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Hematuria Infection : यूरिन में खून आना आम इन्फेक्शन है या कैंसर का संकेत? जानिए कारण, जांच और इलाज

Hematuria Infection: पेशाब में खून आना (Hematuria) किसी गंभीर अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है। क्या यह सामान्य यूटीआई (UTI), किडनी की पथरी है या कैंसर जैसी बड़ी बीमारी की चेतावनी? जानिए हेमट्यूरिया के मुख्य कारण, लक्षण, जरूरी डायग्नोस्टिक टेस्ट और इसका सटीक इलाज। बिना दर्द के ब्लीडिंग होने पर इसे नजरअंदाज करने की भूल बिल्कुल न करें। अपनी सेहत से जुड़े हर बड़े सवाल का जवाब पाने के लिए तुरंत एक्सपर्ट डॉक्टर की यह सलाह पढ़ें।

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May 25, 2026
पेशाब में खून आने को हल्के में ना लें। यह गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं। (Photo : AI Generated)

Hematuria Infection: यूरिन (पेशाब) का रंग आमतौर पर हल्का पीला या साफ होता है। लेकिन अगर अचानक यूरिन का रंग लाल, गुलाबी या गहरा भूरा दिखने लगे, तो किसी भी इंसान का घबरा जाना लाजमी है। मेडिकल साइंस में यूरिन में खून आने की इस स्थिति को Hematuria (हेमट्यूरिया) कहा जाता है। यह कोई खुद में बीमारी नहीं है, बल्कि शरीर के अंदरूनी अंगों (जैसे किडनी, ब्लैडर या यूरेटर) में चल रही किसी समस्या का एक बड़ा संकेत (Symptom) है। आइए इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं कि हेमट्यूरिया क्यों होता है, इसकी जांच कैसे की जाती है और इसका इलाज क्या है।

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What is Hematuria: क्या है हेमट्यूरिया और यह कितने प्रकार का होता है?

जब हमारे यूरिनरी ट्रैक्ट से ब्लड सेल्स (Red Blood Cells) लीक होकर पेशाब में मिल जाते हैं, तो उसे हेमट्यूरिया कहते हैं। डॉक्टर इसे मुख्य रूप से दो भागों में बांटते हैं।

  • ग्रॉस हेमट्यूरिया (Gross Hematuria): इसमें यूरिन में खून की मात्रा इतनी होती है कि इसे नग्न आंखों (Naked Eyes) से साफ देखा जा सकता है। पेशाब का रंग गुलाबी, चमकीला लाल या कोला (Cola) जैसा दिखाई देता है।
  • माइक्रोस्कोपिक हेमट्यूरिया (Microscopic Hematuria): इसमें खून की मात्रा बहुत कम होती है, जिसे सामान्य आंखों से नहीं देखा जा सकता। यूरिन का रंग बिल्कुल नॉर्मल दिखता है, लेकिन जब लैब में यूरिन टेस्ट (Urinalysis) या माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है, तब आरबीसी (RBCs) का पता चलता है।

Causes of Hematuria : यूरिन में खून आने के मुख्य कारण

यूरिनरी सिस्टम में किडनी, यूरेटर (किडनी से ब्लैडर तक जाने वाली नली), यूरिनरी ब्लैडर (पेशाब की थैली) और यूरेथ्रा (पेशाब बाहर निकालने वाली नली) शामिल होते हैं। इनमें से किसी भी हिस्से में गड़बड़ी होने पर खून आ सकता है। इसके मुख्य कारण हैं।

  • यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) : यह हेमट्यूरिया का सबसे आम कारण है। बैक्टीरिया यूरेथ्रा के रास्ते ब्लैडर में प्रवेश कर जाते हैं और वहां इन्फेक्शन फैलाते हैं। महिलाओं में यह समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक देखी जाती है।
  • किडनी या ब्लैडर में पथरी (Stone) : किडनी या ब्लैडर में मिनरल्स के जमा होने से छोटे-छोटे क्रिस्टल या पथरी बन जाती है। जब ये पथरी यूरिनरी ट्रैक की दीवारों से टकराती है या वहां फंसती है, तो अंदरूनी छिलन के कारण ब्लीडिंग होने लगती है।
  • प्रोस्टेट का बढ़ना (Enlarged Prostate / BPH) : उम्र बढ़ने के साथ (अक्सर 50 साल के बाद) पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार बढ़ने लगता है। यह बढ़ा हुआ प्रोस्टेट यूरेथ्रा को दबाता है, जिससे पेशाब करने में दिक्कत होती है और कभी-कभी ब्लीडिंग शुरू हो जाती है।
  • किडनी इन्फेक्शन (Pyelonephritis) : जब यूटीआई (UTI) का बैक्टीरिया ऊपर की तरफ बढ़कर किडनी तक पहुंच जाता है, तो उसे किडनी इन्फेक्शन कहते हैं। इसमें हेमट्यूरिया के साथ-साथ तेज बुखार और पीठ में दर्द भी होता है।
  • किडनी की बीमारियां (Kidney Diseases) : ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (Glomerulonephritis) जैसी बीमारियों में किडनी का वो हिस्सा सूज जाता है जो खून को फिल्टर करता है। इसके कारण भी माइक्रोस्कोपिक ब्लीडिंग हो सकती है।
  • कैंसर (Cancer) : अगर उम्र 50 से अधिक है और बिना किसी दर्द के यूरिन में खून आ रहा है, तो यह एडवांस स्टेज के किडनी, ब्लैडर या प्रोस्टेट कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है।
  • दवाइयों का साइड इफेक्ट : खून पतला करने वाली दवाइयां (जैसे Aspirin, Heparin, Warfarin) या कुछ एंटी-कैंसर दवाइयों (जैसे Cyclophosphamide) के सेवन से भी पेशाब में खून आ सकता है।

