
CG Hidden Waterfalls: छत्तीसगढ़ की पहचान अब सिर्फ घने जंगलों, जनजातीय संस्कृति और चित्रकोट जैसे प्रसिद्ध जलप्रपातों तक सीमित नहीं रहेगी। राज्य सरकार अब उन'हिडन फॉल्स' (छिपे हुए झरनों) को पर्यटन के नक्शे पर लाने की तैयारी में है, जिनके बारे में अब तक स्थानीय ग्रामीणों के अलावा बहुत कम लोग जानते हैं। वन एवं पर्यटन विभाग संयुक्त रूप से ऐसे करीब 32 बरसाती और स्थायी झरनों का रोडमैप तैयार कर रहा है, ताकि उन्हें इको-टूरिज्म के नए केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके। इस पहल का उद्देश्य केवल पर्यटन बढ़ाना नहीं, बल्कि उन इलाकों तक विकास पहुंचाना भी है, जो वर्षों तक नक्सल हिंसा और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मुख्यधारा से दूर रहे।
छत्तीसगढ़ में 65 से अधिक छोटे-बड़े झरने हैं। इनमें से कई चित्रकोट, तीरथगढ़, जतमई और घटारानी की तरह प्रसिद्ध हैं, लेकिन 40 से अधिक झरने आज भी जंगलों और दुर्गम क्षेत्रों में छिपे हुए हैं। सड़क, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ये प्राकृतिक धरोहरें अब तक पर्यटन मानचित्र पर अपनी जगह नहीं बना सकी हैं। अब वन विभाग और पर्यटन विभाग ऐसे झरनों को चिह्नित कर उनकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। रिपोर्ट के आधार पर प्रत्येक स्थल के विकास की योजना बनाई जाएगी।
सरकार की योजना केवल झरनों तक पहुंचने का रास्ता बनाने तक सीमित नहीं है। प्रस्तावित रोडमैप में पर्यटकों के लिए संपूर्ण सुविधाएं विकसित करने की तैयारी है। इनमें शामिल हैं, झरनों तक बेहतर सड़क संपर्क, पार्किंग और वाहन सुविधा, होटल, मोटल और होमस्टे, स्थानीय भोजन और रेस्टोरेंट, पेयजल और बिजली व्यवस्था, प्रशिक्षित स्थानीय गाइड, सुरक्षा और सूचना केंद्र, ऑनलाइन बुकिंग और डिजिटल जानकारी, इको-फ्रेंडली पर्यटन सुविधाएं। उद्देश्य यह है कि पर्यटक प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के साथ सुरक्षित और सुविधाजनक अनुभव भी प्राप्त करें।
बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और सरगुजा के कई जलप्रपात लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों के कारण पर्यटकों की पहुंच से बाहर रहे। कई स्थानों तक जाने का जोखिम होने के कारण स्थानीय लोग भी बाहरी लोगों को वहां जाने की सलाह नहीं देते थे। अब सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और बदले हालात के बाद सरकार इन क्षेत्रों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है। इससे इन इलाकों की नई पहचान बनेगी और विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी।
वन बल प्रमुख एवं पीसीसीएफ अरुण कुमार पाण्डेय ने हाल ही में बीजापुर जिले के नंबी मरका, नीलम तराई और मट्टीमरका जैसे कम चर्चित प्राकृतिक स्थलों का दौरा किया। इंद्रावती नदी के किनारे स्थित इन स्थानों में पर्यटन की अपार संभावनाएं देखते हुए उन्होंने स्थानीय अधिकारियों को इनके विकास का खाका तैयार करने के निर्देश दिए। वन विभाग अब ऐसे अन्य प्राकृतिक स्थलों की भी सूची तैयार कर रहा है।
हिडन फॉल्स के विकसित होने से सबसे बड़ा लाभ स्थानीय ग्रामीणों और जनजातीय समुदायों को मिलने की उम्मीद है। पर्यटन बढ़ने से:
स्थानीय युवाओं को गाइड और ड्राइवर के रूप में रोजगार मिलेगा।
होमस्टे, होटल और छोटे व्यवसाय शुरू होंगे।
हस्तशिल्प, वन उत्पाद और स्थानीय व्यंजनों को नया बाजार मिलेगा।
महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इको-टूरिज्म स्थानीय विकास का मजबूत माध्यम बन सकता है।
पर्यटन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में प्रकृति आधारित पर्यटन के प्रति लोगों की रुचि तेजी से बढ़ रही है।
पर्यटन के आंकड़े
कुल पर्यटन स्थल : 400+
प्रमुख जलप्रपात : 25+
हिडन फॉल्स : 40+
वर्ष 2025 में पर्यटक : 3.18 करोड़ से अधिक
वर्ष 2025 में विदेशी पर्यटक : 1,514
30 जून 2026 तक पर्यटक : 1.06 करोड़ से अधिक
30 जून 2026 तक विदेशी पर्यटक : 639
मानसूनी मौसम में झरनों पर सबसे अधिक पर्यटक पहुंचते हैं, जिससे इन क्षेत्रों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
चित्रकोट
तीरथगढ़
हांदावाड़ा
तामड़ा घूमर
चर्रेमर्रे
अमृतधारा
रमदहा
फिश पॉइंट
टाइगर पॉइंट
जतमई
घटारानी
आने वाले समय में इन प्रसिद्ध झरनों के साथ कई नए 'हिडन फॉल्स' भी पर्यटन मानचित्र पर दिखाई दे सकते हैं।
वन विभाग का मानना है कि जिन स्थानों तक अभी केवल स्थानीय लोग पहुंचते हैं, उन्हें व्यवस्थित तरीके से विकसित कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर लाया जा सकता है। वहीं पर्यटन विभाग का कहना है कि प्रकृति आधारित पर्यटन के विस्तार से छत्तीसगढ़ की अलग पहचान बनेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यदि यह योजना तय समय पर लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ केवल चित्रकोट या तीरथगढ़ के लिए नहीं, बल्कि दर्जनों नए हिडन फॉल्स और इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के लिए भी देश-दुनिया में पहचाना जाएगा।
पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए झरनों तक पहुंच मार्ग बनाने के लिए विभागीय अधिकारियों से जानकारियां मंगाई गई है। ताकि इको टूरिज्म और हिडन फाल्स का विकसित किया जा सकें— अरुण कुमार पाण्डेय, पीसीसीएफ एवं वनबल प्रमुख
मानसूनी सीजन में टूरिस्ट पैलैस खास तौर पर झरनों में पर्यटकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। पर्यटन विभाग की ओर से विशेष व्यवस्था की गई है। साथ ही सुरक्षा के उपाय भी किए गए है। पर्यटकों की सुविधा के लिए गाइड और ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था की गई है। साथ ही हिडन फाल्स को लोगो को रूबरू कराने के लिए उक्त झरनों तक पहुंच मार्ग और अन्य व्यवस्थाएं कराए जाएगी— नीलू शर्मा छ.ग.पर्यटन मंडल के अध्यक्ष