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India Air Crash: 14 साल, 117 हवाई हादसे और सैकड़ों मौतें हर दुर्घटना के बाद नियम बदले, फिर भी क्यों नहीं थम रहा खतरा?

India Air Crash Analysis: साल 2012 से 2026 के बीच भारत में 117 हवाई दुर्घटनाएं दर्ज हुईं। अहमदाबाद विमान हादसे से लेकर केदारनाथ, कोझिकोड और CDS बिपिन रावत हेलीकॉप्टर दुर्घटना तक, जानिए इन हादसों की वजह क्या थी, इनके बाद क्या बदलाव किए गए।

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Jun 12, 2026
Air Accidents Plane Crash Air India AI-171
एक के बाद एक विमान दुर्घटनाएं (photo,AI)

India Air Crash Aviation Safety In India : हवाई दुर्घटना काफी ज्यादा बढ़ गई है। कभी हेलीकॉप्टर खराब मौसम का शिकार हो जाता है तो कभी तकनीकी खराबी, पायलट या क्रू की गलती जैसे बड़े कारण होते हैं। हर बड़े हादसे के बाद सरकार और प्रशासन द्वारा जांच बिठाई जाती है, गलतियां पकड़ी जाती हैं और सुरक्षा के नए नियम भी बनते हैं, फिर भी विमान हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। आखिर इन हादसों की असली वजह क्या है, जो हवाई यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनने दे रही है?

हवाई हादसे ने देश को सोचने पर किया मजबूर

एक साल पहले 12 जून 2025 को अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 विमान हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस दुर्घटना में 260 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और फिर हवाई सुरक्षा पर बहस शुरू हो गई थी। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब किसी हवाई हादसे ने देश को सोचने पर मजबूर किया हो। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो के मुताबिक 2012 से 2026 तक देश में 117 हवाई दुर्घटनाएं और 131 गंभीर घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें विमान, हेलीकॉप्टर और प्रशिक्षण विमान शामिल हैं।

2012 से 2026 तक देश में हवाई दुर्घटनाएं

वर्षदुर्घटनाएं (Accidents)गंभीर घटनाएं/इंसिडेंट्स (Serious Incidents/Incidents)
2012 (जुलाई से)42
201387
201478
2015105
2016711
2017611
2018816
20191027
2020710
202196
2022127
2023105
202468
202585
202653
कुल117131

हवाई सुरक्षा को लेकर बहुत कुछ सुधारे की जरूरत

आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2012 से लेकर 2026 तक देश में कुल 117 हवाई हादसे दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें साल 2022 सबसे खराब रहा जिसमे 12 दुर्घटनाएं हुईं। इसके अलावा 2019 और 2023 में 10-10, अकेले साल 2025 में 8 हादसे हुए, जिनमें सामान्य विमानों से लेकर ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर तक शामिल थे। आंकड़े बताते हैं कि हवाई सुरक्षा को लेकर अभी बहुत कुछ सुधारे जाने की जरूरत है।

इस मॉडल का पहला बड़ा हादसा

एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के साथ हुआ, जो बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान से अहमदाबाद से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए रवाना हुई थी। दोपहर करीब 1:39 बजे सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने वाले इस विमान में कुल 242 यात्री और क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली और 1 कनाडाई नागरिक शामिल थे। यह दुर्घटना इतनी भीषण थी कि विमान पूरी तरह नष्ट हो गया और इसकी टक्कर से एक कॉलेज की कई इमारतों में भी भारी आग लग गई। साल 2011 में बोइंग 787 विमानों की शुरुआत के बाद से यह इस मॉडल का पहला ऐसा बड़ा हादसा था जिसमें विमान पूरी तरह तबाह हुआ। साथ ही, यह 2020 के दशक की दुनिया की सबसे बड़ी हवाई त्रासदी बन गई और साल 1985 के एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके के बाद, एयर इंडिया के इतिहास की दूसरी सबसे घातक घटना के रूप में दर्ज हुई।

हवाई अड्डे पर हादसे का शिकार

अगस्त 2020 में दुबई से आ रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX1344 केरल के कोझिकोड (करीपुर) हवाई अड्डे पर हादसे का शिकार हो गई। शुक्रवार की शाम करीब 7:45 बजे भारी बारिश और कम रोशनी के कारण यह विमान लैंडिंग के समय रनवे से फिसल गया और 30 फीट गहरी खाई में गिरकर दो टुकड़ों में टूट गया। इस विमान में क्रू मेंबर्स और 10 नवजात बच्चों समेत कुल 191 लोग सवार थे, जिनमें से 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। बाद में जांच से साफ हुआ कि भारी बारिश, धुंधले मौसम और पहाड़ों को काटकर बने खतरनाक टेबल-टॉप रनवे की वजह से यह बड़ा हादसा हुआ था।