Symptoms of Hematuria: हेमट्यूरिया के लक्षण

  • पेशाब करते समय तेज जलन या दर्द होना (Dysuria)
  • बार-बार पेशाब आने की इच्छा होना, लेकिन खुलकर न आना।
  • पीठ के निचले हिस्से में, पेट में या पसलियों के नीचे तेज दर्द (पथरी का संकेत)।
  • तेज बुखार आना और उल्टी जैसा महसूस होना (किडनी इन्फेक्शन का संकेत)।
  • पेशाब में खून के थक्के (Blood Clots) आना।
  • अचानक वजन कम होना या अत्यधिक थकान महसूस होना।

Diagnosis of Hematuria: हेमट्यूरिया का निदान कैसे होता है?

  • यूरिन टेस्ट (Urinalysis और Urine Culture): इस टेस्ट से यूरिन में रेड ब्लड सेल्स (RBC), व्हाइट ब्लड सेल्स (WBC) और प्रोटीन की मात्रा जांची जाती है।
  • Urine Culture: इससे यह साफ होता है कि यूरिन में कौन सा बैक्टीरिया मौजूद है, ताकि सही एंटीबायोटिक दी जा सके।

ब्लड टेस्ट (Blood Tests

  • CBC (Complete Blood Count): इन्फेक्शन का स्तर और शरीर में खून की कमी (Anemia) को जांचने के लिए।
  • KFT (Kidney Function Test): ब्लड यूरिया और क्रिएटिन (Creatine) के स्तर से किडनी की कार्यक्षमता का पता लगाया जाता है।
  • इमेजिंग टेस्ट (Imaging Tests)Ultrasound (USG KUB): सोनोग्राफी के जरिए किडनी, यूरेटर और ब्लैडर की तस्वीरें ली जाती हैं, जिससे पथरी या किसी गांठ का पता चलता है।
  • CT Scan या MRI: अगर अल्ट्रासाउंड में स्थिति स्पष्ट न हो, तो सीटी स्कैन के जरिए अंदरूनी अंगों की बारीक और थ्री-डी (3D) तस्वीरें ली जाती हैं ताकि ट्यूमर या अन्य गहरी समस्याओं को पकड़ा जा सके।
  • सिस्टोस्कोपी (Cystoscopy) : यह एक बेहद महत्वपूर्ण जांच है। इसमें डॉक्टर एक पतली, लचीली नली (जिसके आगे कैमरा लगा होता है) को यूरेथ्रा के रास्ते ब्लैडर के अंदर डालते हैं। इससे ब्लैडर की अंदरूनी परत और प्रोस्टेट की लाइव स्थिति स्क्रीन पर दिखाई देती है।

क्या यूरिन का लाल होना हमेशा खून ही होता है? (Pseudo-hematuria)

यह जानना बहुत जरूरी है कि हर बार यूरिन का लाल या गुलाबी दिखना हेमट्यूरिया नहीं होता। इसे स्यूडो-हेमट्यूरिया (Pseudo-Hematuria) कहा जाता है। कुछ खाद्य पदार्थ और दवाइयां भी यूरिन का रंग बदल सकती हैं।

  • डाइट: बहुत ज्यादा मात्रा में चुकंदर (Beets), जामुन, या अधिक फूड कलर वाले खाद्य पदार्थ खाने से यूरिन लाल-गुलाबी हो सकता है।
  • दवाइयां: टीबी (Tuberculosis) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा Rifampin, या कब्ज के लिए ली जाने वाली कुछ दवाइयों से यूरिन का रंग चमकीला नारंगी या लाल हो जाता है।
  • मासिक धर्म (Periods): महिलाओं में पीरियड्स के दौरान होने वाली ब्लीडिंग कई बार यूरिन सैंपल में मिक्स हो जाती है, जो जांच में भ्रम पैदा कर सकती है।

