह में स्टेज पर डांस कर रही 24 साल की परिणिता अचानक गिर पड़ी, परिवार उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। (photo:patrika)
ये सिर्फ दो घटनाएं नहीं हैं… देशभर से ऐसे कई मामले सामने आते रहते हैं, राजस्थान में एक स्कूल का मामला दिल दहला देने वाला था यहां लंच के समय टिफिन खोलते समय 9 साल की बच्ची की मौत हो गई थी, तो नहाते समय किशोरी की जान चली गई, कहीं खेलते-कूदते किशोर अचानक गिर पड़े, जिम, स्टेज, मैदान-कहीं भी बच्चों, किशोरों, युवाओं के अचानक गिरने और दम तोड़ने की खबरें आम हो चली हैं। असल में अचानक होता क्या है? हार्ट अटैक या कुछ और… patrika.com पर पढ़ें संजना कुमार की खास रिपोर्ट...
हार्ट हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. विनोद कोठारी बताते हैं...
इन सभी घटनाओं को अक्सर 'हार्ट अटैक' कह दिया जाता है…लेकिन हर बार सच इतना सीधा नहीं होता। यहीं समझना जरूरी है, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक नहीं हैं… अगर आपके मन में भी यह सवाल है, तो इसे बहुत आसान भाषा में ऐसे समझिए-
हार्ट अटैक (Heart Attack)
कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest)
- दिल की धड़कन का अचानक बंद हो जाना
यानी… एक में 'ब्लड का रास्ता' रुकता है, तो दूसरे में 'दिल की मशीन' ही बंद हो जाती है
Heart Attack हार्ट अटैक: धीरे-धीरे होने वाली समस्या है
-हार्ट अटैक ज्यादातर मामलों में एक लंबी प्रक्रिया का नतीजा होता है
-नसों में सूजन शुरू होती है
-धीरे-धीरे प्लाक जमा होता है
-खून का रास्ता संकरा हो जाता है
-एक समय पर ब्लॉकेज बन जाता है
इसके लक्षण क्या होते हैं? (Heart Attack Symptoms)
-सीने में दर्द या दबाव
-हाथ, पीठ या गर्दन में दर्द
-पसीना और घबराहट
-सांस फूलना
-सबसे अहम बात
-अक्सर शरीर पहले संकेत देता है।
-इलाज का समय मिल सकता है, अगर आप ध्यान दें।
कार्डियक अरेस्ट: बिना चेतावनी हाई रिस्क (Cardiac Arrest Symptoms)
कार्डियक अरेस्ट में पहले से कोई लक्षण नजर नहीं आते। यह अचानक धावा बोलता हैॉ।
- कार्डियक अरेस्ट दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम की गड़बड़ी से होता है।
- दिल अचानक पंप करना बंद कर देता है
- खून का संचार रुक जाता है
- दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुंचती
- व्यक्ति अचानक गिर जाता है
- सांस रुक जाती है या अनियमित हो जाती है
- नाड़ी महसूस नहीं होती
- कुछ ही सेकंड में बेहोशी और सबसे खतरनाक बात इसमें संभलने का समय लगभग नहीं मिलता। यही वजह है 'ऑन द स्पॉट' मौत की
- 1 मिनट में दिमाग प्रभावित होना शुरू
- 3-5 मिनट में गंभीर नुकसान
- 10 मिनट के बाद बचाव मुश्किल
- यानी…-जो हम देखते हैं-'चलते-चलते गिरना', असल में दिल का अचानक रुक जाना होता है।
युवा और बच्चे क्यों आ रहे हैं चपेट में?
