India defence budget 2026: भारत के रक्षा बजट में 15 फीसदी की बढ़ोतरी की गई। यह अब तक सबसे बड़ा रक्षा बजट है। रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी की क्या वजह, एक्सपर्ट से जानिए।
Defence Budget 2026 : भारत लगातार अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी कर रहा है। बीते साल रक्षा बजट 6,81,210 करोड़ रुपये था जबकि आगामी बजट 7,84,678 करोड़ रुपये का किया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जिसमें सबसे ज्यादा बजट में रक्षा खर्च के लिए दिया। बताया जा रहा है कि रक्षा के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा बजट है।
वहीं दूसरी ओर पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भारत का रक्षा आवंटन आने के 24 घंटे भी नहीं बीते कि अपने रक्षा बजट में 15 फीसदी बजट की बढ़ोतरी की घोषणा कर दी। पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के तत्काल बाद अपने बजट में भारी-भरकम बढ़ोतरी की थी।
India And Pakistan War : भारत के रक्षा बजट में पिछले साल की तुलना में 15 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। पिछले साल पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद अपना रक्षा आवंटन बढ़ाकर 9 बिलियन डॉलर कर दिया था। यह उसके पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी थी। भारत लगभग 80 अरब डॉलर प्रति वर्ष रक्षा पर खर्च करता है, जबकि पाकिस्तान लगभग 10-12 अरब डॉलर प्रति वर्ष। भारत रक्षा पर 7 से 8 गुना अधिक खर्च करता है। जिससे आधुनिक प्रौद्योगिकी, उन्नत हथियारों और अनुसंधान में बेहतर निवेश संभव हो पाता है।
भारत में पिछले साल रक्षा के लिए 68 लाख करोड़ रुपये आवंटित किया गया था, जबकि 2026-27 में 7.84 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह राशि अगले वित्तीय वर्ष के अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 2% है। प्रस्तावित रक्षा बजट सरकारी व्यय का 14.7% है और सभी मंत्रालयों में सबसे अधिक है। यह कुल बजट का 14.68 फ़ीसदी हिस्सा है जबकि ये बीते साल 13.45 फ़ीसदी था।
रक्षा बजट में इस बार 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। 7.84 लाख करोड़ रुपये का बजट आया है। यह कहा जा रहा है कि इतना बड़ा बजट कभी नहीं आया। इतने बड़े बजट की क्या जरूरत थी? इस सवाल के जवाब में भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल के जे एस ढिल्लों (सेवानिवृत्त) ने पत्रिका से बातचीत में बताया, 'ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहला बजट है। देश जंग में गया तो काफी चीजें सामने आई। देखिए, लड़ाई का चेहरा अब तेजी से बदल रहा है। पहले ट्रेंच वारफेयर होता था। कॉन्टैक्ट वॉरफेयर होता था। लॉन्ग रेंज वॉरफेयर होता था। जमीन जीती जाती थी, युद्धबंदी बनाए जाते थे। इस लड़ाई में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इस बार पूरे 4 दिन (करीब 88 घंटे की लड़ाई) नॉन कॉन्टैक्ट वॉरफेयर चला। न किसी सैनिक ने बॉर्डर क्रॉस किया। ना किसी टैंक ने बॉर्डर क्रॉस किया। ना किसी एयरक्राफ्ट ने हवा में बॉर्डर क्रॉस किया। नॉन कॉन्टैक्ट वॉरफेयर में तकनीक की भूमिका बहुत बढ़ जाती है। इसमें स्पेस, साइबर, ड्रोन्स, मिसाइल, रॉकेट्स शामिल होते हैं। इन सबके चलते जंग को नए सिरे से देखा जा रहा है और लड़ाई के सिस्टम को अपग्रेड करने की जरूरत महसूस की जा रही है।'
उन्होंने कहा कि युद्ध के बदलते रूप के चलते हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को अपडेट किया जा रहा है। कुछ नए सिस्टम, कुछ नए हथियार खरीदे जा रहे हैं। आपने गणतंत्र दिवस पर देखा होगा कि भारतीय सेना ने भैरों बटालियन (Bhairav Battalion) और रुद्र ब्रिगेड (Rudra Brigade) नई गठित की है। इन सबके लिए पैसों की दरकार होती है। सेना के आधुनिकीकरण पर खर्च बढ़ा है, जो बहुत जरूरी है। इस बार बजट में जो कैपिटल में उछाल है, वह एक अच्छी बात है। सशस्त्र सेनाओं के लिए नए और आधुनिक हथियार खरीदे जाएंगे और जो पुराने हथियार हैं, उन्हें इनके साथ इन्टीग्रेट किया जाएगा।