Prevention Tips: बचाव के उपाय और लाइफस्टाइल टिप्स

  • भरपूर पानी पीएं: दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास (2.5 - 3 लीटर) पानी जरूर पीएं। यह यूरिनरी सिस्टम को फ्लश करता है और पथरी बनने से रोकता है।
  • पेशाब को न रोकें: जब भी पेशाब जाने की इच्छा हो, तुरंत जाएं। लंबे समय तक यूरिन रोकने से बैक्टीरिया पनपते हैं और इन्फेक्शन का खतरा बढ़ता है।
  • हाइजीन (साफ-सफाई) का ध्यान रखें: विशेषकर महिलाओं को टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद आगे से पीछे की तरफ (Front to Back) सफाई करनी चाहिए, ताकि मोशन का इन्फेक्शन मूत्र मार्ग तक न पहुंचे।
  • धूम्रपान छोड़ें: तंबाकू और सिगरेट का सेवन ब्लैडर कैंसर के मुख्य कारणों में से एक है। धूम्रपान छोड़ने से यूरिनरी सिस्टम के कैंसर का खतरा बहुत कम हो जाता है।

पत्रिका के सवाल-जवाब डॉ. अमित सोनी के साथ

लोग यूरिन में खून देखने के बाद भी झिझक या डर के मारे डॉक्टर के पास नहीं आते। शुरुआती ब्लीडिंग को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है?

यूरिन में खून दिखने पर उसे सामान्य संक्रमण समझकर या डर के मारे नजरअंदाज करना बेहद खतरनाक हो सकता है। इसे एक 'वार्निंग साइन' माना जाता है। शुरुआती ब्लीडिंग भले ही अपने आप बंद हो जाए, लेकिन इसके पीछे किडनी या ब्लैडर का ट्यूमर, गंभीर पथरी, या किडनी फेलियर जैसी बड़ी बीमारियां हो सकती हैं। कैंसर जैसी स्थितियों में शुरुआती दौर में दर्द नहीं होता, जिससे मरीज धोखा खा जाते हैं। यदि पहली ही बार में जांच न कराई जाए, तो बीमारी अंदर ही अंदर एडवांस स्टेज पर पहुंच जाती है, जहां इलाज जटिल और जानलेवा हो जाता है। इसलिए, पहली बार खून दिखते ही तुरंत यूरोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए।

क्या यूरिन में खून आने का मतलब हमेशा कोई गंभीर बीमारी या कैंसर ही होता है, या इसके कुछ सामान्य और आसानी से ठीक होने वाले कारण भी होते हैं?

नहीं, यूरिन में खून आने का मतलब हमेशा कैंसर या कोई जानलेवा बीमारी नहीं होता। अधिकांश मामलों में इसके पीछे बहुत ही सामान्य और आसानी से ठीक होने वाले कारण होते हैं। इसके सबसे आम कारणों में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI), किडनी या ब्लैडर की छोटी पथरी (Stone), या पुरुषों में उम्र के साथ प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना (BPH) शामिल हैं। कई बार अत्यधिक हैवी वर्कआउट करने या कुछ एंटीबायोटिक्स और खून पतला करने वाली दवाओं के साइड इफेक्ट से भी ऐसा हो सकता है। ये सभी स्थितियां सही समय पर दवाओं या साधारण इलाज से पूरी तरह ठीक हो जाती हैं, इसलिए घबराने की बजाय जांच कराना समझदारी है।

कई बार मरीज शिकायत करते हैं कि उन्हें दर्द तो बिल्कुल नहीं हुआ, बस अचानक एक बार यूरिन में ब्लड दिखा और फिर ठीक हो गया। इस 'पेनलेस ब्लीडिंग' (Painless Hematuria) को इतना गंभीर क्यों माना जाता है?

'पेनलेस ब्लीडिंग' (बिना दर्द के खून आना) को दर्द के साथ आने वाले खून से कहीं अधिक गंभीर माना जाता है। इसका कारण यह है कि इन्फेक्शन या पथरी होने पर यूरिनरी ट्रैक्ट में सूजन और दर्द होता है, लेकिन शुरुआती स्टेज के ब्लैडर, किडनी या प्रोस्टेट कैंसर में कोई दर्द नहीं होता। ऐसी स्थिति में ट्यूमर से केवल एक बार ब्लीडिंग होती है और फिर हफ्तों तक सब सामान्य दिखता है। मरीज इसे ठीक हुआ समझकर बैठ जाते हैं, जिससे कैंसर अंदर ही अंदर एडवांस स्टेज में पहुंच जाता है। इसलिए, बिना दर्द के एक बार भी खून आना सबसे बड़ा खतरे का संकेत है।

महिलाओं और पुरुषों में हेमट्यूरिया के कारणों में क्या अंतर होता है? महिलाओं में होने वाले सामान्य यूटीआई (UTI) और पुरुषों में प्रोस्टेट की समस्या इससे कैसे जुड़ी है?

