How Heat Wave Hit the Indian economy : क्लाइमेट चेंज का प्रभाव हम भयंकर गर्मी के रूप में देख रहे हैं। इस कारण वर्ल्ड बैंक ने दुनिया भर में नौकरी जाने का खतरा बताया है। सबसे अधिक खतरा भारत को है। साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी सही संकेत नहीं हैं। पत्रिका की ग्राउंड रिपोर्ट में पढ़िए जमीनी हकीकत।

How Heat Wave Hit the Indian economy :"गर्मी के कारण तो महीने में 10 दिन बीमार ही पड़ जाते हैं, जो कमाया था वह दवाई-गोली में लग गया। घर कैसे चलाएं, काम कैसे करें… समझ नहीं आता है।" जयपुर के खाटू श्याम सर्किल, जगतपुरा (राजस्थान) पर एक मजदूर ने पत्रिका के रवि गुप्ता के साथ बातचीत में अपना दर्द बयां किया।
आपको भले ही यह एक मजदूर की कहानी लगे, लेकिन देश के लाखों मजदूरों के हालात ऐसे ही हैं। चौक-चौराहे के दुकानदार और ठेले वाले से लेकर ऑटो चलाने वाले तक, सब गर्मी की मार झेल रहे हैं। क्लाइमेट चेंज के कारण बीमार पड़ना काम को ठप कर रहा है। यह सबकुछ हमारी अर्थव्यवस्था को पीछे धकेलने का काम कर रहा है।
इससे पता चलता है कि गर्मी का असर केवल शरीर पर ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी बुरी तरह पड़ रहा है। दास और सोमनाथन की 2024 की रिपोर्ट ने बताया भी था कि औसत तापमान में 1 डिग्री की वृद्धि से आय में लगभग 16% की कमी आई थी। वर्ल्ड बैंक 2022 का हवाला देते हुए आरबीआई (RBI) ने एक रिपोर्ट में बताया था कि अगर हीटवेव इसी तरह बढ़ती रही, तो वैश्विक स्तर पर 8 करोड़ नौकरियां जा सकती हैं, जिनमें से 3.4 करोड़ नौकरियां अकेले भारत में खत्म हो सकती हैं। इसका मतलब है कि सबसे अधिक खतरा हमें ही है।
साथ ही जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक अर्थव्यवस्था को अपनी जीडीपी का 2.8 प्रतिशत नुकसान हो सकता है। वहीं, अत्यधिक गर्मी और उमस की स्थिति से श्रम घंटों के नुकसान के कारण 2030 तक भारत की जीडीपी का 4.5 प्रतिशत हिस्सा जोखिम में पड़ सकता है।
हीटवेव और बढ़ते तापमान का भारत के मजदूरों, व्यवसायों और आम आदमी की आय पर गहरा और विनाशकारी प्रभाव पड़ रहा है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सही संकेत नहीं है, क्योंकि अत्यधिक गर्मी के कारण मजदूरों के काम के घंटे और उत्पादकता (अनौपचारिक और मैन्युफैक्चरिंग दोनों सेक्टर्स में) घट रही है।
greenandresilienteconomics.org की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 80% रोजगार अनौपचारिक क्षेत्र से आते हैं। 2019 की गर्मियों में 400 अनौपचारिक मजदूरों पर किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, नमी और गर्मी के प्रभाव से तापमान में 1 डिग्री की वृद्धि होने पर मजदूरों की आय में लगभग 19% की गिरावट दर्ज की गई।
सोनू (सब्जी विक्रेता, जगतपुरा, जयपुर) ने पत्रिका को बताया, हरी सब्जी सुबह से शाम तक में सूखकर तौल में कम हो जाती है। इसके अलावा जो बच जाती है, वह अगले दिन बिक नहीं पाती। साथ ही केला जैसे फल जल्दी पककर खराब हो जाते हैं। इस कारण मुनाफा तो छोड़िए, लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। ऊपर से गर्मी लगने के कारण महीने में कई बार बीमार पड़ जाते हैं। सर्दी के मुकाबले गर्मी में सब्जी का बिजनेस नुकसान पहुंचा रहा है।
बैंक ऑफ बड़ौदा आर्थिक अनुसंधान रिपोर्ट और बार्कलेज रिपोर्ट के मुताबिक, हीटवेव का असर मौसमी और बारहमासी फसलों, सब्जियों और पशुधन पर पड़ रहा है, जिससे खाद्य उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था में महंगाई, विशेषकर सब्जियों की कीमतें बढ़ने की चिंताएं बनी हुई हैं।
अनौपचारिक क्षेत्र के साथ-साथ देखिए कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर किस तरह से संकट की ओर बढ़ रहा है।
विश्व बैंक 2022, जिसका हवाला आरबीआई की रिपोर्ट ने दिया है, के अनुसार 2030 तक गर्मी के तनाव से जुड़ी उत्पादकता में गिरावट के कारण वैश्विक स्तर पर 8 करोड़ नौकरियां जा सकती हैं, जिनमें से 3.4 करोड़ नौकरियां केवल भारत से होंगी।
सोमनाथन और अन्य की 2021 की रिपोर्ट बताती है कि जलवायु नियंत्रण के अभाव में गर्म दिनों में मजदूरों की उत्पादकता कम हो जाती है। फॉर्मल मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में तापमान में प्रति 1 डिग्री की वृद्धि पर उत्पादन में लगभग 2% का नुकसान होता है।
BMJ पर जून 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के एक बड़े हिस्से में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाने से आई भीषण हीटवेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जलवायु नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, भारत के विभिन्न हिस्से भीषण गर्मी और उससे जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यह गर्मी हम सभी के लिए बहुत कठिन है और मैं आप सभी से यथासंभव सावधानी बरतने का आग्रह करता हूं। ऐसे समय में आपकी थोड़ी सी दयालुता बहुत काम आती है।
उनकी यह अपील तब आई जब उत्तर और मध्य भारत के बड़े हिस्से रिकॉर्ड तोड़ तापमान में झुलस रहे थे।
उत्तर प्रदेश के बांदा शहर में हाल ही में तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
ग्लोबल हीट रिकॉर्ड्स के मामले में भारत तेजी से केंद्र बिंदु बनता जा रहा है। इस महीने की रीयल-टाइम वैश्विक मौसम रैंकिंग से पता चला है कि दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में से 95 शहर भारतीय हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो सरकारी नीतियां जमीनी स्तर पर ठोस नहीं दिख रही हैं।
अगर सरकार समय रहते ठोस नीति के साथ सामने नहीं आती है, तो वर्ष 2047 तक भारत का 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का सपना साकार होना मुश्किल हो सकता है। वाकई, क्लाइमेट चेंज पर भी मोदी सरकार का सख्त प्रहार जरूरी है।