आज की दुनिया को देखकर ऐसा लग रहा कि सिर्फ पड़ोसी देश से युद्ध का खतरा नहीं है, बल्कि बहुत दूर-दराज से भी कहीं कोई हमला हो सकता है। क्या विश्व की नई परिस्थितियों की तैयारी के लिहाज से भी रक्षा बजट को बढ़ाया गया है? इसके जवाब उन्होंने कहा कि मंशा रातभर में बदल सकती है। आज जो दुश्मन है, कल दोस्त बन जाए। आज जो दोस्त हैं, वह कल दुश्मन बन जाए। कल को आप क्या कहेंगे कि अरे, हमारी तो तैयारी ही नहीं थी। इससे काम नहीं चल सकता न। अपने देश की सैनिक क्षमता रात भर में नहीं बढ़ाई जा सकती। देश की क्षमता या सैन्य क्षमता को बनाने में दशकों लगते हैं। इस काम में पैसे भी लगते हैं। सैन्य क्षमता की तैयारी का सबसे बेहतर समय शांति वाला समय ही होता है। अगर आप चाहते हैं कि युद्ध ना हो, इसका सबसे अच्छा तरीका है कि युद्ध के लिए हमेशा तैयार रहो।
सरकार के तकनीकी रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर सशस्त्र बलों के दृष्टिकोण के अंतर्गत सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के अलावा, बढ़ी हुई धनराशि का उपयोग ऑपरेशन सिंदूर के बाद हथियारों और गोला-बारूद की आपातकालीन खरीद से उत्पन्न वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी किया जाएगा। कुल आवंटन में से 27.9% पूंजीगत व्यय, 20.2% रखरखाव और परिचालन तैयारियों पर राजस्व व्यय, 26.4% वेतन और भत्तों पर राजस्व व्यय, 21.8% रक्षा पेंशन और 3.6% नागरिक संगठनों के लिए है।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, दिसंबर 2025 तक की तीसरी तिमाही में, रक्षा मंत्रालय ने 2.1 लाख करोड़ रुपये के अनुबंध संपन्न किए हैं और अब तक 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं के लिए आवश्यकता संबंधी स्वीकृति प्रदान की है। पूंजी अधिग्रहण के अंतर्गत आने वाली परियोजनाओं के तहत सेनाओं को अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान, स्मार्ट और घातक हथियार, जहाज, पनडुब्बियां, यूएवी, ड्रोन और विशेष वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे।
| वित्त वर्ष (FY) | रक्षा बजट (₹ करोड़) |
|---|---|
| 2014-15 | ₹2,29,000 करोड़* |
| 2015-16 | ₹2,46,000 करोड़ |
| 2016-17 | ₹2,58,000 करोड़ |
| 2017-18 | ₹3,59,000 करोड़ |
| 2018-19 | ₹4,04,000 करोड़ |
| 2019-20 | ₹4,31,000–₹4,48,820 करोड़† |
| 2020-21 | ₹4,71,000 करोड़ |
| 2021-22 | ₹4,78,000 करोड़ |
| 2022-23 | ₹5,25,000 करोड़ |
| 2023-24 | ₹5,93,000 करोड़ |
| 2024-25 | ₹6,21,940 करोड़ |
| 2025-26 | ₹6,81,210.27 करोड़ |
| 2026-27 (प्रस्ताव) | ₹7,85,000 करोड़ |
लगभग 63,734 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय विमानों और एयरो इंजनों के लिए निर्धारित किया गया है। वहीं भारतीय वायु सेना अपने लड़ाकू बेड़े को मजबूत करने के लिए 114 फ्रांसीसी मूल के राफेल जेट खरीदने पर विचार कर रही है।
भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने अपने रक्षा आवंटन में 20 प्रतिशत से अधिक की और वृद्धि की थी। यह एक दशक में की गई सबसे बड़ी वृद्धि थी। रक्षा आवंटन बढ़ाकर 2.55 ट्रिलियन रुपये (लगभग 9 बिलियन डॉलर) कर दिया गया था। यह राशि पाकिस्तान की जीडीपी का 1.97 फीसदी थी।
वर्ष 2014-15 में देश का रक्षा बजट 2.3-2.5 लाख करोड़ रुपये का था, जो 2026-27 में बढ़कर 7.8 लाख करोड़ करोड़ का हो गया। पिछले 10 वर्षों में रक्षा बजट में तीन गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।