Crime Rate: दुनिया भर में अपराध बढ़ता जा रहा है और इसके स्वरूप में भी तेजी से बदल आ रहा है। साइबर क्राइम और डिजिटल ठगी ने नया खतरा पैदा कर दिया है। विकसित और विकासशील दोनों ही देशों में अपराध के आंकड़े और उनके तरीके लगातार बदल रहे हैं, जिससे अपराध एक बड़ी चुनौती बन गई है।
Crime Rate in India: दुनिया में ऐसा दौर चल रहा है, जहां अपराधों का दायरा बढ़ता जा रहा है। अपराध के ग्राफ घटने की बजाय हर दिन नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। पूरी दुनिया में हो रहे अपराधों के आंकड़ों पर नजर डालते है तो यह समझ में आता है कि कोई भी कोना पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह गया है।
दुनिया के सबसे सुरक्षित देशों में गिने जाने वाले जापान में भी अपराध दर प्रति लाख आबादी पर 0.2 से 0.3 के बीच है, जबकि ब्राजील और मेक्सिको जैसे देशों में यह आंकड़ा 22 से 26 के पार पहुंच गया। जिसका मुख्य कारण अपराधी गिरोह और ड्रग कार्टेल्स हैं।
दुनिया में सबसे ताकतवर माने जाने वाले अमेरिका की स्थिति बेहद गंभीर है। वहां सालाना 12 लाख से अधिक हिंसक मामले दर्ज किए जाते हैं। भारत के मुकाबले ब्रिटेन और जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों में गंभीर हिंसा कम दर्ज किए जा रहे हैं, लेकिन वहां चोरी और साइबर अपराध अब पुलिस के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुके हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े के अनुसार भारत में अपराधी सड़क पर भी हैं और इंटरनेट के तारों में भी। साल 2025 में अपराध का तरीका पूरी तरह बदल गया है। जहां हत्या और डकैती के मामलों तो बढ़ ही रहे हैं, वहीं 'डिजिटल अरेस्ट' और 'AI डीपफेक' ने आम आदमी की नींद उड़ा दी है।
पिछले एक दशक में अपराध की दुनिया में एक 'साइलेंट रिवॉल्यूशन' दिखा है । साल 2013 में जब देश में करीब 26 लाख अपराध दर्ज होते थे, तब पुलिस के पास ज्यादातर मामले चोरी, मारपीट या जमीन के विवाद के आते थे। लेकिन यह आंकड़ा 60 लाख के करीब पहुंच गया है। इसका सबसे बड़ा कारण ऑनलाइन एफआईआर (Online FIR) की सुविधा है। अब लोग छोटे से अपराध की शिकायत भी घर बैठे कर देते हैं, जिससे कागजों पर आंकड़े बढ़ते ही चले जा रहे हैं।
साल 2025 में भारत के सामने डिजिटल साइबर क्राइम का खतरा गंभीर मुद्दा बन चुका है। इस एक साल में साइबर ठगों ने भारतीयों की मेहनत से अर्जित लगभग 22,495 करोड़ रुपये उनके खातों से उड़ा लिए। वर्ष 2024 के मुकाबले साइबर ठगी में 24% की भारी बढ़ोतरी हुई है। अपराधी आपके घर में घुसे बगैर में ही आपको 'डिजिटल अरेस्ट' करके बैंक खाते खाली करवा ले रहे हैं। निवेश के नाम पर झांसा देना, फर्जी केवाईसी अपडेट और AI के जरिए आवाज बदलकर ठगी करते हैं।
उत्तर प्रदेश और केरल का नाम अपराध के आंकड़ों को लेकर आगे है। उत्तर प्रदेश में हर साल औसतन 4,01,000 से 6,00,000 के बीच मामले दर्ज होते हैं। लेकिन यहां की आबादी बहुत ज्यादा है, इसलिए लोगों की संख्या के हिसाब से मामलों का बढ़ना स्वाभाविक है। केरल में हर साल लगभग 2,35,000 से 3,90,000 के बीच मामले दर्ज होते हैं। वहां लोग ज्यादा पढ़े-लिखे और जागरूक हैं, इसलिए छोटी से छोटी घटना की भी रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है।
देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में साल 2013 में करीब 3.09 लाख मामले दर्ज किए गए थे, जो बढ़कर 2022 में 4.45 लाख हो गए। लगभग हर घंटे 51 एफआईआर दर्ज कराए जाते हैं। इसमें करीब 31% मामले पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के सामने आ रहे हैं। मतलब घर के बाहर तो असुरक्षित माहौल है, अंदर भी महिलाएं सुरक्षित नहीं है। वहीं, 2025 में साइबर स्टॉकिंग जैसे मामले उभर कर सामने आने लगे हैं। सोशल मीडिया के जरिए महिलाओं को परेशान करने वाले गिरोह अब और भी शातिर हो गए हैं।
| क्रम संख्या | राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | अपराध दर |
|---|---|---|
| 1 | दिल्ली | 144.4 |
| 2 | हरियाणा | 118.7 |
| 3 | तेलंगाना | 117 |
| 4 | राजस्थान | 115.1 |
| 5 | ओडिशा | 103 |
| 6 | आंध्र प्रदेश | 96.2 |
| 7 | अंडमान और निकोबार द्वीप समूह | 93.7 |
| 8 | केरल | 82 |
| 9 | असम | 81 |
| 10 | मध्य प्रदेश | 78.8 |
| 11 | उत्तराखंड | 77 |
| 12 | महाराष्ट्र | 75.1 |
| 13 | पश्चिम बंगाल | 71.8 |
2022 की तुलना में कुल पंजीकृत अपराधों में 7.2% की वृद्धि दर्ज की गई है। औसतन हर पांच सेकंड में एक अपराध रिपोर्ट हुआ, और कुल मामलों की संख्या बढ़कर लगभग 62 लाख तक पहुंच गई। इसी दौरान अपराध दर (प्रति लाख जनसंख्या पर अपराध) 2022 में 422.2 से बढ़कर 2023 में 448.3 हो गई। वहीं, लगातार चौथे साल भी कोलकाता ने भारत का सबसे सुरक्षित शहर होने का खिताब अपने पास रखा है। कोलकाता मे प्रति लाख आबादी पर अपराध दर सबसे कम (83.9) है। वहीं, पुणे और हैदराबाद ने भी सुरक्षा के मामले में अच्छा प्रदर्शन किया है। दूसरी ओर, दिल्ली अभी भी महिलाओं के खिलाफ अपराध और चोरी जैसे स्ट्रीट क्राइम से जूझ रही है। कोच्चि जैसे शहरों में भी अपराध दर ऊंची दर्ज की गई है, जिसका कारण वहां की शत-प्रतिशत साक्षरता और सख्त रिपोर्टिंग प्रणाली को माना जा रहा है।
एनसीआरबी के रिपोर्ट अनुसार
साइबर अपराध में वृद्धि
बच्चों के खिलाफ अपराधों में पिछले वर्षों की तुलना में 9.2% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इन अपराधों में सबसे अधिक हिस्सेदारी अपहरण के मामलों की है, जो लगभग 45% तक पहुंच चुके हैं, जबकि POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) कानून के तहत दर्ज मामले 38.2% तक पाए गए हैं।
कमजोर वर्गों के खिलाफ अपराध
बच्चों के खिलाफ अपराधों में 9.2% की बढ़ोतरी हुई है। इनमें अपहरण (45%) और POCSO कानून के तहत दर्ज मामले (38.2%) सबसे ज्यादा हैं।
अनुसूचित जाति (SC) के खिलाफ अपराध
एससी वर्ग के खिलाफ अपराधों में 0.4% की हल्की बढ़ोतरी हुई है। सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए, इसके बाद मध्य प्रदेश और बिहार का स्थान रहा है।
अनुसूचित जनजाति (ST) के खिलाफ अपराध
एसटी वर्ग के खिलाफ अपराधों में 28.8% की बड़ी और चिंताजनक बढ़ोतरी देखी गई है। मणिपुर और मध्य प्रदेश में ऐसे मामले सबसे ज्यादा सामने आए हैं।
पुलिस और न्याय व्यवस्था की स्थिति
आईपीसी मामलों में पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल करने की दर थोड़ी बेहतर हुई है, जो 71.3% से बढ़कर 72.7% हो गई है। लेकिन दोषसिद्धि दर 54% पर ही स्थिर है।