महिलाओं और पुरुषों में हेमट्यूरिया के मुख्य ट्रिगर्स उनकी शारीरिक संरचना के कारण अलग होते हैं।

  • महिलाओं में छोटी मूत्रनली (Urethra) के कारण बैक्टीरिया आसानी से ब्लैडर तक पहुंच जाते हैं, जिससे यूटीआई ( यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन बहुत आम है। इस इन्फेक्शन में अंदरूनी परत छिलने से यूरिन के साथ खून और तेज जलन होती है।
  • पुरुषों में: 50 की उम्र के बाद प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना इसका सबसे बड़ा कारण है। बढ़ा हुआ प्रोस्टेट यूरिनरी नली को दबाता है, जिससे खून की नसें फट जाती हैं और ब्लीडिंग होती है। पुरुषों में ब्लैडर कैंसर के मामले भी महिलाओं से अधिक देखे जाते हैं।

युवाओं में आजकल जिम, सप्लीमेंट्स और 'हैवी वर्कआउट' का क्रेज बहुत बढ़ गया है। क्या बहुत ज्यादा हैवी एक्सरसाइज या रनिंग से भी यूरिन में खून आ सकता है?

अत्यधिक हैवी वर्कआउट,क्रॉसफ़िट और मैराथन रनिंग से यूरिन में खून आ सकता है। इसे 'रनर हेमट्यूरिया' (Runner's Hematuria) या 'एक्सरसाइज-इंड्यूस्ड हेमट्यूरिया' (Exercise-Induced Hematuria) कहते हैं। ऐसा तब होता है जब बहुत ज्यादा दौड़ने या भारी वजन उठाने से मूत्राशय (Urinary Bladder) की दीवारें आपस में बार-बार टकराती हैं, जिससे अंदरूनी चोट लगती है। इसके अलावा, डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) और मांसपेशियों के अत्यधिक टूटने (Rhabdomyolysis) के कारण भी किडनी से ब्लड सेल्स लीक होने लगते हैं। आमतौर पर यह 24 से 48 घंटे आराम करने और भरपूर पानी पीने से ठीक हो जाता है, लेकिन सप्लीमेंट्स के ओवरडोज से किडनी पर पड़ने वाले असर को जांचना भी जरूरी है।

कई बार कुछ खाने-पीने की चीजों (जैसे चुकंदर) या दवाओं (जैसे टीबी की दवा) से भी यूरिन का रंग लाल हो जाता है।'स्यूडो-हेमट्यूरिया' (नकली हेमट्यूरिया) और असली बीमारी के बीच फर्क कैसे समझे?

'स्यूडो-हेमट्यूरिया' (Pseudo-hematuria) और असली बीमारी के बीच का अंतर खाने-पीने की आदतों और प्रयोगशाला जांच से समझा जा सकता है। यदि यूरिन का रंग चुकंदर, जामुन, आर्टिफिशियल फूड कलर या टीबी की दवा (Rifampin ) के कारण बदला है, तो यह केवल 24 से 48 घंटे रहता है और इसमें दर्द, जलन या बुखार जैसे कोई लक्षण नहीं होते। सबसे पुख्ता अंतर 'यूरिन रूटीन टेस्ट' (Urinalysis) से पता चलता है। अगर माइक्रोस्कोपिक जांच में यूरिन के भीतर रेड ब्लड सेल्स (RBCs) नहीं मिलते, तो यह स्यूडो-हेमट्यूरिया है। इसके विपरीत, असली हेमट्यूरिया में आरबीसी की मौजूदगी अनिवार्य रूप से पाई जाती है।

रसोई या डाइट में ऐसे कौन से बदलाव हैं, जो हमारी किडनी और ब्लैडर को हेल्दी रख सकते हैं ताकि हेमट्यूरिया जैसी नौबत ही न आए?

  • पानी की मात्रा: दिनभर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पीएं, ताकि टॉक्सिन (Toxin) बाहर निकलते रहें और यूटीआई या पथरी न बने।
  • नमक पर कंट्रोल: खाने में नमक कम करें। पैकेज्ड फूड, पापड़ और अचार से बचें, क्योंकि ज्यादा नमक किडनी पर दबाव बढ़ाता है।
  • सिट्रस फ्रूट्स: नींबू पानी, संतरा और नारियल पानी को डाइट में शामिल करें। इनमें मौजूद साइट्रेट पथरी बनने से रोकता है।
  • कैफीन और शराब से दूरी: ज्यादा चाय, कॉफी और शराब ब्लैडर को खराब करते हैं, इन्हें सीमित करें।
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