
India Air Crash Aviation Safety In India : हवाई दुर्घटना काफी ज्यादा बढ़ गई है। कभी हेलीकॉप्टर खराब मौसम का शिकार हो जाता है तो कभी तकनीकी खराबी, पायलट या क्रू की गलती जैसे बड़े कारण होते हैं। हर बड़े हादसे के बाद सरकार और प्रशासन द्वारा जांच बिठाई जाती है, गलतियां पकड़ी जाती हैं और सुरक्षा के नए नियम भी बनते हैं, फिर भी विमान हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। आखिर इन हादसों की असली वजह क्या है, जो हवाई यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनने दे रही है?
एक साल पहले 12 जून 2025 को अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 विमान हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस दुर्घटना में 260 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और फिर हवाई सुरक्षा पर बहस शुरू हो गई थी। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब किसी हवाई हादसे ने देश को सोचने पर मजबूर किया हो। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो के मुताबिक 2012 से 2026 तक देश में 117 हवाई दुर्घटनाएं और 131 गंभीर घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें विमान, हेलीकॉप्टर और प्रशिक्षण विमान शामिल हैं।
| वर्ष | दुर्घटनाएं (Accidents) | गंभीर घटनाएं/इंसिडेंट्स (Serious Incidents/Incidents) |
|---|---|---|
| 2012 (जुलाई से) | 4 | 2 |
| 2013 | 8 | 7 |
| 2014 | 7 | 8 |
| 2015 | 10 | 5 |
| 2016 | 7 | 11 |
| 2017 | 6 | 11 |
| 2018 | 8 | 16 |
| 2019 | 10 | 27 |
| 2020 | 7 | 10 |
| 2021 | 9 | 6 |
| 2022 | 12 | 7 |
| 2023 | 10 | 5 |
| 2024 | 6 | 8 |
| 2025 | 8 | 5 |
| 2026 | 5 | 3 |
| कुल | 117 | 131 |
आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2012 से लेकर 2026 तक देश में कुल 117 हवाई हादसे दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें साल 2022 सबसे खराब रहा जिसमे 12 दुर्घटनाएं हुईं। इसके अलावा 2019 और 2023 में 10-10, अकेले साल 2025 में 8 हादसे हुए, जिनमें सामान्य विमानों से लेकर ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर तक शामिल थे। आंकड़े बताते हैं कि हवाई सुरक्षा को लेकर अभी बहुत कुछ सुधारे जाने की जरूरत है।
एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के साथ हुआ, जो बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान से अहमदाबाद से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए रवाना हुई थी। दोपहर करीब 1:39 बजे सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने वाले इस विमान में कुल 242 यात्री और क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली और 1 कनाडाई नागरिक शामिल थे। यह दुर्घटना इतनी भीषण थी कि विमान पूरी तरह नष्ट हो गया और इसकी टक्कर से एक कॉलेज की कई इमारतों में भी भारी आग लग गई। साल 2011 में बोइंग 787 विमानों की शुरुआत के बाद से यह इस मॉडल का पहला ऐसा बड़ा हादसा था जिसमें विमान पूरी तरह तबाह हुआ। साथ ही, यह 2020 के दशक की दुनिया की सबसे बड़ी हवाई त्रासदी बन गई और साल 1985 के एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके के बाद, एयर इंडिया के इतिहास की दूसरी सबसे घातक घटना के रूप में दर्ज हुई।
अगस्त 2020 में दुबई से आ रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX1344 केरल के कोझिकोड (करीपुर) हवाई अड्डे पर हादसे का शिकार हो गई। शुक्रवार की शाम करीब 7:45 बजे भारी बारिश और कम रोशनी के कारण यह विमान लैंडिंग के समय रनवे से फिसल गया और 30 फीट गहरी खाई में गिरकर दो टुकड़ों में टूट गया। इस विमान में क्रू मेंबर्स और 10 नवजात बच्चों समेत कुल 191 लोग सवार थे, जिनमें से 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। बाद में जांच से साफ हुआ कि भारी बारिश, धुंधले मौसम और पहाड़ों को काटकर बने खतरनाक टेबल-टॉप रनवे की वजह से यह बड़ा हादसा हुआ था।
जून 2013 में उत्तराखंड आपदा के दौरान, राहत और बचाव कार्य में जुटा भारतीय वायुसेना का Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर गौरीकुंड के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दर्दनाक हादसे में हेलीकॉप्टर पर सवार सभी 20 लोगों की मौत हो गई। बाद में हुई जांच से पता चला कि बहुत खराब मौसम, ऊंचाई वाला पहाड़ी इलाका और लगातार उड़ानों के भारी दबाव की वजह से यह हादसा हुआ था। इस घटना ने सिखाया कि आपदा के समय जल्दबाजी करना और मौसम का सही अंदाजा न लगा पाना कितना बड़ा खतरा बन सकता है। इसके बाद सरकार ने पहाड़ी इलाकों में उड़ान भरने के नियमों (SOP) में बदलाव किया और पायलटों को पहाड़ों में उड़ने की खास ट्रेनिंग देना शुरू किया।
दिसंबर 2021 में तमिलनाडु के कुन्नूर में भारतीय वायुसेना का एक और Mi-17V5 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस बेहद दुखद हादसे में देश के पहले सीडीएस (CDS) जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और कई अन्य सैन्य अधिकारियों समेत कुल 14 लोगों की मौत हो गई। जांच से पता चला कि उड़ान के दौरान अचानक घना कोहरा और बादल छा जाने से रोशनी बहुत कम हो गई, जिससे पायलट को दिशा का सही अंदाजा नहीं मिल पाया और हेलीकॉप्टर पहाड़ी से टकरा गया।
मई 2025 में उत्तरकाशी के गंगनानी इलाके में एक हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हो गया, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई। जांच से पता चला कि पायलट इमरजेंसी लैंडिंग की कोशिश कर रहा था, लेकिन इसी दौरान हेलीकॉप्टर का पंखा एक बिजली या रोपवे के तार से टकरा गया। इसके एक महीने बाद ही जून में गौरीकुंड के पास एक और हेलीकॉप्टर दुर्घटना हुई, जिसमें 7 लोगों की जान चली गई और इसकी वजह खराब मौसम और कम रोशनी को माना गया। इन दोनों हादसों ने यह साफ कर दिया कि पहाड़ी इलाकों में सिर्फ खराब मौसम ही नहीं, बल्कि जमीन पर मौजूद तार जैसी रुकावटें और सही निगरानी की कमी भी उड़ानों के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं।
साल 2012 से 2026 के बीच हुए 117 हवाई हादसे सावधान करने के लिए काफी हैं। अहमदाबाद, कोझिकोड, केदारनाथ, कुन्नूर और उत्तरकाशी जैसी जगहों पर हुई इन दुर्घटनाओं से साफ है कि हवाई सफर को सुरक्षित बनाने के लिए बेहतर तकनीक, अच्छे मौसम और सही समय पर सही फैसले लेना कितना जरूरी है। हर हादसे के बाद सुरक्षा के नए नियम तो बनाए गए, लेकिन आसमान का सफर असल मायने में तभी पूरी तरह सुरक्षित हो पाएगा जब इन नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा।