Patrika Special News

Heat Dome in Europe: 50 से ज्यादा लोगों की मौत, जानिए क्या है ओमेगा ब्लॉक और क्या भारत में भी बन सकता है ऐसा खतरा?

Heat Dome: यूरोप में पिछले कुछ दिनों से अचानक तापमान में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। फ्रांस में हालात सबसे ज्यादा खराब हो चुके हैं। अब तक वहां 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। आइए जानते हैं क्या होता है हीट डोम?
6 min read
Jun 25, 2026
Heat Dome Omega block heat dome over europe
यूरोप में हीट डोम बरपा रहा है कहर (Photo : Xinhua via IANS)

Heat Dome 2026: यूरोप में कुछ देशों तापमान 40-44 डिग्री को पार कर गया। इसे दुर्लभ हीट डोम (Heat Dome) कहा जा रहा है। जाहिर सी बात है कि यूरोपीय देश सामान्य तौर पर कम तापमान के लिए जाने जाते हैं, लेकिन हीट डोम के चलते पूरे यूरोप में तापमान जानलेवा स्तर तक पहुंच गया। गर्मी से बचने के लिए लोग नदियों, झीलों और नहरों में गए और डूब गए। बताया जा रहा है कि फ्रांस में पानी में डूबने से 48 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि मौत का कुल आंकड़ा 50 पार कर चुका है। स्पेन में भी हीट स्ट्रोक से दो लोगों की मौत हो गई। आइए जानते हैं कि हीट डोम क्या होता है (What is Heat Dome) और भारत में भी यह स्थिति बन सकती है?

यूरोप के कई देशों में स्कूलों में छुट्टी घोषित

यूरोप के कई देशों फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन और इटली में प्रचंड गर्मी के चलते स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है। लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं कर पा रहे जिसके चलते यात्रा और पर्यटन काफी हदतक प्रभावित हो रहा है। वहां प्रचंड गर्मी विपदा की तरह आई है। इसके चलते यूरोप में खेती, बिजली की खपत और आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव डाल रही है। दरअसल, गर्मी के कहर से मरने वालों के आंकड़े अभी बढ़ सकते हैं क्योंकि इस समय खासतौर पर बुजुर्गों में हीट स्ट्रोक और हार्ट अटैक के आ रहे मामले की वजह बाद में सामने आएगी।

यूरोप में झुलसाने वाली पड़ रही है गर्मी

फ्रांस में कई इलाकों का तापमान 44 डिग्री सेल्सियस पार कर गया। यह बताया जा रहा है कि कई इलाकों में तापमान सामान्य से 18 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया। इसका मतलब यह हुआ कि जून में यूरोप का सामान्य तापमान 25-26 डिग्री के आसपास रहता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अभी यूरोप को निकट भविष्य में इससे राहत नहीं मिलने वाली है। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकती है। फ्रांस में तापमान रिकॉर्ड शुरू होने के बाद 24 जून 2026 को पिछले 8 दशकों का सबसे गर्म दिन के रूप में दर्ज किया गया। फ्रांस में बुधवार को कई इलाकों को तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वर्ष 2003 में यूरोप में विनाशकारी गर्म हवा के थपेड़ों के ​चलते करीब 80 हजार मौतें हुई थीं।

परमाणु रिएक्टरों के उत्पादन में आई कमी

फ्रांस में अबतक लाखों मुर्गियों की मौत हो चुकी है। वहीं किसानों ने फसलों की कटाई दिन की बजाय रात में कर रहे हैं। फ्रांस, जो परमाणु ऊर्जा पर काफी निर्भर है, को कई परमाणु रिएक्टरों का उत्पादन कम करना पड़ा क्योंकि रिएक्टरों को ठंडा करने वाली नदियों का पानी बहुत गर्म हो गया। फ्रांस की ऊर्जा कंपनी EDF के आंकड़ों के अनुसार, परमाणु बिजली उत्पादन में लगभग 4.1 गीगावाट की कमी आई, जो देश की कुल बिजली मांग का करीब 7 प्रतिशत है।

80 साल में सबसे ज्यादा गर्मी की गई रिकॉर्ड

फ्रांस में मौसम रिकॉर्ड शुरू होने के लगभग 80 साल बाद सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया। दक्षिण-पश्चिमी शहर पिसोस में तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। देश के 50 से अधिक विभागों में सबसे उच्च स्तर की मौसम चेतावनी जारी की गई, जबकि बिजली कटौती, स्वास्थ्य आपात स्थिति और बुनियादी ढांचे पर बढ़ते दबाव से निपटने की कोशिश की गई। स्पेन, पुर्तगाल, स्विट्जरलैंड, लक्जमबर्ग और जर्मनी में भी उच्च स्तर की गर्मी की चेतावनी जारी की गई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) लगातार चेतावनी देता रहा है कि यूरोप का तापमान वैश्विक औसत से दोगुनी गति से बढ़ रहा है, जिससे अत्यधिक गर्मी की घटनाएं अधिक बार और लंबे समय तक होने लगी हैं।

हीट स्ट्रोक से बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान

इस गर्मी ने पहले ही कई जानें ले ली हैं। फ्रांस के अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में कम से कम 48 लोगों की डूबने से मौत हुई है, क्योंकि लोग गर्मी से राहत पाने के लिए नदियों, नहरों और अन्य जल स्रोतों में उतर रहे थे। वहीं, दो छोटे बच्चों की भी मौत हो गई, जिन्हें भीषण गर्मी में खड़ी कार के अंदर छोड़ दिया गया था। स्पेन में तापमान 40 डिग्री से ऊपर चले जाने से दो बुजुर्गों की हीट स्ट्रोक से मौत हो गई।

भीषण गर्मी के चलते ब्रिटेन में रेल की स्पीड हुई कम

ब्रिटेन के मौसम विभाग के अनुसार, देश के इतिहास में जून महीने में यह दूसरा मौका है जब जून महीने में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ रही है। रिकॉर्ड तापमान के चलते स्कूल बंद कर दिए गए हैं। स्वास्थ्य संबंधी अलर्ट जारी कर दिए गए हैं। अत्यधिक गर्मी के कारण रेल की पटरियों के फैलने की आशंका के चलते अधिकतम गति कम कर दी है। इसके साथ लंदन और पेरिस के बीच रेल सेवा 'यूरोस्टार' की कई सेवाएं रद्द कर दी गई हैं।

हीट डोम कैसे बन रही सामान्य जीवन में बाधा?