उत्तराखंड आपदा के दौरान दुर्घटनाग्रस्त

जून 2013 में उत्तराखंड आपदा के दौरान, राहत और बचाव कार्य में जुटा भारतीय वायुसेना का Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर गौरीकुंड के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दर्दनाक हादसे में हेलीकॉप्टर पर सवार सभी 20 लोगों की मौत हो गई। बाद में हुई जांच से पता चला कि बहुत खराब मौसम, ऊंचाई वाला पहाड़ी इलाका और लगातार उड़ानों के भारी दबाव की वजह से यह हादसा हुआ था। इस घटना ने सिखाया कि आपदा के समय जल्दबाजी करना और मौसम का सही अंदाजा न लगा पाना कितना बड़ा खतरा बन सकता है। इसके बाद सरकार ने पहाड़ी इलाकों में उड़ान भरने के नियमों (SOP) में बदलाव किया और पायलटों को पहाड़ों में उड़ने की खास ट्रेनिंग देना शुरू किया।

जिससे पायलट को दिशा का सही अंदाजा नहीं

दिसंबर 2021 में तमिलनाडु के कुन्नूर में भारतीय वायुसेना का एक और Mi-17V5 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस बेहद दुखद हादसे में देश के पहले सीडीएस (CDS) जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और कई अन्य सैन्य अधिकारियों समेत कुल 14 लोगों की मौत हो गई। जांच से पता चला कि उड़ान के दौरान अचानक घना कोहरा और बादल छा जाने से रोशनी बहुत कम हो गई, जिससे पायलट को दिशा का सही अंदाजा नहीं मिल पाया और हेलीकॉप्टर पहाड़ी से टकरा गया।

खराब मौसम के कारण हुई दुर्घटना

मई 2025 में उत्तरकाशी के गंगनानी इलाके में एक हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हो गया, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई। जांच से पता चला कि पायलट इमरजेंसी लैंडिंग की कोशिश कर रहा था, लेकिन इसी दौरान हेलीकॉप्टर का पंखा एक बिजली या रोपवे के तार से टकरा गया। इसके एक महीने बाद ही जून में गौरीकुंड के पास एक और हेलीकॉप्टर दुर्घटना हुई, जिसमें 7 लोगों की जान चली गई और इसकी वजह खराब मौसम और कम रोशनी को माना गया। इन दोनों हादसों ने यह साफ कर दिया कि पहाड़ी इलाकों में सिर्फ खराब मौसम ही नहीं, बल्कि जमीन पर मौजूद तार जैसी रुकावटें और सही निगरानी की कमी भी उड़ानों के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं।

क्या नए नियम बनाए गए

  • पायलटों की थकान को दूर करने के लिए DGCA ने काम के घंटे तय किए हैं और आराम के समय (Rest Period) को बढ़ा दिया है। लंबी ड्यूटी और कम आराम पर कड़ी निगरानी रखी जाती है।
  • खराब मौसम होने पर उड़ानों को तुरंत रोकने का नियम बनाया गया है। साथ ही, इन रूटों पर उड़ान भरने के लिए केवल अनुभवी पायलटों को ही तैनात करने की शर्त अनिवार्य की गई है।
  • सभी एयरलाइंस और हेलीकॉप्टर कंपनियों के लिए एक ऐसी सुरक्षा प्रणाली लागू करना जरूरी कर दिया गया है जो संभावित जोखिमों को पहले ही पहचान सके। इसके तहत हर छोटी तकनीकी या परिचालन संबंधी घटना की रिपोर्टिंग और विश्लेषण करना होता है।
  • विमानों और हेलीकॉप्टरों की उड़ान के डेटा की लगातार डिजिटल मॉनिटरिंग की जाती है। यदि कोई पायलट तय मानकों से अलग या खतरनाक पैटर्न में उड़ान भरता है, तो उसे पहले ही चिन्हित कर लिया जाता है।
  • देश के सभी टेबल-टॉप रनवे वाले एयरपोर्टों पर बारिश और कम दिखने के दौरान लैंडिंग करने के नियमों को और अधिक सख्त व सुरक्षित बनाया गया है।
  • पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में उड़ान भरने वाले हेलीकॉप्टरों और विमानों के लिए टेरेन अवेयरनेस एंड वार्निंग सिस्टम और ग्राउंड प्रॉक्सिमिटी वार्निंग सिस्टम जैसे आधुनिक सुरक्षा उपकरणों का उपयोग अनिवार्य किया गया है।
  • विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो को स्वतंत्र रूप से जांच करने और नई सुरक्षा सिफारिशें जारी करने के लिए पहले से अधिक शक्तियां और अधिकार दिए गए हैं।

सख्ती से पालन

साल 2012 से 2026 के बीच हुए 117 हवाई हादसे सावधान करने के लिए काफी हैं। अहमदाबाद, कोझिकोड, केदारनाथ, कुन्नूर और उत्तरकाशी जैसी जगहों पर हुई इन दुर्घटनाओं से साफ है कि हवाई सफर को सुरक्षित बनाने के लिए बेहतर तकनीक, अच्छे मौसम और सही समय पर सही फैसले लेना कितना जरूरी है। हर हादसे के बाद सुरक्षा के नए नियम तो बनाए गए, लेकिन आसमान का सफर असल मायने में तभी पूरी तरह सुरक्षित हो पाएगा जब इन नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा।

Published on:
12 Jun 2026 05:40 pm