Helium Shortage in India: हीलियम की कमी से स्वास्थ्य क्षेत्र में घबराहट सी पैदा हो रही है। भारत में इसका विकल्प भी ढूंढा जा रहा है। हीलियम गैस के क्या उपयोग हैं? यह कहां से आयात किया जा रहा है? ऐसे सभी सवालों का जवाब यहां पढ़ा जा सकता है।
Helium Shortage in India : हीलियम एक ऐसी गैस जिसके बारे में या तो लोग नहीं जानते हैं या जो जानते हैं, उनमें से अधिकतर को यह पता है कि गुब्बारे को फुलाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के चलते इसकी आपूर्ति भारत में कम होती चली गई और अब यह चुपचाप भारत के मेडिकल इमेजिंग इकोसिस्टम को प्रभावित कर रही है। आइए जानते हैं कि हमारे यहां हीलियम गैस की आपूर्ति कहां से होती है और इसका इस्तेमाल किन क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है।
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के चलते भारत में हीलियम की कमी ने मांग और आपूर्ति के संबंधों को हिला कर रख दिया है। जाहिर सी बात है कि आपूर्ति कम होने के चलते इसकी लागत में इजाफा भी कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों को जल्द ही MRI स्कैन की कीमतों में वृद्धि और जांच सेवाओं में देरी का सामना करना पड़ सकता है।
MRI मशीनों को चलाने के लिए बड़े पैमाने पर भारत आयातित हीलियम, खासकर कतर पर निर्भर है। यह गैस MRI सिस्टम में उपयोग होने वाले शक्तिशाली सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट को ठंडा रखने में अहम भूमिका निभाती है। हालांकि, पहले से ही कम भंडार और वैश्विक लॉजिस्टिक्स में बढ़ती अनिश्चितता के चलते अस्पताल और इमेजिंग सेंटर संभावित आपूर्ति संकट के लिए तैयार हो रहे हैं।
हीलियम गैस एक हल्की, निष्क्रिय और बेहद कम तापमान पर भी गैसीय अवस्था में रहने वाली गैस है। इसकी यही विशेषताएं इसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उपयोगी बनाती हैं। इसका सबसे प्रमुख उपयोग चिकित्सा क्षेत्र में होता है। MRI मशीनों में हीलियम का उपयोग सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट को ठंडा रखने के लिए किया जाता है। MRI की मशीनें शरीर के अंदर की सटीक इमेजिंग के लिए जरूरी होती हैं, इसलिए अस्पतालों में हीलियम की मांग लगातार बनी रहती है।
हीलियम गैस को अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में भी उपयोग में लाया जाता है। ISRO और NASA जैसे संस्थान रॉकेट के फ्यूल टैंक को प्रेशराइज करने और अत्यधिक तापमान को नियंत्रित करने के लिए हीलियम का इस्तेमाल करते हैं। इसके बिना कई अंतरिक्ष मिशन संभव नहीं हैं। हीलियम का उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधान में भी काफी महत्वपूर्ण है। क्रायोजेनिक्स और क्वांटम रिसर्च में बेहद कम तापमान बनाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग में भी हीलियम उपयोगी है। चिप निर्माण के दौरान यह गैस नियंत्रित वातावरण बनाने और उपकरणों को ठंडा रखने में मदद करती है। इसके अलावा फाइबर ऑप्टिक्स और लेजर तकनीक में भी इसका उपयोग होता है।
औद्योगिक क्षेत्र में हीलियम का इस्तेमाल वेल्डिंग में किया जाता है, जहां यह आर्क वेल्डिंग के दौरान सुरक्षा गैस (Shielding Gas) का काम करती है। इसके अलावा, गैस लीक डिटेक्शन (Leak Detection) में भी हीलियम बेहद कारगर है क्योंकि यह बहुत छोटे छिद्रों से भी आसानी से निकल सकती है।
इसके अलावा रोजमर्रा के जीवन में गुब्बारों और एयरशिप्स को उड़ाने में भी हीलियम का उपयोग किया जाता है। हालांकि यह इसका सबसे साधारण उपयोग है, लेकिन इसके पीछे की विज्ञान काफी महत्वपूर्ण है।
कतर अकेले दुनिया की लगभग एक-तिहाई हीलियम आपूर्ति करता है। यही वजह है कि मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव के चलते इस क्षेत्र में किसी भी तरह का व्यवधान सीधे वैश्विक उपलब्धता को प्रभावित करता है। मेडिकल टेक्नोलॉजी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MTaI) के चेयरमैन पवन चौधरी ने मीडिया से बताया कि मध्य पूर्व क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता बने रहने MRI सेवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रभावित कर सकती है और बाजार से पहले ही कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं।
हीलियम गैस का उत्पादन अलग से नहीं होता, बल्कि यह लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का एक उप-उत्पाद है। यही वजह है कि एलएनजी के उत्पादन में उतार-चढ़ाव सीधे हीलियम की उपलब्धता को प्रभावित करते हैं। कतर में LNG संचालन में आई मौजूदा बाधाएं अब वैश्विक हीलियम सप्लाई को प्रभावित कर रही हैं।
ईरान ने कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी में एलएनजी हब (Ras Laffan gas facility Attacked) पर 2 मार्च को मिसाइल और ड्रोन से हमला कर दिया। कतर ने एलएनजी के उत्पादन पर अस्थायी तौर पर रोक लगा दी थी। यह दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यात केंद्र है। इससे रास लफान से 17 फीसदी उत्पादन में कमी आ गई। वहीं ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड (South Pars gasfield attacked by Israel) पर इजराइल ने 18 मार्च को हमला कर दिया। इस हमले के चलते ईरान की 10-12 फीसदी गैस उत्पादन क्षमता में कमी आई है। इसके अलावा होमुर्ज जलडमरूमध्य से सप्लाई में काफी बाधा आ रही है।
हीलियम की कमी के विकल्प ढूंढे जा रहे हैं। कई मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनियों ने हीलियम-फ्री MRI सिस्टम विकसित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सीमेंस हेल्थकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर हरिहरन सुब्रमणियन ने मीडिया को बताया कि कंपनी ने पहले ही ड्राई-कूल तकनीक पर आधारित हीलियम-फ्री MRI सिस्टम पेश किए हैं। यह तकनीक हीलियम पर निर्भरता को काफी कम करती है और सेवा बाधित होने के जोखिम को भी घटाती है। वहीं, बेंगलुरु स्थित मेडटेक स्टार्टअप वॉक्सलग्रिड्स ने ऐसे इमेजिंग सिस्टम विकसित कर लिए हैं, जिसकी हीलियम पर निर्भरता बिल्कुल भी नहीं है।
मध्य पूर्व क्षेत्र में एक महीने से चल रहे तनाव का व्यापक असर भारत के मेडिकल डिवाइस उद्योग के अन्य हिस्सों पर भी दिखने लगा है। निर्माताओं ने चेतावनी दी है कि IV बैग और लाइन, यूरिन बैग, कैनुला और सिरिंज जैसे जरूरी अस्पताल उपभोग्य सामग्रियों की आपूर्ति अगले महीने तक प्रभावित हो सकती है। वर्तमान में कई निर्माता केवल 15–20 दिनों के सीमित स्टॉक पर काम कर रहे हैं। यदि सप्लाई चेन अस्थिर बनी रहती है, तो अस्पतालों को जल्द ही इन आवश्यक सामग्रियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है।