
Stress Changes Poop pattern: क्या किसी जरूरी मीटिंग या एग्जाम से ठीक पहले आपका पेट खराब हुआ है? या फिर किसी बड़ी चिंता के बीच अचानक कब्ज (Constipation) की शिकायत हो गई हो? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। विज्ञान यह साबित कर चुका है कि आपका मानसिक स्वास्थ्य सीधे तौर पर आपकी 'गट हेल्थ' (Gut Health) को कंट्रोल करता है। जब आप स्ट्रेस में होते हैं, तो शरीर का 'फाइट या फ्लाइट' रिस्पॉन्स एक्टिव हो जाता है, जिसका पहला शिकार आपका पाचन तंत्र बनता है। आइए विस्तार से उस 'गट-ब्रेन एक्सिस' के विज्ञान को समझते हैं, जो दिमाग की घबराहट को सीधे आपके पेट तक पहुंचा देता है।
हमारे शरीर में गट-ब्रेन एक्सिस (Gut-Brain Axis) नाम का एक बायो-कम्युनिकेशन नेटवर्क होता है। यह एक ऐसा सीधा रास्ता है] जो हमारे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) को पेट के गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम(Gastrointestinal tract) से जोड़ता है। क्या आप जानते हैं? हमारे पेट में लाखों न्यूरॉन्स (Nerve cells) होते हैं, जो बिल्कुल हमारे दिमाग की तरह ही काम करते हैं। इसी वजह से वैज्ञानिक और डॉक्टर्स पेट को शरीर का दूसरा दिमाग (Second Brain) या एंटरिक नर्वस सिस्टम (Enteric Nervous System or ENS) भी कहते हैं। मुख्य दिमाग (Mental State) में जब भी कोई हलचल होती है, तब मस्तिष्क का दूसरा हिस्सा तुरंत सक्रिय होकर प्रतिक्रिया देने लगता है।
हम जब अत्यधिक तनाव, डर या चिंता में होते हैं, तब हमारा शरीर इसे एक 'खतरे' (Stress Threat) के रूप में देखता है। ऐसे में हमारा स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomic Nervous System) एक्टिव हो जाता है और शरीर को 'फाइट या फ्लाइट' (Fight or Flight) मोड में डाल देता है। इस आपातकालीन स्थिति में शरीर अपनी ऊर्जा को बचाने और खुद को सुरक्षित रखने के लिए री-रूटिंग करता है।
दिल की धड़कनें बढ़ जाती है और खून का प्रवाह (Blood Flow) फेफड़ों और मांसपेशियों की तरफ तेज हो जाता है ताकि आप खतरे से लड़ सकें या भाग सकें।
इस प्रक्रिया में पाचन तंत्र (Digestive System) की तरफ जाने वाला ब्लड फ्लो कम हो जाता है, और पाचन क्रिया सुस्त पड़ जाती है। शरीर को लगता है कि इस संकट के समय खाना पचाना उसकी प्राथमिकता नहीं है।
तनाव में दस्त (Diarrhea) क्यों लग जाते हैं?
स्ट्रेस के दौरान कुछ लोगों की आंतें (Intestines) बहुत ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं। दिमाग जब कोर्टिसोल (Cortisol) और एड्रेनालाईन (Adrenaline) जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स रिलीज करता है, तो ये हार्मोन्स पेट की मांसपेशियों में तेज ऐंठन या संकुचन पैदा करते हैं। इसके कारण बड़ी आंत (Large Intestine) में भोजन और अपशिष्ट (Waste) की मूवमेंट अचानक बहुत तेज हो जाती है। आंतों को वेस्ट में से पानी सोखने का पर्याप्त समय नहीं मिलता। नतीजा यह होता है कि घबराहट या डर के माहौल में व्यक्ति को अचानक लूज मोशन या दस्त लग जाते हैं और बार-बार वॉशरूम भागना पड़ता है।
तनाव के चलतेकुछ लोगों को कब्ज (Constipation) क्यों हो जाता है? इसके मुख्य कारण क्या हैं ?