  • लंदन में बकिंघम पैलेस के बाहर होने वाले सदियों पुराने चेंजिंग ऑफ द गार्ड समारोह में भी बदलाव किया गया।
  • पेरिस के एफिल टॉवर पर्यटकों के लिए कम समय के लिए खोले जा रहे हैं।
  • वहीं नीदरलैंड में आउटडोर गेम्स के कई आयोजनों को रद्द कर दिया गया है।
  • बेल्जियम में ब्रुसेल्स के पास एक प्राइमरी स्कूल ने छात्रों को गर्मी से राहत दिलाने के लिए फाइनल परीक्षाएं एक चर्च में आयोजित कराईं।
  • स्विट्जरलैंड ने लोगों को गर्मी से राहत देने के लिए एयर-कंडीशन वाले सिनेमाघर और सार्वजनिक स्थान खोले।
  • यूरोपीय देशों में औद्योगिक कल-कारखानों में मजदूरों से दिन की बाजय रात में काम लिया जा रहा है।
  • ब्रिटेन में सनस्क्रीन की बिक्री 70 प्रतिशत से अधिक बढ़ने की उम्मीद है। आइसक्रीम और फ्रोजन उत्पादों की बिक्री भी बढ़ रही है।
  • कई बड़े यूरोपीय शहरों में पंखे और पोर्टेबल एयर कंडीशनर तेजी से खत्म हो गए हैं।

क्या होता है हीट डोम?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह संकट एक दुर्लभ वायुमंडलीय घटना 'ओमेगा ब्लॉक' (Omega Block) या 'हीट डोम' के कारण पैदा हुआ है। इस मौसम प्रणाली में उच्च दबाव वाले क्षेत्र में गर्म हवा फंस जाती है। इससे तापमान लगातार बढ़ता रहता है और ठंडी हवा अंदर प्रवेश नहीं कर पाती। यह हालात लंबे समय तक या कई दिनों तक बनी रह सकती है। इंग्लैंड के रीडिंग स्थित रॉयल मेटियोरोलॉजिकल सोसाइटी के अनुसार, यह उच्च दबाव प्रणाली एक बर्तन के ढक्कन की तरह काम करती है। यह हवा को ऊपर उठने से रोक देती है। इसका मतलब है कि पृथ्वी की सतह के पास मौजूद गर्म हवा ऊपर नहीं जा पाती और बादल नहीं बन पाते। बादल कम होते हैं तो ज्यादा धूप जमीन तक पहुंचती है, जिससे जमीन लगातार गर्म होती जाती है। इसे आप साइकिल में हवा भरने वाले पंप की तरह समझ सकते हैं।

कैसे यूरोप के ऊपर बना हीट डोम?

हीट डोम (Heat Dome) दुनिया भर में कहीं न कहीं बनते रहते हैं और इस सप्ताह यूरोप के ऊपर बना हीट डोम ब्रिटेन, स्पेन और फ्रांस में कई दिनों तक लगभग रिकॉर्ड स्तर की गर्मी को बनाए हुए है। इस साल दूसरी बार पश्चिमी और मध्य यूरोप के कई हिस्सों में लोग लंबे समय तक चलने वाली भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं। इस सप्ताह जून महीने के तापमान के कई रिकॉर्ड टूटने की संभावना है। यह गर्मी की लहर यूरोप के ऊपर बने एक मजबूत उच्च दबाव वाले क्षेत्र (High Pressure System) के कारण पैदा हुई है। इसी घटना को आमतौर पर 'हीट डोम' कहा जाता है।

क्या भारत में भी बन सकती है हीट डोम जैसी स्थिति

भारत में हीटवेव या लू के दिनों में साल-दर-साल इजाफा हो रहा है। यहां लू से मरने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। यूरोप में जहां सर्दियों के दिनों में स्कूलों में लंबी छुट्टियां होती हैं, वहीं भारत के ज्यादातर राज्यों में गर्मी की छुट्टियां दी जाती हैं। भारत में पहाड़ी राज्यों में सर्दियों स्कूलों में लंबी छुट्टी पड़ती है। इन राज्यों में एक-दो दशकों को छोड़ दें तो यहां की गर्मियां सुहावना होती थीं, लेकिन अब वहां भी गर्मी से बचने के लिए पंखे, कूलर और एसी का चलन बढ़ता जा रहा है। भारत में भी हीट डोम जैसी स्थिति बनती है। यहां के मौसम वैज्ञानिक इसे 'हीट डोम' कहने के बजाय हीटवेव (Heatwave) कहते हैं। ‘फ्रंटियर्स इन एनवायरनमेंटल हेल्थ’ में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बर्कले के शोधकर्ताओं के प्रकाशित एक लेख के अनुसार, भारत में एक दिन की भीषण लू चलने पर करीब 3,400 लोगों की जान जा सकती है, जबकि 5 दिन लगातार हीटवेव जारी रहने पर यह आंकड़ा 30,000 तक पहुंच सकता है।

Updated on:
25 Jun 2026 04:21 pm
Published on:
25 Jun 2026 03:21 pm