पहले यह समस्या उम्रदराज लोगों में ज्यादा दिखती थी, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। इसके पीछे ये संभावित कारण-
1. छिपी हुई दिल की समस्या: कुछ लोगों में जन्म से ही दिल की इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी होती है, जो सामान्य जांच में नहीं पकड़ में आती।
2. अनियमित धड़कन(Arrhyathima): दिल की धड़कन अचानक बहुत तेज या बहुत धीमी हो सकती है।
3. ओवर एक्सर्शन और तनाव: अत्यधिक एक्सरसाइज, डिहाइड्रेशन और स्ट्रेस ट्रिगर बन सकते हैं।
4. बदलती जीवनशैली: नींद की कमी, प्रोसेस्ड फूड, स्क्रीन टाइम, लगातार तनाव, ये सभी दिल को धीरे-धीरे कमजोर करते हैं।
एक और सच दोनों साथ भी हो सकते हैं, कहने से तात्पर्य है कई बार हार्ट अटैक के दौरान दिल की धड़कन बिगड़ जाती है और मरीज कार्डियक अरेस्ट में चला जाता है, इसलिए हर हार्ट अटैक सुरक्षित नहीं होता।
हार्ट अटैक- समय मिल सकता है
कार्डियक अरेस्ट- समय नहीं मिलता
इसलिए डॉक्टर कार्डियक अरेस्ट को ज्यादा खतरनाक मानते हैं।
क्या जान बच सकती है? हां, लेकिन… कार्डियोलॉजिस्ट कहते हैं.. अगर तुरंत CPR दिया जाए, तो जान बच सकती है... जानें क्या करें
- छाती को दबाना (CPR)
- कृत्रिम सांस देना
- AED मशीन से शॉक देना
- हर सेकंड की देरी खतरनाक हो सकती है
सबसे बड़ी गलती: शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करना
- हल्की थकान
- धड़कन का अनियमित होना
- सांस फूलना
- ये छोटे संकेत बड़े खतरे की शुरुआत हो सकते हैं।
दिल की सेहत पर नजर रखने और जान बचाने आप क्या कर सकते हैं?
- नियमित हेल्थ चेकअप (ECG, BP, लिपिड प्रोफाइल)
- एक्टिव लाइफस्टाइल
- तनाव को नियंत्रित करना
- CPR सीखना
एक्सप्लेनर: क्या कोविड वैक्सीन है जिम्मेदार?
कोरोना के बाद अचानक मौतों की खबरों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर अक्सर इसे वैक्सीन से जोड़कर देखा जाता है।
मेडिकल साइंस क्या कहता है?
दुनिया भर की बड़ी स्टडीज या रिसर्च की बात की जाए, तो इस बात पर सहमति दी जा सकती है कि कोविड संक्रमण दिल पर असर डाल सकता है, लेकिन वैक्सीन को अचानक मौतों का कारण मानने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। यहां जानें अब तक की गईं स्टडीज में क्या कहती हैं रिपोर्ट्स….
- अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) की रिपोर्ट में पाया गया कि कोविड संक्रमण के बाद हार्ट अटैक, स्ट्रॉक और कार्डियक अरेस्ट जैसी दिल से जुड़ी जटिलताओं का बढ़ सकता है।
- नेचर मेडिसिन (2022 VA Study-USA) को सबसे चर्चित रिपोर्ट माना जाता है। इसमें प्रकाशित एक बड़ी स्टडी के अनुसार, कोविड संक्रमण के बाद लंबे समय तक दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ा है।
- सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक वैक्सीन के बाद मायोकार्डाइटिस के कुछ दुर्लभ मामले सामने आए, लेकिन यह जोखिम बेहद कम पाया गया।
- WHO के मुताबिक कोविड संक्रमण खुद ही दिल के लिए ज्यादा खतरनाक है, वैक्सीन के जोखिम से कहीं ज्यादा गंभीर
- ICMR की स्टडी में वैक्सीन और अचानक मौतों के बीच कोई ठोस या सीधा संबंध नहीं पाया गया।
- The Lancet के मुताबिक कोविड दिल की मांसपेशियों में सूजन का कारण बन सकता है। लेकिन वैक्सीन की तुलना में संक्रमण ज्यादा जोखिम भरा।
कुल मिलाकर साफ है कि डर की असली वजह वैक्सीन नहीं, बल्कि बदलती लाइफस्टाइल और छिपी हुई बीमारियां ही हैं। जिन्हें अक्सर नजरअंदाज किया जा रहा है।
अंत में एक सवाल…
दिल की बीमारी अब उम्र नहीं देख रही…सवाल ये है कि, क्या आप अपने दिल की आवाज सुन रहे हैं?
अगर नहीं आप अब भी अपने दिल की आवाज नहीं सुन रहे हैं, तो आपका दिल दगा देगा या नहीं, क्या हैं प्रीवेंशन टिप्स... जानने के लिए जुड़े रहें patrika.com से जहां dil ka sach series part 9 में हमारे हेल्थ एक्सपर्ट्स आपको बताएंगे हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट जैसी दिल की गंभीर बीमारियों से सेफ कैसे रहें...