देखिए, तनाव हर व्यक्ति के शरीर पर एक जैसा प्रभाव नहीं डालता। हमारा दिमाग और हमारी आंतें (Gut-Brain Axis) आपस में बहुत गहराई से जुड़े हैं। कोई व्यक्ति जब मानसिक तनाव या चिंता से गुजरता है, तो शरीर में Cortisol (स्ट्रेस हार्मोन) का स्तर बदल जाता है और हमारा Autonomic Nervous System प्रभावित होता है। यह बदलाव हमारी आंतों की सामान्य लय को पूरी तरह बिगाड़ देता है। इसका नतीजा यह होता है कि कुछ लोगों में तनाव के दौरान आंतों की गति बहुत तेज हो जाती है जिससे उन्हें दस्त लग जाते हैं, जबकि कुछ अन्य लोगों में आंतों की गतिविधि बहुत धीमी पड़ जाती है, जिससे मल धीरे-धीरे आगे बढ़ता है और उन्हें कब्ज (Constipation) की शिकायत हो जाती है।
तनाव के अलावा भी कब्ज के कई प्रमुख कारण हैं जैसे
आम तौर पर लोग कब्ज को बहुत हल्की समस्या मानते हैं और घरेलू नुस्खे अपनाते रहते हैं। एक डॉक्टर के तौर पर आप कब सलाह देंगे कि अब डॉक्टर के पास जाना ही चाहिए?
क्या वाकई हमारा पेट शरीर का 'दूसरा दिमाग' है? पेट में ऐसा क्या होता है, जो सीधे हमारे मूड को भांप लेता है?
यह बात वैज्ञानिक रूप से शत-प्रतिशत सही है। मेडिकल साइंस में हमारी आंतों को Second Brain कहा जाता है। इसके पीछे एक बहुत ही दिलचस्प विज्ञान है। दरअसल, हमारी आंतों की परतों में लगभग 50 करोड़ (500 Million) से अधिक तंत्रिका कोशिकाएं (Neurons) होती हैं। न्यूरॉन्स के इस विशाल नेटवर्क को हम Enteric Nervous System (ENS) कहते हैं। यह सिस्टम इतना शक्तिशाली है कि यह हमारे मुख्य मस्तिष्क (Brain) की सीधी मदद के बिना भी पाचन तंत्र की कई जटिल क्रियाओं को अकेले नियंत्रित कर सकता है।
ये दोनों आपस में एक हाई-स्पीड डेटा केबल की तरह जुड़े हैं, जिसे मेडिकल भाषा में Gut-Brain Axis कहा जाता है। इनके बीच का यह दोतरफा संबंध मुख्य रूप से तीन कड़ियों पर टिका है:
IBS (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम) के मरीजों के लिए मानसिक तनाव कितना खतरनाक साबित हो सकता है? क्या स्ट्रेस इसे और गंभीर बना देता है?
जब एक IBS का मरीज अत्यधिक मानसिक तनाव से गुजरता है, तो उसका सीधा असर उसके पेट पर इस तरह दिखता है।
लोग अक्सर पेट खराब होने पर खुद ही एंटीबायोटिक्स या कायम चूर्ण जैसी दवाएं लेने लगते हैं। अगर समस्या की जड़ स्ट्रेस है, तो इस तरह की सेल्फ-मेडिकेशन के क्या नुकसान हो सकते हैं?
लोगों को यह समझना होगा कि यदि दस्त या पेट खराब होने का कारण कोई बैक्टीरियल इन्फेक्शन (संक्रमण) नहीं बल्कि मानसिक तनाव है, तो एंटीबायोटिक दवाएं लेने का कोई फायदा नहीं होगा। तनाव की स्थिति में बिना सोचे-समझे दवाएं लेने के गंभीर दुष्परिणाम होते हैं, जिन्हें हम दो भागों में समझ सकते हैं।
कायम चूर्ण या जुलाब (Laxatives) के लगातार सेवन के नुकसान:
क्या सिर्फ खान-पान बदलने या एंटासिड लेने से स्ट्रेस के कारण होने वाली पेट की बीमारियां ठीक हो सकती हैं, या इसके लिए थेरेपी/काउंसलिंग की जरूरत पड़ती है?
इलाज का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या कितनी गंभीर है। हम इसे दो श्रेणियों में बांटकर समझ सकते हैं:
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसमें किस तरह से मदद करते हैं? क्या इसके लिए भी कोई विशेष थेरेपी होती है?
इसके लिए बहुत ही प्रभावी साइकोलॉजिकल थेरेपी मौजूद हैं जैसे